लंदन में लूटेंगे सोना


Updated: March 5, 2015, 7:03 PM IST
लंदन में लूटेंगे सोना
लंदन ओलंपिक की शुरुआत में 24 दिन बचे हैं। देश को उम्मीद है कि इस बार कई गोल्ड भारत की झोली में गिरेंगे। लंदन के लिए रवाना होने से पहले भारतीय शूटरों और अन्य एथलीटों ने भरोसा जताया कि ओलंपिक में निशाना सिर्फ और सिर्फ गोल्ड पर ही होगा।

Updated: March 5, 2015, 7:03 PM IST
लंदन ओलंपिक की शुरुआत में 24 दिन बचे हैं। देश को उम्मीद है कि इस बार कई गोल्ड भारत की झोली में गिरेंगे। लंदन के लिए रवाना होने से पहले भारतीय शूटरों और अन्य एथलीटों ने भरोसा जताया कि ओलंपिक में निशाना सिर्फ और सिर्फ गोल्ड पर ही होगा।
लंदन ओलंपिक की शुरुआत में 24 दिन बचे हैं। देश को उम्मीद है कि इस बार कई गोल्ड भारत की झोली में गिरेंगे। लंदन के लिए रवाना होने से पहले भारतीय शूटरों और अन्य एथलीटों ने भरोसा जताया कि ओलंपिक में निशाना सिर्फ और सिर्फ गोल्ड पर ही होगा।
निशानेबाज मानवजीत सिंह संधूः 2004 मेरा पहला ओलंपिक दौरा था। मैं तब परिस्थितियों को नहीं समझने लायक नहीं था। अब हमारे यहां खेल काफी प्रोफेशनल हो चुका है। हमारे साथी बेहद कड़ी मेहनत कर रहे हैं। 2004 में मेडल मिलने के बाद पूरे देश का ओलंपिक की तरफ रुझान और सहयोग बढ़ा है। मुझे पता है कि पूरा देश हमारी ओर देख रहा है। हमें ऐसा लग रहा है जैसे काफी लंबा समय है। हम सबकुछ एकदिन में पैक कर लेते हैं। ऐसे में लग रहा है कि चलो अभी टाइम है। हमारे पास अभी काफी समय है और बहुत कुछ करना है।
निशानेबाज मानवजीत सिंह संधूः 2004 मेरा पहला ओलंपिक दौरा था। मैं तब परिस्थितियों को नहीं समझने लायक नहीं था। अब हमारे यहां खेल काफी प्रोफेशनल हो चुका है। हमारे साथी बेहद कड़ी मेहनत कर रहे हैं। 2004 में मेडल मिलने के बाद पूरे देश का ओलंपिक की तरफ रुझान और सहयोग बढ़ा है। मुझे पता है कि पूरा देश हमारी ओर देख रहा है। हमें ऐसा लग रहा है जैसे काफी लंबा समय है। हम सबकुछ एकदिन में पैक कर लेते हैं। ऐसे में लग रहा है कि चलो अभी टाइम है। हमारे पास अभी काफी समय है और बहुत कुछ करना है।
निशानेबाज रंजन सोढ़ीः मुझे ओलंपिक की अहमियत पता है, जो कुछ हमने पिछले कुछ सालों में किया है उससे काफी मदद मिल रही है। हम कुछ अलग नहीं करेंगे बस एक टूर्नामेंट की तरह यहां भी खेलेंगे। करीब एक साल से इसपर काम कर रहे हैं। जैसे-जैसे समय नजदीक आते जा रहे हैं थोड़ी घबराहट हो रही है, लेकिन साथ ही उत्साह भी है।
निशानेबाज रंजन सोढ़ीः मुझे ओलंपिक की अहमियत पता है, जो कुछ हमने पिछले कुछ सालों में किया है उससे काफी मदद मिल रही है। हम कुछ अलग नहीं करेंगे बस एक टूर्नामेंट की तरह यहां भी खेलेंगे। करीब एक साल से इसपर काम कर रहे हैं। जैसे-जैसे समय नजदीक आते जा रहे हैं थोड़ी घबराहट हो रही है, लेकिन साथ ही उत्साह भी है।
मुक्केबाज मैरीकॉमः तकरीबन 12 साल से मैं रिंग में हूं। ये काफी लंबी यात्रा है, मैं अपनी ट्रेनिंग पर पूरा ध्यान दे रही हूं। आखिरकार ओलंपिक के लिए मेरा चुनाव हो गया। पहली बार ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने के बाद बेहद खुश हूं। मंत्रालय, एसोसिएशन और स्पांसर्स ने पूरा सहयोग किया। उन्हीं की बदौलत मैं आज इस मुकाम पर हूं।
