भारत-इजरायल मिलकर चंबल में बना रहे आधुनिक बंदूकें

नासिर हुसैन | News18India.com
Updated: May 18, 2017, 10:09 PM IST
भारत-इजरायल मिलकर चंबल में बना रहे आधुनिक बंदूकें
फाइल फोटो
नासिर हुसैन | News18India.com
Updated: May 18, 2017, 10:09 PM IST
जिस चंबल क्षेत्र में कभी बंदूकों से निकली गोलियों की आवाज गूंजती थी आज वहां हाईटेक बंदूकें बन रही हैं. बंदूकों का परीक्षण भी फैक्ट्री परिसर में बनी फायरिंग रेंज में किया जा रहा है. मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत पुंज लॉयड कंपनी की स्थापना की गई है, जहां  इन हथियारों का निर्माण किया जा रहा है.

इसके लिए भारत के साथ इजरायल की वेपन इंडस्ट्री की जानी-मानी कंपनी लॉयड ने साझेदारी की है. यह कंपनी मध्य प्रदेश के भिण्ड जिले के मालनपुर इंडस्ट्रीयल एरिया में स्थापित की गई है.

फाइल फोटो


कंपनी में बनेंगी खास एक्स 95 असॉल्ट राइफल

- यह राइफल चार किलोग्राम वजनी होती है.

- यह एक किलोमीटर की दूरी तक गोली दागती है.

- इससे एक बार में 650 राउंड तक गोली फायर होती है.

- सीआरपीएफ और दूसरी फोर्स नक्सल अभियान में इसका इस्तेमाल करती हैं.

- एनएसजी और एसपीजी के कमांडो वीवीआईपी और वीआईपी डयूटी में इस्तेमाल करते हैं.

टेवोर राइफल

- ये 550 मीटर तक की दूरी पर गोली दागती है.

- ये राइफल चार किलोग्राम वजनी होती है.

- ये एक बार में 650 राउंड तक गोली फायर करती है.

गलिल असॉल्ट राइफल

- ये एक किमी तक की दूरी पर गोली दागती है.

- ये एक बार में 750 राउंड तक गोली फायर करती है.

- इस राइफल को फोल्ड भी किया जा सकता है.

नेगेव लाइट मशीन गन

- ये एक किमी तक की दूरी पर गोली दागती है.

- ये एक बार में 1000 राउंड तक गोली फायर करती है.

- ये राइफल 7.5 किलोग्राम वजनी होती है.

ये फोर्स करती हैं इस तरह के हथियार का इस्तेमाल

जानकारों की मानें तो छोटे और सबसे ज्यादा मारक हथियारों का इस्तेमाल नौसेना के मरीन कमांडो, कोस्ट गार्ड, एयर फोर्स के गरुण कमांडो, सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो, बीएसएफ, आर्मी की स्पेशल फोर्स आदि करते हैं.
First published: May 18, 2017
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