एक सलाम कैंसर से जीतीं आरजे पल्लवी के नाम, ICU में लिख दी किताब

Bikram Singh | News18Hindi
Updated: March 30, 2017, 5:06 PM IST
Bikram Singh | News18Hindi
Updated: March 30, 2017, 5:06 PM IST
यूं तो हर किसी की ज़िंदगी में समस्याएं आती हैं. कुछ लोग समस्याओं के आगे सरेंडर बोल देते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो समस्याओं को चुनौती देते हुए आगे बढ़ जाते हैं और पूरी दुनिया के लिए मिसाल बनते हैं. हम आज आपको एक ऐसी ही शख़्सियत से मिलवाने जा रहे हैं, जिनकी हिम्मत के आगे किसी की नहीं चली. तीन बार कैंसर से जूझने के बावजूद भी वो अपनी ज़िंदगी जी रही हैं और लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं.

हम बात कर रहे हैं दिल्ली की मशहूर आरजे सी. पल्लवी राव की. इनके बारे में जितना भी लिखा जाए, कम है. वो एक बेहतरीन आरजे ही नहीं, भरतनाट्यम और कुचीपुड़ी डांसर भी हैं, एक बेहतरीन पेंटर हैं, भूतपूर्व एनसीसी कैडेट रह चुकी हैं. सोचिए, आईसीयू के क्रिटिकल माहौल से भला कैसे कोई बुक भी लॉन्च कर सकता है? मगर पल्लवी ने ऐसा किया.

जैसे किसी सैनिक के लिए जंग में हथियार ज़रुरी होता है, ठीक उसी तरह से किसी आरजे के लिए उसकी आवाज़ ही पहचान होती है. लेकिन कैंसर की वजह से पल्लवी की आवाज़ दोबारा दिल्ली के लोगों को नहीं सुनाई देगी, डॉक्टर के मुंह से ये सुनना उनके लिए एक भयानक दर्द था. तब उन्होंने डॉक्टर के दावे को गलत साबित करने के लिए खुद से वादा किया कि मैं वापस लौटूंगी. और वो लौटीं भी.

बचपन से ही रेडियो से इश्क़ हो गया था

पल्लवी एक पत्रकार परिवार से आती हैं. उनके पिता आकाशवाणी में खेल पत्रकार थे. उनका रेडियो पर एक प्रोग्राम भी आता था और पल्लवी की मां फिल्म समीक्षक थीं. पल्लवी अपने पापा के काम से काफी प्रभावित थीं. बचपन से ही रेडियो उनके लिए एक सपना बन गया था. पल्लवी का ये सपना जुनून में तब्दिल हो गया. एक दिन ऐसा मौका आया जब पल्लवी को आकाशवाणी के साथ काम करने का मौका मिला. इस मौके को उन्होंने अपना करियर बना लिया. अपनी आवाज़ की बदौलत उन्होंने देश भर के कई कार्यक्रमों में अपनी आवाज़ दी.

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जब कैंसर के बारे में पता चला

पल्लवी की ज़िंदगी में सबकुछ ठीक चल रहा था मगर एक दिन डॉक्टर ने बताया कि उन्हें कैंसर हो गया है, तो उन्हें काफी तकलीफ हुई. जब यह बात उन्होंने अपने पति को बताई तो उन्होंने बहुत ही पॉजीटिवली जवाब देते हुए कहा, 'हो जाएगा'. इतना सुनते ही पल्लवी की आधी बीमारी ख़त्म हो गई.

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अमिताभ भी थे इस बीमारी से ग्रसित

पल्लवी को 'मायस्थेनिया ग्रेविस' बीमारी थी. भारत में यह दूसरा मामला था. इससे पहले फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन को ये बीमारी थी. इस तरह के बीमारी में चेहरे के मांसपेशियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है. जिसके कारण इंसान सही से बोल नहीं पाता है.

ICU में पनप रहा था प्यार

ICU Love Stories, पल्लवी की पहली किताब है, जो आईसीयू में ही लिखी गई है. इस किताब की शुरुआत ICU से हुई, जहां गंभीर माहौल में भी उन्होंने लोगों के बीच प्यार ढूंढ़ लिया. इस काम के लिए उनके पति ने उनका सपोर्ट किया. इस किताब के किरदार वो सभी लोग हैं, जो यहां एडमिट थे, जो यहां किसी से मिलने आते थे, जो यहां काम करते थे. इनमें से किसी को एहसास नहीं था कि वे एक खूबसूरत कहानी के किरदार बनते जा रहे हैं.

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मोबाइल से लिखी गई थी किताब

दुनिया की पहली किताब जो मोबाइल से लिखी गई है. पल्लवी ने आईसीयू में रहते हुए इसे लिखा.

 

ICU से बुक हुई लॉन्च

पल्लवी और उनके पति चाहते थे कि यह किताब 17 अक्टूबर को पल्लवी के जन्मदिन पर लॉन्च हो, मगर तबीयत ख़राब होने के कारण यह हो नहीं सका. ऐसे में उन्होंने इस आईसीयू से लॉन्च की.



सच हो गया मज़ाक

पल्लवी अपनी के हस्बैंड राहुल ने बताया कि 17 अक्टूबर को उनके जन्मदिन पर वो दोनों इस बुक को लॉन्च करने की सोच रहे थे. तभी राहुल ने मज़ाक में कहा, ICU में बुक लॉन्च कर देते हैं, जिस पर पल्लवी भी हंसने लगी. तब उन्हें नहीं पता था कि ये बात इस तरह से सच हो जाएगी.

कौन कहता है कि मोहब्बत की मिसाल सिर्फ ताज महल ही है, मुझे तो आम ज़िन्दगियों में शाहजहां और मुमताज़ के किस्सों से ज़्यादा मोहब्बत नज़र आती है. इंसान आम ज़िंदगी में एक कैंसर नहीं झेल पाता है, वहीं पल्लवी ने तीन बार इसे सहन किया. वो हिम्मत नहीं हारीं, अपनी समस्याओं से लड़ीं और करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन गईं.
First published: March 30, 2017
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