मुक्केबाज मैरीकॉमः तकरीबन 12 साल से मैं रिंग में हूं। ये काफी लंबी यात्रा है, मैं अपनी ट्रेनिंग पर पूरा ध्यान दे रही हूं। आखिरकार ओलंपिक के लिए मेरा चुनाव हो गया। पहली बार ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने के बाद बेहद खुश हूं। मंत्रालय, एसोसिएशन और स्पांसर्स ने पूरा सहयोग किया। उन्हीं की बदौलत मैं आज इस मुकाम पर हूं।
मुक्केबाज देवेंद्रोः पापा का पासपोर्ट नहीं बना है मैं उन्हें जरूर लेकर जाऊंगी कोरिया औरचायना को मारने के लिए मैं लगा हूं और यकीन है कि मैं उन्हें मार सकता हूं पूरी तैयारी है।
मुक्केबाज देवेंद्रोः पापा का पासपोर्ट नहीं बना है मैं उन्हें जरूर लेकर जाऊंगी कोरिया औरचायना को मारने के लिए मैं लगा हूं और यकीन है कि मैं उन्हें मार सकता हूं पूरी तैयारी है।
तीरंदाज दीपिका कुमारीः मेरा फोकस ट्रेनिंग और टैक्नीक पर है। हमारा गेम बहुत छोटी-छोटी मिस्टेक से प्रभावित होता है। फोकस पूरा टैक्नीक पर है। कोरिया और चायना से मुकाबल है। मेन कोरिया है उनसे और खुद से भी जीतना है। साबित करना है कि मैं अच्छे से अच्छे कंपटीटर को बीट कर सकती हैं। बता नहीं सकती कि मेरे लिए क्या मायने रखता है। मेरा सपना और मेरी जिंदगी है ओलंपिक गोल्ड मेडल।
तीरंदाज दीपिका कुमारीः मेरा फोकस ट्रेनिंग और टैक्नीक पर है। हमारा गेम बहुत छोटी-छोटी मिस्टेक से प्रभावित होता है। फोकस पूरा टैक्नीक पर है। कोरिया और चायना से मुकाबल है। मेन कोरिया है उनसे और खुद से भी जीतना है। साबित करना है कि मैं अच्छे से अच्छे कंपटीटर को बीट कर सकती हैं। बता नहीं सकती कि मेरे लिए क्या मायने रखता है। मेरा सपना और मेरी जिंदगी है ओलंपिक गोल्ड मेडल।
निशानेबाज गगन नारंगः जैसा कि सभी कहते हैं ओलंपिक सभी खेलों की 'मां' है। ओलंपिक में मेडल जीतना किसी भी एथलीट का सपना होता है। ऐसे में तनाव पर काबू पाना बेहद मुश्किल है। हालांकि हम सभी तैयार हैं और हमें पता है कि क्या करना है। ये मेरा तीसरा ओलंपिक है। 2004 एथेंस मेरा पहला ओलंपिक था। 12 साल हो चुके हैं। मैंने इस दौरान काफी कुछ सीखा है। पहले ओलंपिक में काफी उत्साह था। मेरे लिए वो बेहद शानदार मौका था। अपने तीसरे ओलंपिक के लिए मैं ज्यादा अच्छी तरह से तैयार हूं। इस दौरान हमने लंबी दूरी तय की है और अब खेल पर पहले से ज्यादा नियंत्रण है। हमारे लिए मेडल से ज्यादा महत्वपूर्ण है वहां जाकर बेहतरीन प्रदर्शन करना। हमने हाल में कई मौकों पर अच्छा किया है और मेडल जीते हैं। पहले भी ऐसा कर चुके हैं। हम बस अपना बेहतर पदर्शन करेंगे।
निशानेबाज गगन नारंगः जैसा कि सभी कहते हैं ओलंपिक सभी खेलों की 'मां' है। ओलंपिक में मेडल जीतना किसी भी एथलीट का सपना होता है। ऐसे में तनाव पर काबू पाना बेहद मुश्किल है। हालांकि हम सभी तैयार हैं और हमें पता है कि क्या करना है। ये मेरा तीसरा ओलंपिक है। 2004 एथेंस मेरा पहला ओलंपिक था। 12 साल हो चुके हैं। मैंने इस दौरान काफी कुछ सीखा है। पहले ओलंपिक में काफी उत्साह था। मेरे लिए वो बेहद शानदार मौका था। अपने तीसरे ओलंपिक के लिए मैं ज्यादा अच्छी तरह से तैयार हूं। इस दौरान हमने लंबी दूरी तय की है और अब खेल पर पहले से ज्यादा नियंत्रण है। हमारे लिए मेडल से ज्यादा महत्वपूर्ण है वहां जाकर बेहतरीन प्रदर्शन करना। हमने हाल में कई मौकों पर अच्छा किया है और मेडल जीते हैं। पहले भी ऐसा कर चुके हैं। हम बस अपना बेहतर पदर्शन करेंगे।
First published: July 2, 2012
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