सुभाष चंद्र बोस (1895 - 1945)

Updated: March 5, 2015, 5:50 PM IST
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य (बाएं से दाएं) महात्मा गांधी (मोहनदास कर्मचंद गांधी, 1869 - 1948), सुभाष चंद्र बोस (1897 - 1945) और वल्लभ भाई पटेल (1875-1950) कांग्रेस के 51वें अधिवेशन में (Photo by Keystone/Getty Images)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य (बाएं से दाएं) महात्मा गांधी (मोहनदास कर्मचंद गांधी, 1869 - 1948), सुभाष चंद्र बोस (1897 - 1945) और वल्लभ भाई पटेल (1875-1950) कांग्रेस के 51वें अधिवेशन में (Photo by Keystone/Getty Images)
जनवरी 13, 1938: लेबर पॉलिटिशियन और डेली हेराल्ड के एडिटर, जॉर्ज लैंसबरी (1859 - 1940) सुभाष चंद्र बोस (1895 - 1945) का अभिवादन करते हुए। (Photo by H F Davis/Topical Press Agency/Getty Images)
जनवरी 13, 1938: लेबर पॉलिटिशियन और डेली हेराल्ड के एडिटर, जॉर्ज लैंसबरी (1859 - 1940) सुभाष चंद्र बोस (1895 - 1945) का अभिवादन करते हुए। (Photo by H F Davis/Topical Press Agency/Getty Images)
लेकिन देश के भीतर संवतंत्रता संग्राम से नाखुश सुभाष चंद्र बोस ने बाहरी मदद की राह खोजी।
लेकिन देश के भीतर संवतंत्रता संग्राम से नाखुश सुभाष चंद्र बोस ने बाहरी मदद की राह खोजी।
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" /> "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा": देश के आजाद होने के बाद से ही नेताजी के जीवित होने को लेकर कई तरह की अफवाहें उड़ती रही हैं। सुभाष चंद्र बोस आदर्शवाद और वीरता के उदाहरण हैं। उनके जन्म के 115 साल बाद आइए उन्हें याद करें उनकी असली तस्वीरों के साथ

सुभाष चंद्र बोस (1895 - 1945)
"तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा": देश के आजाद होने के बाद से ही नेताजी के जीवित होने को लेकर कई तरह की अफवाहें उड़ती रही हैं। सुभाष चंद्र बोस आदर्शवाद और वीरता के उदाहरण हैं। उनके जन्म के 115 साल बाद आइए उन्हें याद करें उनकी असली तस्वीरों के साथ देखिए नेताजी रिसर्च ब्यूरो, कोलकाता में डिसप्ले के लिए रखा नेताजी को पोस्टर (रॉयटर्स)

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इंडियन नेशनल आर्मी के सुभाष चंद्र बोस का हैंडआउट पोट्रेट  (रॉयटर्स)
इंडियन नेशनल आर्मी के सुभाष चंद्र बोस का हैंडआउट पोट्रेट (रॉयटर्स)
[caption id="attachment_310342"]1941 में नेताजी को जब कलकत्ता के उनके घर में नजरबंद किया गया, जब अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंककर उन्होंने इसी कार का इस्तेमाल किया था। तस्वीर- सितंबर 30, 2003. रॉयटर्स
</p><p> 1941 में नेताजी को जब कलकत्ता के उनके घर में नजरबंद किया गया, जब अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंककर उन्होंने इसी कार का इस्तेमाल किया था। तस्वीर- सितंबर 30, 2003. रॉयटर्स

