कुलभूषण का कवच 'वियना कन्‍वेंशन' है क्या?

ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: May 19, 2017, 9:32 AM IST
कुलभूषण का कवच 'वियना कन्‍वेंशन' है क्या?
वियना
ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: May 19, 2017, 9:32 AM IST
इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने आखिरी फैसला आने तक कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगा दी है. कहा गया है कि जाधव को सजा सुनाकर पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने अंतरराष्ट्रीय कानून और वियना कन्वेंशन का उल्लंघन किया है.

जानिए, कुलभूषण जाधव का कवच वियना कन्‍वेंशन है क्‍या?

राजनीति विज्ञान के विशेषज्ञ प्रो. दिनेश अरोड़ा कहते हैं कि अलग-अलग देशों के बीच उनके राजनयिकों और नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए वियना कन्‍वेंशन अहम हथियार है. यह स्वतंत्र देशों के बीच राजनयिक संबंधों के लिए एक रूपरेखा है.

वियना संधि राजनयिकों को ऐसे अधिकार देता है जिससे कि वह मेजबान देश में डर के बिना अपना काम कर सके. इसमें देशों के बीच होने वाले विवादों के निपटारे के नियम हैं. इसके तहत युद्ध के समय दूसरे देशों के सैनिकों के साथ बर्बरता नहीं की जा सकती.

संधि के मुताबिक राजनयिकों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. न ही उन्हें किसी तरह की हिरासत में रखा जा सकता. न तो उन्‍हें जेल भेजा जा सकता है और न ही उनकी व्‍यक्‍तिगत स्‍वतंत्रता पर कोई रोक लगाई जाएगी.

अरोड़ा के मुताबिक वियना संधि के तहत अगर किसी व्यक्ति को पकड़ा जाता है, तो दोनों देशों में उसे राजनियक नियमों के तहत मदद मिलेगी, इसका उल्लेख आर्टिकल 36 में भी हुआ है.

दूसरे देश में किसी नागरिक की गिरफ्तारी के बाद उसे अपनी सफाई और कानूनी अधिकार का मौका मिलना चाहिए. अनुच्छेद 36 के पहले पैराग्राफ में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि इस प्रकार के मामले में इंटरनेशनल कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. जो देश संयुक्त राष्ट्र के सदस्य हैं वे वियना संधि के नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

हालांकि कोई भी संप्रभु देश अपने राष्‍ट्रीय हित को देखते हुए इसे मानने या न मानने का फैसला लेता है. किसी अंतरराष्‍ट्रीय संधि की बजाए हर देश पहले अपने राष्‍ट्रीय हितों की चिंता करता है.

वियना कन्‍वेंशन की शुरुआत अप्रैल 1961 को आस्‍ट्रिया की राजधानी वियना में हुई थी. जबकि अप्रैल 1964 से यह प्रभावी हुआ.
First published: May 18, 2017
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