अपनी कहानियों से बच्चों की दुनिया सजाने वाला लेखक


Updated: May 19, 2017, 5:14 PM IST
अपनी कहानियों से बच्चों की दुनिया सजाने वाला लेखक
तस्वीर : GETTY IMAGES

Updated: May 19, 2017, 5:14 PM IST
रस्किन बॉन्ड का जन्म 19 मई 1934 को हिमाचल प्रदेश के कसौली के एक फौजी अस्पताल में हुआ था. उनके पिता अब्रे बाॅॅॅन्‍ड, ब्रिटिश रॉयल एयरफोर्स में थे. जब वह 4 साल के थे तभी उनके माता-पिता का तलाक हो गया था. इसके बाद इनकी मां ने एक भारतीय व्यक्ति से शादी कर ली थी. 1944 में इनके दूसरे पिता की मलेरिया से मौत हो गई. इसके बाद वो अपनी दादी के साथ देहरादून में रहने लगे.

अपनी पढ़ाई शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से पूरी करने के बाद ये लंदन चले गए. 17 वर्ष की उम्र में इन्होंने अपना पहला उपन्यास 'रूम आन द रूफ' लिखा था. इसके लिए उन्हें प्रतिष्ठित जॉन लेवेनिन राइस अवार्ड' भी दिया गया था. लंदन में जब उनका मन नहीं लगा तो वो कुछ समय बाद वापस आकर भारत में ही बस गए.

500 से ज्यादा कहानियां लिखीं
रविन्द्रनाथ टैगोर, रुडयार्ड किपलिंग, और चार्ल्स डिकेन्स इनके पसंदीदा लेखक हैं. रस्किन बॉन्ड ने अब तक 500 से ज्यादा कहानियाँ, उपन्यास, संस्मरण और कविताएँ लिखी हैं जिनमें से अधिकतर बच्चों के लिए हैं जिन्हें आज भी बहुत पसंद किया जाता है. अपनी मजेदार व रोचक कहानियों एवं उपन्यासों के चलते इनके पाठक इन्हें कहानियों वाले दादाजी के रूप में देखने लगे.

बॉलीवुड को पसंद आईं कहानियां
रस्किन बॉन्ड की कहानियों पर कई फिल्में भी बनाई जा चुकी हैं. शशि कपूर ने 1978 में इनकी कहानी 'अ फ्लाइट ऑफ़ जन्स' पर 'जुनून' फिल्म बनाई थी. आज के दौर के निर्देशक विशाल भारद्वाज ने उनकी कहानी 'द ब्लू अम्ब्रेला, पर इसी नाम से फिल्म बनाई. 'सात खून माफ़' भी इनकी लघु कथा 'Susanna's Seven Husband' पर बनाई गई थी.

रस्किन बॉन्ड को साहित्य अकादमी द्वारा 1992 में अंग्रेजी लेखन के लिए उनकी लघु कहानियों के संकलन Our trees stil grow in Dehra के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है. 1999 में रस्किन बॉन्ड को बाल साहित्य में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया. इस समय वे मसूरी के पास लैंडोर में अपने परिवार के साथ रहते हैं. आज भी इतनी उम्र के बावजूद वो लगातार कुछ न कुछ लिख रहे हैं.

5 क्वोट्स जो बॉन्ड ने कहे

1. जो प्रेम मृत्यु से परे है, वही जीवन को बचाए रखता है.

2. मैं किताबों और दोस्तों पर पैसे खर्च करता हूं, पत्थर और ईंटों पर खर्च के लिए मेरे पास पैसे नहीं हैं.

3. खुशी बहुत रहस्यमयी है. यह आपको कहीं भी मिल सकती है, अभावों में या बहुत कुछ होने पर...

4. हंस पाने और दयावान होने का सामर्थ्य ही एकमात्र ऐसी चीज है, जो मनुष्य को जानवर से बेहतर बनाती है.

5. दुनिया में बदलाव के बारे में बात होती है, लेकिन हमेशा कहीं न कहीं कुछ ऐसा होता है, जो वैसा ही बना रहता है.
First published: May 19, 2017
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