सोनिया चाहतीं, तो बन सकती थीं प्रधानमंत्रीः कलाम

News18India
Updated: June 30, 2012, 7:41 AM IST
सोनिया चाहतीं, तो बन सकती थीं प्रधानमंत्रीः कलाम
'पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने विदेशी मूल का मुद्दा उठा कर सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनने से रोक दिया था', अब तक प्रचारित की जा रही इस बात को खुद कलाम ने गलत साबित कर दिया है।
News18India
Updated: June 30, 2012, 7:41 AM IST
नई दिल्ली। 'पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने विदेशी मूल का मुद्दा उठा कर सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनने से रोक दिया था', अब तक प्रचारित की जा रही इस बात को खुद कलाम ने गलत साबित कर दिया है।

सोनिया गांधी के त्याग और महानता का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के मुताबिक, उन्होंने सोनिया को प्रधानमंत्री बनने में कोई रुकावट पैदा नहीं की थी, बल्कि सोनिया ने खुद ही पीएम की कुर्सी को ठुकरा दिया था।

कलाम ने लिखा है कि कलाम ने अपनी किताब में लिखा है कि उस समय कई राजनेता उनसे आकर मिले और अपील की कि सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के मुद्दे पर वो किसी दबाव में न आएं। ये ऐसी अपील थी जो संवैधानिक रूप से मान्य नहीं की जा सकती थी। अगर वो खुद की नियुक्ति को लेकर कोई दावा पेश करतीं तो मेरे पास सिवाय उनकी नियुक्ति के कोई और विकल्प नहीं होता। लेकिन सोनिया ने खुद ही मनमोहन सिंह का नाम आगे कर मुझे और राष्ट्रपति के दफ्तर को चौंका दिया था।

कलाम ने लिखा है कि सच बात तो ये है कि राष्ट्रपति दफ्तर से सोनिया गांधी के नाम की चिट्ठी भी तैयार हो चुकी था। उनके इनकार के बाद दोबारा मनमोहन सिंह के नाम की चिट्ठी तैयार करनी पड़ी।

कलाम ने ये बात अपनी नई किताब 'टर्निंग पॉइंट्स' में बताई है। कलाम की ये किताब 'विंग्स ऑफ फायर' का दूसरा संस्करण है। किताब जल्द ही बाजार में आने वाली है। फिलहाल इसका कुछ अंश मीडिया में आया है। कलाम ने अपनी किताब में उस बात को खारिज कर दिया है, जिसे कांग्रेस विरोधी पार्टियां अब तक समझती और समझाती आई हैं।

जाहिर है कि कांग्रेस को विरोधियों पर हमला बोलने का मौका मिल गया। पार्टी प्रवक्ता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा है कि ये टिप्पणी उनके ऊपर है जो संवैधानिक प्रावधान होने के बाद भी सोनिया जी को पीएम नहीं बनना देना चाहते थे। उन्होंने ये कहा कि सोनियाजी के पद ना लिए के कारण उन्हें आश्चर्य हुआ है। सोनिया जी यूपीए की चेयरपर्सन है और यूपीए की सरकार है वो समय समय पर मार्गदर्शन देती हैं।

बीजेपी ने कलाम के बयान को ये कहकर खारिज करने की कोशिश की है कि वो ये बात कई बार बोल चुके हैं। कलाम ने अपनी नई किताब टर्निंग पॉइंट्स ये भी लिखा है कि उस दौरान कलाम पर इस बात का दबाव बनाया गया था कि वो सोनिया गांधी को पीएम के तौर पर कबूल नहीं करें।

किताब में कलाम ने कई यादें साझा की हैं। उन्होंने यूपीए सरकार के साथ तनाव भरे रिश्तों का भी जिक्र किया है। कलाम ने लिखा है कि राष्ट्रपति रहते हुए वह यूपीए सरकार की ओर से लाए गए ऑफिस ऑफ प्रॉफिट बिल के समर्थन में नहीं थे, क्योंकि बिल की मंशा ठीक नहीं थी।

इस बिल के बारे में यहां तक कहा जाता है कि इस बिल को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कई बड़े कांग्रेसी नेताओं को सांसद के तौर पर अयोग्य करार दिए जाने से बचाने के लिए लाया गया था।

राजनीतिक चिंतक और पूर्व बीजेपी नेता गोविंदाचार्य ने कहा है कि सोनिया ने पीएम को पद त्यागकर किसी तरह का त्याग नहीं किया था। गोविंदाचार्य ने ऐसा करना सोनिया की मजबूरी बताया। गोविंदाचार्य ने कहा कि यदि सोनिया प्रधानमंत्री बनतीं तो यह उन देशभक्तों का अपमान होता जिन्होंने कड़े संघर्ष के बाद देश को आजादी दिलाई। सबसे ऊंचे पद पर कोई विदेशी बैठकर सत्ता नहीं चला सकता।
First published: June 30, 2012
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर