जूली और भालू!


Updated: March 5, 2015, 7:34 PM IST
जूली और भालू!
भालू के साथ खेलती ये लड़की है जूली। अपने दोस्त भालू का नाम उसने रखा है बुद्दू। डेढ़ साल का बुद्दू भुवनेश्वर से 350 किलोमीटर दूर लखापाड़ा के गांव में जूली के परिवार के साथ रह रहा था। वन विभाग के अफसरों ने शुक्रवार को इस भालू को परिवार से ‘मुक्त’ कराया। महत्वपूर्ण बात ये है कि ये भालू इस घर में परिवार के सदस्य की तरह रह रहा था। उसने गांव में रहने वाली बकरियों तक को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया। जूली और उसका परिवार इस भालू का भरपूर ख्याल रखते थे। उसके खाने-पीने, आराम से लेकर साफ-सफाई तक के काम में पूरा परिवार लगा रहता था।

Updated: March 5, 2015, 7:34 PM IST
भालू के साथ खेलती ये लड़की है जूली। अपने दोस्त भालू का नाम उसने रखा है बुद्दू। डेढ़ साल का बुद्दू भुवनेश्वर से 350 किलोमीटर दूर लखापाड़ा के गांव में जूली के परिवार के साथ रह रहा था। वन विभाग के अफसरों ने शुक्रवार को इस भालू को परिवार से ‘मुक्त’ कराया। महत्वपूर्ण बात ये है कि ये भालू इस घर में परिवार के सदस्य की तरह रह रहा था। उसने गांव में रहने वाली बकरियों तक को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया। जूली और उसका परिवार इस भालू का भरपूर ख्याल रखते थे। उसके खाने-पीने, आराम से लेकर साफ-सफाई तक के काम में पूरा परिवार लगा रहता था।
भालू के साथ खेलती ये लड़की है जूली। अपने दोस्त भालू का नाम उसने रखा है बुद्दू। डेढ़ साल का बुद्दू भुवनेश्वर से 350 किलोमीटर दूर लखापाड़ा के गांव में जूली के परिवार के साथ रह रहा था। वन विभाग के अफसरों ने शुक्रवार को इस भालू को परिवार से ‘मुक्त’ कराया। महत्वपूर्ण बात ये है कि ये भालू इस घर में परिवार के सदस्य की तरह रह रहा था। उसने गांव में रहने वाली बकरियों तक को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया। जूली और उसका परिवार इस भालू का भरपूर ख्याल रखते थे। उसके खाने-पीने, आराम से लेकर साफ-सफाई तक के काम में पूरा परिवार लगा रहता था।
भालू के साथ खेलती ये लड़की है जूली। अपने दोस्त भालू का नाम उसने रखा है बुद्दू। डेढ़ साल का बुद्दू भुवनेश्वर से 350 किलोमीटर दूर लखापाड़ा के गांव में जूली के परिवार के साथ रह रहा था। वन विभाग के अफसरों ने शुक्रवार को इस भालू को परिवार से ‘मुक्त’ कराया। महत्वपूर्ण बात ये है कि ये भालू इस घर में परिवार के सदस्य की तरह रह रहा था। उसने गांव में रहने वाली बकरियों तक को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया। जूली और उसका परिवार इस भालू का भरपूर ख्याल रखते थे। उसके खाने-पीने, आराम से लेकर साफ-सफाई तक के काम में पूरा परिवार लगा रहता था।
भालू के साथ खेलती ये लड़की है जूली। अपने दोस्त भालू का नाम उसने रखा है बुद्दू। डेढ़ साल का बुद्दू भुवनेश्वर से 350 किलोमीटर दूर लखापाड़ा के गांव में जूली के परिवार के साथ रह रहा था। वन विभाग के अफसरों ने शुक्रवार को इस भालू को परिवार से ‘मुक्त’ कराया। महत्वपूर्ण बात ये है कि ये भालू इस घर में परिवार के सदस्य की तरह रह रहा था। उसने गांव में रहने वाली बकरियों तक को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया। जूली और उसका परिवार इस भालू का भरपूर ख्याल रखते थे। उसके खाने-पीने, आराम से लेकर साफ-सफाई तक के काम में पूरा परिवार लगा रहता था।
भालू के साथ खेलती ये लड़की है जूली। अपने दोस्त भालू का नाम उसने रखा है बुद्दू। डेढ़ साल का बुद्दू भुवनेश्वर से 350 किलोमीटर दूर लखापाड़ा के गांव में जूली के परिवार के साथ रह रहा था। वन विभाग के अफसरों ने शुक्रवार को इस भालू को परिवार से ‘मुक्त’ कराया। महत्वपूर्ण बात ये है कि ये भालू इस घर में परिवार के सदस्य की तरह रह रहा था। उसने गांव में रहने वाली बकरियों तक को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया। जूली और उसका परिवार इस भालू का भरपूर ख्याल रखते थे। उसके खाने-पीने, आराम से लेकर साफ-सफाई तक के काम में पूरा परिवार लगा रहता था।
भालू के साथ खेलती ये लड़की है जूली। अपने दोस्त भालू का नाम उसने रखा है बुद्दू। डेढ़ साल का बुद्दू भुवनेश्वर से 350 किलोमीटर दूर लखापाड़ा के गांव में जूली के परिवार के साथ रह रहा था। वन विभाग के अफसरों ने शुक्रवार को इस भालू को परिवार से ‘मुक्त’ कराया। महत्वपूर्ण बात ये है कि ये भालू इस घर में परिवार के सदस्य की तरह रह रहा था। उसने गांव में रहने वाली बकरियों तक को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया। जूली और उसका परिवार इस भालू का भरपूर ख्याल रखते थे। उसके खाने-पीने, आराम से लेकर साफ-सफाई तक के काम में पूरा परिवार लगा रहता था।
भालू के साथ खेलती ये लड़की है जूली। अपने दोस्त भालू का नाम उसने रखा है बुद्दू। डेढ़ साल का बुद्दू भुवनेश्वर से 350 किलोमीटर दूर लखापाड़ा के गांव में जूली के परिवार के साथ रह रहा था। वन विभाग के अफसरों ने शुक्रवार को इस भालू को परिवार से ‘मुक्त’ कराया। महत्वपूर्ण बात ये है कि ये भालू इस घर में परिवार के सदस्य की तरह रह रहा था। उसने गांव में रहने वाली बकरियों तक को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया। जूली और उसका परिवार इस भालू का भरपूर ख्याल रखते थे। उसके खाने-पीने, आराम से लेकर साफ-सफाई तक के काम में पूरा परिवार लगा रहता था।
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First published: August 18, 2012
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