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जनवरी 29, 1946: तत्कालीन बॉम्बे में हुए दंगे के बाद घायलों का उपचार करते लोग। दंगा उस वक्त हुआ जब पुलिस ने एक धार्मिक जलसे का रास्ता बदलने की कोशिश की। यह जुलूस नेताजी के जन्मदिन पर उन्हें याद करने से भी संबंधित था जो कि एक साल पहले ही विमान हादसे का शिकार हो चुके थे। (Photo by Central Press/Getty Images)
जनवरी 29, 1946: तत्कालीन बॉम्बे में हुए दंगे के बाद घायलों का उपचार करते लोग। दंगा उस वक्त हुआ जब पुलिस ने एक धार्मिक जलसे का रास्ता बदलने की कोशिश की। यह जुलूस नेताजी के जन्मदिन पर उन्हें याद करने से भी संबंधित था जो कि एक साल पहले ही विमान हादसे का शिकार हो चुके थे। (Photo by Central Press/Getty Images)
जनवरी 29, 1946: तत्कालीन बॉम्बे में एक अनाधिकृत धार्मिक जलसे को रोकती हुई पुलिस। पुलिस का यह कदम बाद में दंगे का भी कारण बना। (Photo by Central Press/Getty Images)
जनवरी 29, 1946: तत्कालीन बॉम्बे में एक अनाधिकृत धार्मिक जलसे को रोकती हुई पुलिस। पुलिस का यह कदम बाद में दंगे का भी कारण बना। (Photo by Central Press/Getty Images)
साल 1945: सुभाष चंद्र बोस, इंडियन नेशनलिस्ट लीडर और जापान द्वारा प्रेरित इंडियन नेशनल आर्मी के कमांडर इन चीफ बर्लिन में अपने दौरे के बाद। जहां उनकी मुलाकात हिटलर से भी हुई। उन्हें भारत का देशद्रोही भी कहा गया। (Photo by Keystone/Getty Images)
साल 1945: सुभाष चंद्र बोस, इंडियन नेशनलिस्ट लीडर और जापान द्वारा प्रेरित इंडियन नेशनल आर्मी के कमांडर इन चीफ बर्लिन में अपने दौरे के बाद। जहां उनकी मुलाकात हिटलर से भी हुई। उन्हें भारत का देशद्रोही भी कहा गया। (Photo by Keystone/Getty Images)
दुनिया में जिस वक्त द्वितीय विश्व युद्ध चरम पर था ‘नेताजी’ देश की आजादी के लिए जी जान से जुटे हुए थे।
दुनिया में जिस वक्त द्वितीय विश्व युद्ध चरम पर था ‘नेताजी’ देश की आजादी के लिए जी जान से जुटे हुए थे।
इसी कोशिश में जनवरी 1941 में वह घर की नजरबंदी से बचते हुए देश से बाहर गए।
इसी कोशिश में जनवरी 1941 में वह घर की नजरबंदी से बचते हुए देश से बाहर गए।
बोस को दो बार 1921 और 1924 में जेल की सजा हुई। महात्मा गांधी के कैंडिडेट पटाभी सीतारमैया को हराकर वे 1938 में कांग्रेस के अध्यक्ष बनें। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की।
बोस को दो बार 1921 और 1924 में जेल की सजा हुई। महात्मा गांधी के कैंडिडेट पटाभी सीतारमैया को हराकर वे 1938 में कांग्रेस के अध्यक्ष बनें। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की।
साल 1940: युद्ध के दौरान सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर (Photo by Hulton Archive/Getty Images)
साल 1940: युद्ध के दौरान सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर (Photo by Hulton Archive/Getty Images)
बोस ने शुरुआत से ही पूर्ण स्वतंत्रता की मांग का समर्थन किया था जबकि ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी इसे डॉमिनियन स्टेट्स के द्वारा टुकड़ों में लेने की पक्षधर थी। अंततः लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की मांग को अपने उद्देश्य के रूप में स्वीकार किया।
बोस ने शुरुआत से ही पूर्ण स्वतंत्रता की मांग का समर्थन किया था जबकि ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी इसे डॉमिनियन स्टेट्स के द्वारा टुकड़ों में लेने की पक्षधर थी। अंततः लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की मांग को अपने उद्देश्य के रूप में स्वीकार किया।
साल 1940: भारत के राष्ट्रीय नेता, सुभाष चंद्र बोस (1897 - 1945). (Photo by Keystone/Getty Images)
साल 1940: भारत के राष्ट्रीय नेता, सुभाष चंद्र बोस (1897 - 1945). (Photo by Keystone/Getty Images)

First published: January 23, 2012
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