गंगा को लेकर नीतीश कुमार ने जताई चिंता, कहा - हालत देखकर रोना आता है

आईएएनएस
Updated: May 18, 2017, 11:19 PM IST
गंगा को लेकर नीतीश कुमार ने जताई चिंता, कहा - हालत देखकर रोना आता है
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Updated: May 18, 2017, 11:19 PM IST
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गंगा नदी को लेकर चिंता जाहिर की है. उन्‍होंने गुरुवार को कहा कि आज गंगा का हाल देखकर रोना आता है. नीतीश ने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 'गंगा की अविरलता में बाधक गाद : समस्या और समाधान' विषय पर आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान ये बात कही. इस सम्‍मेलन में कई पर्यावरणविद, विशेषज्ञ और गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए.

नीतीश ने कहा - 'गाद से जटिल समस्याएं उत्पन्न होती हैं. इसका प्रतिकूल प्रभाव बिहार के साथ-साथ अन्य राज्यों पर भी पड़ता है. आज गंगा नदी की स्थिति देखकर रोना आता है. गंगा की धारा मेरे लिए कोई राजनैतिक मुद्दा नहीं है. ये बिहार के स्वार्थ से जुड़ा मुद्दा भी नहीं है. ये देश से जुड़ा मुद्दा है. ये प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा है. गंगा की अविरलता को कायम रखने के लिए कदम उठाना ही पड़ेगा.'

उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक पर्यावरणविद् और नदी के विशेषज्ञ गाद से उत्पन्न जटिल समस्याओं के समाधान के तरीको को ढूढ़ेंगे, ताकि नदी के लगातार बहते रहने की प्रक्रिया तय की जा सके.

मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने बचपन के दिनों में मैं गंगा नदी से पानी भरकर लाया करता था. उस समय गंगा का जल काफी साफ था. आज स्थिति बदल गई है. गंगा के बहने के रास्‍ता गाद से पट गया है. फरक्का बराज के बनने के बाद इसके उर्ध्‍व भाग में निरंतर गाद सालों साल जमा होता रहा है, जिसके कारण बाढ़ का पानी बक्सर, पटना तथा भागलपुर तक काफी दिनों तक रुका रहता है. उन्होंने कहा कि ये बाढ़ बिहार में जलजमाव और काफी तबाही मचाता है, जिससे राज्य को हर साल काफी नुकसान होता है. 2016 में बिहार में आई बाढ़ की विभीषिका इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है.

उन्होंने कहा कि बिहार जैसे गरीब राज्य को पांच सालों में कटाव-निरोधक कार्यो पर 1058 करोड़ रुपया खर्च करना पड़ा है. गंगा नदी की निर्मलता और डॉल्फिन में सीधा संबंध है. केंद्र सरकार को गाद प्रबंधन के लिए एक अच्छी नीति बनानी चाहिए.

बिहार के जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा, 'गंगा नदी में गाद की समस्या राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनना चाहिए. गाद की समस्या को आज बिहार झेल रहा है, कल उत्तर-प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्य भी झेल सकते हैं. गंगा नदी की अविरलता ही निर्मलता को बनाए रख सकती है.'

सम्मेलन को सांसद जयराम रमेश, सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वी. गोपाल गौड़ा, स्वामी अविमुक्ते श्वरानंद, प्रो. जीडी अग्रवाल, सांसद हरिवंश, जलपुरुष राजेंद्र सिंह, एसएन सुब्बाराव सहित अन्य ने भी संबोधित किया.

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First published: May 18, 2017
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