#Lajja: खुफिया कैमरे में कैद हुआ 'वाइफ स्वैपिंग' का काला खेल

News18India
Updated: March 10, 2016, 10:50 AM IST
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Updated: March 10, 2016, 10:50 AM IST
नई दिल्ली। हमारे समाज में चोरी छिपे एक ऐसा घिनौना खेल खेला जा रहा है जो रिश्तों, मर्यादाओं को तार-तार कर रहा है। IBN7 ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए समाज की ऐसी ही एक सच्चाई से रुबरू कराया है जो कानून की नजर में न सही, लेकिन समाज की नजर में किसी जुर्म से कम नहीं है। दरअसल ये कहानी जुड़ी है पति-पत्नियों की अदला-बदली से। इस पूरे खेल को उजागर किया है अंडरकवर रिपोर्टर इंद्रजीत राय ने। ऑपरेशन लज्जा की ऐसी हलचल रही कि दिल्ली में ट्वीटर पर हैशटैग लज्जा ( #Lajja) ट्रेंड करता रहा।

कपल स्वैपिंग के इस खेल में देशभर के करीब 7000 कपल यानि 14000 लोग शामिल हैं। आईबीएन7 की टीम ने इस दुनिया में दाखिल होने की रास्ते तलाशे। हमें कुछ मोबाइल नंबर मिले, कुछ ईमेल आईडी मिलीं, जिनसे पति-पत्नियों की अदला-बदली करने वाले देशभर के हजारों लोग जुड़े थे। दो महीने लंबी तहकीकात के बाद हमारे अंडरकवर रिपोर्टर उस दुनिया में शामिल हो गए और हमारे कैमरे में कैद हुई मर्यादाओं को शर्मसार करतीं तमाम तस्वीरें। हमारी अंडरकवर टीम के दो सदस्य पति और पत्नी का भेष बदलकर उन लोगों से मिले।

करीब 10 दिन की कोशिश के बाद वाट्सएप के जरिए हमारा संपर्क दिल्ली के ही एक शादीशुदा जोड़े से हुआ। उस जोड़े ने हमें कुछ तस्वीरें भेजीं। बदले में इस जोड़े ने हमारे अंडर कवर रिपोर्टर्स की तस्वीर भी मांगी और फिर मिलने की जगह और मुलाकात का वक्त तय हो गया। दिल्ली के बड़े मॉल में हमारी मुलाकात उस शादीशुदा जोड़े से हुई। हमें कपल स्वैपिंग का न्योता देने वाला ये पति पेशे से डॉक्टर है और पत्नी एक फिजियोथिरेपिस्ट। ये शादीशुदा जोड़ा हमें भरोसा दिलाता रहा कि जोड़ियों की अदला-बदली का वो काला खेल पूरी तरह सुरक्षित है। ये दोनों सिर्फ पति-पत्नी नहीं थे, बल्कि इनकी गोद में एक तीन साल का बच्चा भी था।

इस महिला ने हमें बताया कि उसका डॉक्टर पति इस खेल का पुराना खिलाड़ी है। उसे भी मौज-मस्ती की ये लत वहीं से लगी। उस महिला की शादी को चार साल भी नहीं बीते थे। इस महिला के लिए अपने बच्चे की परवरिश से ज्यादा बड़ी थी खुद की मौज-मस्ती। ये महिला अपने पति और बच्चे की मौजूदगी में ही हमें वाइफ स्वैपिंग का न्योता दे रही थी।

हमारी मुलाकात राजधानी के एक और शादीशुदा जोड़े से हुई जो थोड़े शातिर थे। वे किसी अंजान से मुलाकात के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन कई दिन इंतजार के बाद इन्होंने हमें अपनी तस्वीरें भेजीं। पूरी तसल्ली के बाद हमसे मिलने के लिए तैयार हो गए। इसमें पति एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर एक्जिक्यूटिव है और पत्नी दिल्ली के एक बड़े कॉलेज में टीचर। हम इनके बदले हुए नाम दे रहे हैं।

