शिवपाल पलटे, कहा- अफसरों से चोरी करने को नहीं कहा

News18India
Updated: August 10, 2012, 2:52 AM IST
News18India
Updated: August 10, 2012, 2:52 AM IST
एटा। अधिकारियों को खुलेआम चोरी करने की नसीहत देकर फंसे यूपी के पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने आज अपने बयान पर सफाई दी। मीडिया के सामने आए शिवपाल पूरा दोष पूर्ववर्ती सरकार पर मढ़ते ही दिखाई दिए। शिवपाल ने कहा कि वह पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार और उसे रोकने की बात कर रहे थे।

एटा में एक बैठक के दौरान मंत्री शिवपाल यादव ने सभी अधिकारियों को चोरी करने तक की नसीहत दे डाली थी लेकिन आज मीडिया के सामने सफाई देते हुए शिवपाल ने कहा कि वह अफसरों को मेहनत से काम करने और भ्रष्टाचार से लड़ने की बात कर रहे थे। शिवपाल ने मीडिया के सिर ठीकरा फोड़ने में भी देरी नहीं की और कहा की वह मामले को तोड़ मरोड़कर पेश करती है। शिवपाल ने कहा कि उनके बयान का सिर्फ एक हिस्सा ही सामने लाया गया।

शिवपाल का बयान, नीलगाय को मारो और खा जाओ

मालूम हो कि गुरुवार को एटा में जिला योजना समिति की बैठक की अध्यक्षता के दौरान शिवपाल ने कलेक्टर और दूसरे अधिकारियों की मौजूदगी में यह अजीबोगरीब बयान दे डाला था। मंत्री जी की चोरी करने की नसीहत सुनकर मौके पर मौजूद अधिकारी और जन प्रतिनिधि हक्के-बक्के रह गए। हालांकि शिवपाल सिंह यादव ने और भी बातें कहीं लेकिन तब तक उनकी नजर मीडिया के कैमरे पर पड़ गई और इसके बाद कैमरे को बंद करा दिया गया था।

लायन सफारी हर हाल में बनकर रहेगाः शिवपाल

कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने मंत्री शिवपाल सिंह यादव का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने अफसरों के ईमानदारी से काम करने की बात की लेकिन अंत में कहा कि वो थोड़ी चोरी कर सकते हैं। अखिलेश ने कहा कि मंत्री रहते हुए ऐसी बात करने से बचनी चाहिए। अफसरों के साथ मंत्री को सख्ती से बात करनी चाहिए।

शिवपाल ने एक झटके में सस्पेंड किए 15 इंजीनियर

वहीं बीजेपी नेता लालजी टंडन ने इस मामले का विरोध करते हुए कहा कि एक मंत्री जो बोलता है उसपर सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी होती है। जो सरकार करती है वही मंत्री कहता है। इस बयान से ऐसा लगता है कि सरकार ने अफसरों को चोरी का लाइसेंस दे दिया है। वरिष्ठ मंत्री ऐसी बात करेंगे तो इसे सरकार की नीति के रूप में देखा जाएगा। वाणी पर संयम होना चाहिए और किसी भी बडे़ कद के नेता को यह पता होना चाहिए कि उसकी बात कितनी दूर तक जाएगी।
First published: August 10, 2012
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर