खतरे में है आमों की मल्लिका 'नूरजहां', एक-एक फल की होती है प्री-बुकिंग

भाषा
Updated: May 19, 2017, 7:42 PM IST
खतरे में है आमों की मल्लिका 'नूरजहां', एक-एक फल की होती है प्री-बुकिंग
प्रतीकात्मक फोटो
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Updated: May 19, 2017, 7:42 PM IST
नूरजहां आमों की एक खास प्रजाति है, डाल पर लगते ही जिसके एक-एक फल की प्री-बुकिंग हो जाती है. मांग ज्यादा हो तो इसका एक-एक फल 500 रुपये में बिकता है. नूरजहां अपने भारी वजन के कारण आमों की मल्लिका के रूप में जानी जाती है. दरअसल भारत में इस खास आम के केवल तीन पेड़ बचे हैं, फलों की संख्या कम होने की वजह से इसके शौकीन डाल पर लगते ही फलों की प्री-बुकिंग कर लेते हैं.

हालांकि नूरजहां अब खतरे में है. यह खास तरह का आम जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहा है. अंदेशा है कि इस बार इस दुर्लभ फल का वजन घट सकता है. आम की यह प्रजाति मूल रूप से अफगानिस्तान की मानी जाती है और भारत में इनका उत्पादन मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में ही होता है.

यह इलाका इंदौर से करीब 250 किलोमीटर दूर स्थित है. आम की इस खास प्रजाति की खेती के विशेषज्ञ इशाक मंसूरी ने बताया कि मौसम परिवर्तन की वजह से पिछले एक दशक से नूरजहां की फसल पर बुरा असर पड़ रहा है. इस साल भी ऐसा ही हुआ. इस साल जनवरी में कुछ दिनों तक बादल छाए रहने की वजह से पेड़ों पर बौर आए थे, लेकिन धीरे-धीरे वे झड़ गए. उन्होंने बताया कि बाद में फिर बौर आए लेकिन इनमें पहले जैसी बात नहीं थी. इस वजह से फसल कमजोर हो गई.

मंसूरी ने बताया कि पिछले साल नूरजहां के सबसे बड़े फल का वजन 3.2 किलो था. उन्होंने अनुमान लगाया कि इस साल सबसे बड़े फल का वजन दो किलो के आस पास ही होगा. उन्होंने बताया कि इस प्रजाति के आम के पेड़ों पर जनवरी से बौर आने शुरू हो जाते हैं और फल जून से पककर तैयार होते हैं. मंसूरी ने बताया कि पहले नूरजहां का वजन 3.5 से 3.7 किलो तक जाता था लेकिन जलवायु परिवर्तन के चलते इनका वजन लगातार गिर रहा है. उन्होंने बताया कि कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में नूरजहां के केवल तीन पेड़ बचे हैं जो दशकों पुराने हैं. इनकी उत्पादकता भी अब बेहद कम हो गई है.

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First published: May 19, 2017
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