उनसे बातचीत कुछ यूं हुई-

रिपोर्टर-आपकी शादी के कितने दिन हो गए

अंकित-आठ महीने हो गए

रिपोर्टर-आठ महीने,हम लोगों को लगभग ढाई साल

अंकित- ढाई साल

रिपोर्टर-लगभग

रिपोर्टर-बेसिक आईडिया तो हमारी तरफ से था। हम दोनों ने बात की आपस में। फिर इस नतीज़े पर पहुंचे। थोड़ा बहुत इनको कन्विंस भी करना पड़ा।

अंकित-सेम हियर, एक बार माईंड जो सेट है तो हो सकता है। अगर आप ज्यादा ही इमोशनली हो जाएं तो फिर तो बहुत ज्यादा इश्यू बन जाता है।

रिपोर्टर-नहीं आप इसको सिर्फ एक घंटे तक ही सीमित रखें तो?

अंकित-इज़ी माइंड। इजी वे में लेकर चलो तो कोई इश्यू नहीं है। टेक इट इज़ी। बस इतना ही कहना चाहता हूं कि टेक इट इज़ी। माइंड पर प्रेशर डालोगे कि ये करना है वो करना तो फिर नाटक हो जाता है। अपनी प्रॉब्लम को आप खुद ही बढ़ाते हैं और खुद ही कम करते हैं। इज़ी वे में लेते हो तो इज़ी है। इसीलिए मैं कहता हूं कि इज़ी रहो।

रिपोर्टर- तो इन्हें कन्वेंस करने में थोड़ी दिक्कत तो हुई होगी?

अंकित- नहीं, थोड़ा माइंड सेट करना पड़ा। आपसी अंडर स्टैंडिंग हमारी अच्छी है। आब्वियस सी बात है। आपकी भी अच्छी है तभी आप यहां पर आए हैं। मेन अंडर स्टैंडिंग पर डिपेंड करता है।

ये दोनों जिस अंडरस्टैंडिंग का दावा कर रहे हैं वो दरअसल मौजमस्ती का एक समझौता है। अब हमने इस पत्नी से पूछा कि क्या आप पूरी तरह तैयार हैं तो हमें कुछ ऐसा जवाब मिला...

रिपोर्टर- जी आपको कोई इश्यू किसी तरह का?

प्रिया- नहीं

अंकित- मेरे एकार्डिंग तो ये है,फर्स्ट टाइम बिजी हैं तो दो-तीन घंटे का प्रोसीज़र है। सेकेण्ड टाइम के लिए थोड़ा प्रिपेयर हो जाएं तो मे बी स्टार्टिंग करनी ही चाहिए। थोड़ी सी स्टार्टिंग कर लेनी चाहिए अभी। आपका सैटरडे-संडे फिक्स है। हमारा सैटरडे संडे कोई फिक्स नहीं है।

ये पति हम पर दबाव डाल रहा था कि वक्त बर्बाद करने से कोई फायदा नहीं। इसके मुताबिक बीवियों की अदला-बदली का खेल हमें आज भी खेलना चाहिए। हमने नासमझी का बहाना बना कर इसी सवाल को दोबारा उसके सामने रखा।

रिपोर्टर- नेक्स्ट टाईम में जब भी इसको मैटेरियलाइज़ करना हो तो आप हमारे यहां आएं या कैसे क्या किया जाए?

अंकित - अपनी तरफ से हम लोग मूड सेट करके आए थे। अब आप बताओ?

रिपोर्टर- नहीं नहीं आज या आगे?

अंकित- कोई बात नहीं। जयपुर का प्लान कर लेते हैं।

रिपोर्टर- नहीं एक दो बार में तो जयपुर नहीं।

अंकित- नेक्स्ट टाईम कभी भी, नहीं तो नोएडा ही आएंगे। और कोई आप्शन है नहीं।

रिपोर्टर- मतलब नोएडा। आपको हमारे यहां आने में कोई दिक्कत तो नहीं?

