नोटबंदी के मुद्दे पर पीएम नरेंद्र मोदी को समिति के सामने नहीं बुलाया जाएगा : पीएसी

Bhasha
Updated: January 13, 2017, 10:15 PM IST
नोटबंदी के मुद्दे पर पीएम नरेंद्र मोदी को समिति के सामने नहीं बुलाया जाएगा : पीएसी
Photo : PTI
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Updated: January 13, 2017, 10:15 PM IST
लोक लेखा समिति (पीएसी) अध्यक्ष के.वी. थॉमस के विचारों को खारिज करते हुए पीएसी ने शुक्रवार को फैसला किया कि प्रधानमंत्री को समिति के समक्ष नहीं बुलाया जाएगा. इससे पहले समिति में भाजपा सदस्यों ने कांग्रेस नेता की उस टिप्पणी पर गहरी आपत्ति व्यक्त की जिसमें कहा गया था कि नोटबंदी के मुद्दे पर उन्हें (प्रधानमंत्री) बुलाया जा सकता है.

यह मुद्दा उस समय सुर्खियों में आ गया था, जब समिति में सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों ने इस सप्ताह के शुरू में दिए गए थॉमस के उस बयान पर गहरी आपत्ति व्यक्त की थी कि नोटबंदी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुलाया जा सकता है.

वित्तीय समितियों और प्रधानमंत्री या मंत्रियों को बुलाने से जुड़े विषय से संबंधित नियमों पर स्पीकर के निर्देशों का जिक्र करते हुए समिति ने अपनी विज्ञप्ति में कहा कि मंत्रियों को समिति के समक्ष लेखा से जुड़े अनुमानों की जांच करने के सिलसिले में साक्ष्य देने या विचार-विमर्श करने के लिए नहीं बुलाया जा सकता. समिति ने कहा कि हालांकि, अध्यक्ष जब जरूरी समझे और चर्चा पूरी हो जाने पर मंत्री के साथ अनौपचारिक संवाद कर सकती है.

पीएम मोदी को भी बुला सकती है पीएसी



समिति में भाजपा सदस्य निशिकांत दूबे, भूपेंद्र यादव और किरीट सोमैया ने इस बारे में थॉमस के बयान का मुद्दा उठाया और कहा कि समिति के पास प्रधानमंत्री को बुलाने का अधिकार नहीं है. दूबे ने इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था और कहा था कि थॉमस की यह टिप्पणी की कि नोटबंदी के मुद्दे पर मोदी को समिति के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा जा सकता है, यह गलत, अनैतिक और स्थापित संसदीय प्रक्रियाओं के खिलाफ है.

समझा जाता है कि बैठक में थॉमस ने स्पष्ट किया कि उनके कहने का आशय यह था कि अगर सर्वसम्मत निर्णय हो तो प्रधानमंत्री को बुलाया जा सकता है.

बयान में कहा गया है कि वर्तमान नियमों के अनुसार लेखा और अनुमानों पर विचार-विमर्श के लिए साक्ष्य देने के संबंध में अधिकारियों को बुलाया जा सकता है लेकिन प्रधानमंत्री या मंत्री को नहीं.

पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के समय भी पीएसी के तत्कालीन प्रमुख मुरली मनोहर जोशी द्वारा टूजी घोटाला मामले में तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बुलाने के निर्णय से विवाद खड़ा हो गया था और कांग्रेस ने इसका कड़ा विरोध किया था और जोशी का निर्णय खारिज हुआ था.
First published: January 13, 2017
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