पीएम से मिले रामनाथ कोविंद, कई पार्टियों ने एकतरफा फैसले का लगाया आरोप

भाषा
Updated: June 20, 2017, 7:06 AM IST
पीएम से मिले रामनाथ कोविंद, कई पार्टियों ने एकतरफा फैसले का लगाया आरोप
File photo/PTI
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Updated: June 20, 2017, 7:06 AM IST
भारतीय जनता पार्टी ने दलित कार्ड खेलते हुए सोमवार को बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की तरफ से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया. इसी के साथ केंद्र ने सभी राजनीतिक पार्टियों को हतप्रभ कर दिया.

इस घोषणा से हैरान विपक्ष ने सत्ताधारी पार्टी पर एकतरफा फैसला लेने का आरोप लगाया है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी की संसदीय दल की लगभग दो घंटे चली बैठक के बाद कहा, 'हमने फैसला किया है कि 71 साल के रामनाथ कोविंद एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होंगे.'

मुख्य विपक्षी दलों ने हालांकि कोविंद की आलोचना तो नहीं की है, लेकिन वो उनका समर्थन करेंगे या नहीं, इसे लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं.

कोविंद के प्रति समर्थन जताने वाले तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और बीजू जनता दल (बीजद) को छोड़कर अन्य सभी गैर बीजेपी पार्टियों ने सत्ताधारी पार्टी पर एकतरफा फैसला लेने का आरोप लगाया.

ये दल 17 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव पर अपनी रणनीति तय करने के लिए गुरुवार को यहां बैठक करेंगे.

केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने ज़ोर दिया कि सभी पार्टियों से परामर्श लिया गया था. वहीं कोविंद ने अपनी तरफ से कहा कि वो सभी राजनीतिक पार्टियों और इलेक्टोरल कॉलेज के सभी सदस्यों से समर्थन की अपील करेंगे.

शाह ने संवाददाताओं को बताया, 'बीजेपी ने सभी राजनीतिक दलों और समाज के कई वर्गो के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की. चर्चा के बाद उम्मीदवारों की एक लंबी सूची तैयार की गई जिस पर पार्टी की संसदीय दल की बैठक में चर्चा हुई.'

कोविंद 23 जून को अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद बेहतरीन राष्ट्रपति साबित होंगे और गरीबों एवं वंचित समुदायों के लिए काम करना जारी रखेंगे.

मोदी ने ट्वीट में कहा, 'कानूनी क्षेत्र में उत्कृष्ट अनुभव के साथ संविधान को लेकर कोविंद के ज्ञान और समझ से देश को लाभ होगा.'



कोविंद यदि यह चुनाव जीतते हैं तो आर के नारायणन के बाद दूसरे दलित राष्ट्रपति होंगे.

बीजेपी के दलित मोर्चे के पूर्व प्रमुख और दो बार राज्यसभा के सदस्य रह चुके कोविंद मई 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद बिहार के राज्यपाल बनाए गए थे. वो उत्तर प्रदेश के कानपुर के निवासी हैं.

लेकिन, बीजेपी की सहयोगी शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रपति के पद के लिए जातिगत समीकरण पर अपनी असहमति जताई है.

बीजेपी के एक अन्य सहयोगी घटक लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के राम विलास पासवान ने कहा कि जो कोविंद का विरोध करेंगे, वो दलित विरोधी माने जाएंगे. विपक्षी पार्टियों ने बेहद सतर्कता पूर्वक प्रतिक्रिया दी है.

बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने कहा है कि वो कोविंद का तब तब विरोध नहीं कर सकतीं, जब तक विपक्ष किसी बड़े दलित उम्मीदवार का नाम नहीं देगा.

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कोविंद के गुण-दोषों पर चर्चा करने से इनकार किया और ये स्पष्ट नहीं किया कि विपक्ष अपना उम्मीदवार खड़ा करेगा या नहीं.

उन्होंने कहा, 'हाल में जब 18 विपक्षी दलों की बैठक हुई थी, तो सभी विपक्षी पार्टियों ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पर सर्वसम्मति बनाने का संयुक्त फैसला लिया था.'

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, 'कोविंदजी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दलित मोर्चे के अध्यक्ष थे. तो कहीं न कहीं, ये एक राजनीतिक लड़ाई है. हम न तो किसी को कोई चरित्र प्रमाण पत्र दे रहे हैं और न ही टिप्पणी कर रहे हैं.'

उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं ने राष्ट्रपति के उम्मीदवार को लेकर विपक्ष की सहमति लेने का वादा किया था, जो नहीं हुआ.

कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के नेता नीतीश कुमार ने उनसे मुलाकात की. इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया.

नीतीश ने इस बारे में कुछ नहीं कहा कि वो कोविंद का समर्थन करेंगे या नहीं. उन्होंने कहा कि अभी कुछ कहना मुश्किल है. हमारी लालू प्रसाद और सोनिया गांधी से बात हुई थी. हम इस पर चर्चा कर फैसला लेंगे.

पेशे से वकील कोविंद 12 वर्षो तक राज्यसभा सदस्य और कई संसदीय समितियों के सदस्य रह चुके हैं. वो उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय, दोनों ही जगह प्रैक्टिस कर चुके हैं.

उन्होंने बीजेपी के दलित मोर्चे की 1999 से लेकर तीन साल तक अध्यक्षता की थी.
First published: June 19, 2017
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