अंकित- नहीं कोई दिक्कत नहीं। यहां तक आ गए हैं। आप पर ट्रस्ट है, तभी आ गए। वरना काफी दूर पड़ता है।

रिपोर्टर-आप भी हमारी तरह फर्स्ट टाइमर ही हैं क्या?

अंकित- हां आप कह सकते हो। हमने मीटिंग की थी एक बार। एक कपल से। फिर बिजी हो गए थे कुछ काम में। कुछ प्राब्लम हो गई थी। फिर प्लान नहीं बन पाया मेरा दुबारा।

रिपोर्टर- वो क्या करते थे?

अंकित- वो फरीदाबाद में थे। आईटी सेक्टर में थे वो दोनों। एक बार हम गए थे। बस मिलने के लिए नार्मल। उसके बाद फिर हम आ गए। लेट हो गए थे। वैसे नौ-दस बज गए थे। हमने कहा नेक्सट टाइम प्लान करते हैं कभी..।

रिपोर्टर- पहली बार में मिलने में ही डर तो लगता है..।

अंकित- हां ये तो बात सही है। मैं एक बार मिल चुका था तो ये डर तो नहीं था। मैं बात कर रहा था इनसे तो मुझे लगा।

ऐसे ही एक और किरदार से आपको मिलवाते हैं। राजधानी का एक ऐसा शादीशुदा जोड़ा, जो दुनिया की नजर में इज्जतदार हैं। जिन्हें सम्मान की नजर से देखा जाता है, लेकिन ऐसे लोग भी उन महफिलों का हिस्सा हैं।

ये पति-पत्नी पेशे से डॉक्टर हैं और दिल्ली एनसीआर में ही रहते हैं। राजधानी के एक बड़े अस्पताल में मरीजों का इलाज करते हैं, लेकिन मौज-मस्ती की भूख इन्हें भी कपल स्वैपिंग की बदनाम दुनिया में खींच लाई। हमें इस बात की जानकारी मिली कि दिल्ली के एक फॉर्म हाउस में कपल स्वैपिंग की एक बड़ी महफिल सजने वाली हैं। उसी महफिल के लिए हमारी मुलाकात भी इन दोनों से हुई।

इस शादीशुदा जोड़े ने हमें बताया कि उन महफिलों में शराब का दौर चलता है। और ये भरोसा भी दिलाया कि नशे की उन पार्टियों में वाइफ स्वैपिंग के अलग कायदे कानून हैं। ये दोनों हमसे गुजारिश कर रहे थे कि हम एक बार उस फॉर्म हाउस का जायजा ले लें, जहां वाइफ स्वैपिंग की महफिल सजने वाली है।

वो जोड़ा हमारे अंडरकवर रिपोर्टर को कपल-स्वैपिंग की महफिल में आने का न्योता दे रहा था। हमें बता रहा था कि वाइफ स्वैपिंग की महफिल एक फॉर्म हाउस में सजेगी। उनके मुताबिक फॉर्म हाउस के मालिक भी अपनी पत्नी के साथ उस महफिल का हिस्सा होंगे। इस शादीशुदा जोड़े ने हमें बताया कि उन महफिलों में मौज-मस्ती का कोई दाम नहीं होता। हर शख्स को सिर्फ 1000 रुपए चुकाने होते हैं वो भी बतौर सिक्योरिटी मनी।

ऐसा नहीं है कि ये खेल केवल रईसज़ादे ही खेलते हैं। हमें एक ऐसा शादीशुदा जोड़ा भी मिला जो साधारण था। पति एक एनसीआर की एक कंपनी में मामूली कर्मचारी है और पत्नी पूरी तरह से गृहिणी। वे भी इस खेल में शामिल थे।
First published: March 9, 2016
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