पश्चिम बंगाल सरकार ने स्कूलों में बंगाली भाषा को किया अनिवार्य

News18Hindi
Updated: May 18, 2017, 2:04 PM IST
पश्चिम बंगाल सरकार ने स्कूलों में बंगाली भाषा को किया अनिवार्य
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Updated: May 18, 2017, 2:04 PM IST
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों में बंगाली भाषा को अनिवार्य कर दिया है. न सिर्फ सरकारी बल्कि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, निजी स्कूलों को भी तीन भाषा की पॉलिसी को मानना होगा.

बता दें कि अभी तक अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में बच्चों के पास बंगाली भाषा चुनने और छोड़ने का विकल्प होता था. लेकिन, नए नियमों के अनुसार सरकार ने ये अनिवार्य कर दिया है कि स्टूडेंट्स को मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा और अंतरराष्ट्रीय भाषा तीनों भाषाएं सीखना अनिवार्य है.

बंगाल के शिक्षा मंत्री प्रथा चैटर्जी ने आज सभी स्कूलों के लिए इस नियम की घोषणा की. बंगाली भाषा को पहली से दसवीं क्लास तक अनिवार्य किया गया है. पहले स्टूडेंट्स को तीन भाषाओं के तौर पर पहली क्लास में इंग्लिश और मातृभाषा पढ़नी होती थी और सातवीं क्लास से तीसरी भाषा पढ़नी होती थी. ये तीसरी भाषा भारतीय या विदेशी हो सकती थी. लेकिन, अब पहली क्लास से ही तीन भाषाएं पढ़नी होंगी.

ममता ने किया ट्वीट

प्रथा चैटर्जी ने कहा ​कि आईसीएसई और सीबीएसई से मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों को पहली क्लास से ही बंगाली भाषा ​वैकल्पिक ​विषय के तौर पर रखनी होगी और स्टूडेंट्स को इसे दूसरी या तीसरी भाषा के तौर पर चुनना होगा.

इस संबंध में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया कि बंगाल सभी भाषााओं का सम्मान करता है. सभी मातृभाषाओं को एकसामन सम्मान मिलना चाहिए. स्टूडेंट्स कोई भी तीन भाषा चुन सकते हैं लेकिन उनमें से एक बंगाली होनी जरूरी है. बाकी दो स्टूडेंट्स अपनी इच्छानुसार सुन सकते हैं.

अन्य राज्य जैसे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और महाराष्ट्र पहले से ही अंग्रेजी और हिंदी के बजाए क्षेत्रीय भाषााओं पर ज्यादा जोर देते रहे हैं. वहां क्षेत्रीय भाषा पढ़ना अनिवार्य किया गया है.
First published: May 18, 2017
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