और राष्ट्रभक्त NSG कमांडो ने पकड़ ली जुर्म की राह!

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: June 21, 2017, 12:29 PM IST
और राष्ट्रभक्त NSG कमांडो ने पकड़ ली जुर्म की राह!
अरुण बेहद फुर्तिला, तेज दिमाग, सटीक निशानेबाज और सबसे बड़ी बात ये कि हर वक्त जान हथेली पर लेकर तैयार रहता था.
नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: June 21, 2017, 12:29 PM IST
तेज-तर्रार और फुर्तीले अरुण ने कई वर्ष सेना की यूनिट में सेवा देने के बाद नेशनल सिक्योरिटी गॉर्ड (एनएसजी) कमांडो की ट्रेनिंग पूरी की थी. लेकिन जान हथेली पर लेकर देश सेवा के लिए समर्पित कमांडो अरुण की जिंदगी अचानक करवट लेती है और अब उसकी हथेलियां मासूमों की जिंदगी से खेलने लग जाती हैं. कई वर्षों तक फौजी माहौल में रहे अरुण की पहचान अब बदल चुकी थी. एक अचूक निशानेबाज कमांडो अरुण की जिंदगी घर से आए एक फोन कॉल से बदरंग हो जाती है और जुर्म के खिलाफ लड़ने वाला वह कमांडो जुर्म की दुनिया का डॉन बन जाता है...

दूसरों से अलग था कमांडो अरुण
लोधा ब्लॉक, अलीगढ़ का रहने वाला अरुण 1992 से फौज में था. अरुण की खासियत ये थी कि वह दूसरे फौजियों से थोड़ा जुदा था. बेहद फुर्तिला, तेज दिमाग, सटीक निशानेबाज और सबसे बड़ी बात ये कि देश के लिए हर वक्त वह अपनी जान हथेली पर लेकर चलता था.

अरुण की यही खासियत उसे सेना की यूनिट से नेशनल सिक्योरिटी गॉर्ड (एनएसजी) सेंटर ले गई. अरुण को एनएसजी कमांडो ट्रेनिंग के लिए चुन लिया गया. बिना किसी परेशानी के पूरे दमखम के साथ अरुण ने कमांडो ट्रेनिंग भी पूरी कर ली.

लेकिन वर्ष 2001 में उसके घर से आया एक फोन कॉल ने अरुण की पूरी जिंदगी बदल देती है और एनएसजी कमांडो अरुण जरायम की दुनिया का डॉन बन जाता है. फोन आने के दूसरे दिन अरुण छुट्टी लेकर अपने गांव लोहर्रा, अलीगढ़ आ गया.

गांव की पुरानी रंजिश को प्रतिष्ठा बना चुके पिता की लड़ाई को लड़ने गांव पहुंचे कमांडो अरुण के हाथों एक बड़ा अपराध हो जाता है। जानकार कहते हैं कि अरुण के हाथों उनके अपने जीजा का मर्डर हो गया था और मर्डर के बाद अरुण फरार हो गया.

कहते हैं कि सेना की ओर से भी कमांडो अरुप पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन सूत्र बताते हैं कि इससे पहले की सेना द्वारा कोई बड़ी कार्रवाई होती अरुण ने रिटायर्मेंट ले लिया था. अरुण खुद भी दावा करता है कि वह सेना का भगोड़ा नहीं है.

कमांडो अरुण ने जुर्म की दुनिया में रखा कदम
रंजिश में हुए मर्डर के बाद अरुण ने अपराध की दुनिया को अपनी दुनिया बना लिया. वर्ष 2002 में अरुण ने पहली वारदात को अंजाम दिया. जब बुलंदशहर में एक बैंक का कैश ले जा रही वैन को अरुण ने सिविल लाइंस इलाके में हथियारों के बल पर लूट लिया. इसके बाद तो मानों अरुण ने इसे अपराध को अपना पेशा बना लिया. उसकी दूसरी, तीसरी और फिर चौथी वारदात भी बैंक कैश वैन लूट थी.

जब अलवर में पकड़ा गया अरुण फौजी
कहते हैं कि अरुण फौज में रहने के दौरान राजस्थान में भी रहा था. जिसके चलते उसे राजस्थान की अच्छी खासी जानकारी थी. यही वजह थी कि अरुण ने लूट की कई वारदातों में से ज्यादातर वारदात को भरतपुर, अलवर, जयपुर, धौलपुर आदि शहरों में अंजाम दिया.

अलवर में दिनदहाड़े अरुण फौजी ने एक बैंक में डकैती डाली. लेकिन घटना के कुछ दिन बाद ही अरुण पकड़ा गया. जानकार बताते हैं कि इसी दौरान कई और अपराधियों से अरुण की जेल में मुलाकात हो गई और जेल से छूटने के बाद अरुण ने जेल के साथियों साथ मिलकर अपना एक गैंग बना लिया.

लूट-अपहरण का बादशाह बना अरुण
अरुण डॉन को नजदीक से जानने वाले कुछ जानकार बताते हैं कि अरुण ने कभी भी आम इंसान को निशाना नहीं बनाया. जब भी पैसा लूटा तो बैंक का. इतना ही नहीं अपरहण भी बड़े और रसूखदार लोगों के ही किए.

बताते हैं कि अरुण ने अकेले अलवर में ही चार बड़े बैंक डकैती को अंजाम दिया. मैनपुरी में कई बैंक डकैती डाली. इसके अलावा आगरा के शास्त्रीपुरम और दिल्ली एनसीआर, मध्य प्रदेश में भी अरुण ने बैंक डकैतियों को अंजाम दिया.

दिल्ली-एनसीआर में भी अरुण ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के एक इंजीनियर का अपरहण किया था. अलीगढ़ के अकबराबाद से एक पूर्व विधायक के भतीजे की कार समेत अपहरण कर अरुण ने सनसनी फैला दी.

जब पुलिस कस्टडी से भागा अरुण
एक इंजीनियर के अपरहण में पुलिस ने अरुण फौजी को गिरफ्तार कर लिया. मामले में गाजियाबाद के डासना जेल से पुलिस उसे मथुरा की कोर्ट में पेशी के लिए लेकर आई थी. लेकिन इसी बीच पहले से ही तैयार अरुण गैंग के सदस्यों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया. उसे पुलिस की कस्टडी से छुड़ा कर फरार हो गए.

कहते हैं कि अभी तक के आपराधिक जीवन में अरुण फौजी दो बार पुलिस की कस्टडी से भाग चुका है जबकि दो बार जेल से निकल भागने की उसकी कोशिश नाकामयाब रही थी.

चलती ट्रेन में किया बदमाश पर हमला

आगरा की जेल में बंद एक बदमाश मोहित भारद्वाज को पुलिस दिल्ली में हुई पेशी के बाद श्रीधाम एक्सप्रेस से वापस आगरा ला रही थी. अरुण फौजी की मोहित से कुछ दुश्मनी थी. जैसे ही इस बात की भनक अरुण को लगी. मोहित के लिए फील्डिंग सजा दी गई.

चलती ट्रेन में बदमाश मोहित को मारना और फिर फरार होना आसान नहीं था. लेकिन एनएसजी कमांडो रहे अरुण के लिए यह बाएं हाथ का खेल था। टारगेट को पूरा करना और वापस लौटना, इस रणनीति को अरुण बखूवी जानता था.

प्लान तैयार हुए और प्लान के मुताबिक अरुण और उसके गैंग के सदस्य श्रीधाम एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हो गए. आगरा से कुछ ही दूर पहले फरह के पास मोहित को मार दिया गया. काम को बखूबी अंजाम देने के बाद अरुण और उसके गैंग के सदस्य ट्रैन की चेन खींचकर मौका-ए-वारदात से फरार हो गए.

हथियारों की बारीक जानकारी रखता है अरुण
एक कमांडो को कई तरह के हथियारों की जानकारी दी जाती है. यही वजह है कि अरुण फौजी हथियारों की बहुत बारीक जानकारी रखता है. जानकार बताते हैं कि अरुण ने कई वारदात में अलग-अलग तरीके के हथियारों का इस्तेमाल किया था. सर्विस के दौरान अरुण ने एम्यूनेशन डिपो में भी काम किया है तो इसलिए उसे हथियारों की अच्छी खासी जानकारी है.

भरतपुर बैंक डकैती में मिली उम्रकैद
8 जून 2012 को अरुण फौजी गैंग ने भरतपुर के स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर में दिनदहाड़े डाका डाला. दोपहर के वक्त गैंग के 10 लोग चेहरे पर नकाब लगाकर बैंक में घुसने से पहले गॉर्ड के हथियार लूट लिए.

फौजी गैंग बैंक से करीब साढ़े चार लाख रुपए और कर्मचारियों के मोबाइल भी लूट ले गए. लेकिन पुलिस ने जल्द ही घटना का खुलासा करते हुए गैंग के एक सदस्य को हिरासत में लिया और उसके बाद उसी की निशानदेही पर सभी को जल्दी ही पकड़ लिया गया.

बैंक डकैती और दूसरे मामलों में भरतपुर की स्थानीय कोर्ट ने अरुण फौजी को उम्र कैद की सजा सुनाई है और इस वक्त भरतपुर की जेल में अरुण के साथ-साथ गैंग के दूसरे आठ से दस सदस्य भी बंद हैं.

बसपा सुप्रीमो को दी थी चेतावनी
गत उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में अरुण फौजी अपनी राजनीतिक पारी खेलने ही वाला था और बसपा प्नमुख मायावती से वह खैर विधानसभा से टिकट पाने में कामयाब हो गया था. लेकिन चुनाव से पहले ही अरुण फौजी का टिकट काट गया. इससे पहले अरुण प्रधानी का चुनाव जीत चुका था.

अरुण फौजी बुरी तरह से बौखला गया था. उसने बसपा प्रमुख मायावती को धमकी भी दी. अरुण ने मायावती पर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर मायावती ने टिकट के एवज में लिए उसके 50 लाख रुपए नहीं लौटाए तो अंजाम बुरा होगा.
First published: June 20, 2017
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