जीरो लगाने की आदत से बाज आए सीएजीः मनीष तिवारी

आईएएनएस
Updated: August 18, 2012, 3:18 PM IST
जीरो लगाने की आदत से बाज आए सीएजीः मनीष तिवारी
कांग्रेस ने शनिवार को कोयला खण्डों की नीलामी न करने के सरकार के निर्णय का बचाव किया और देश के मुख्य लेखाकार की निंदा की, जिनकी रपट में सरकारी खजाने को 1.85 लाख करोड़ रुपये का नुकसान बताया गया है।
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Updated: August 18, 2012, 3:18 PM IST
नई दिल्ली। कांग्रेस ने शनिवार को कोयला खण्डों की नीलामी न करने के सरकार के निर्णय का बचाव किया और देश के मुख्य लेखाकार की निंदा की, जिनकी रपट में सरकारी खजाने को 1.85 लाख करोड़ रुपये का नुकसान बताया गया है। कांग्रेस ने कहा कि सीएजी को आंकड़े पेश करने और अपने अधिकार का अतिक्रमण करने से बाज आना चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि देश की विशाल एवं तात्कालिक ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नीलामी न करने का निर्णय लिया था। तिवारी ने यह भी कहा कि इन वर्षों के दौरान रुपये की कीमत में बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारा यह मानना है और हम लगातार इस बात को कह रहे हैं कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को रपटों में आंकड़े पेश करने से बाज आना चाहिए।

तिवारी ने कहा कि नुकसान के आंकड़े पेश करना, रपट की जांच करने वाली संसद की लोक लेखा समिति का काम है। सीएजी विनोद राय की आलोचना करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि संवैधानिक खाके के तहत सभी संस्थानों और आपसी सम्मान के बीच संतुलन होना चाहिए।

तिवारी ने कहा कि जब वे लक्ष्मण रेखा पार करते हैं और अपने अधिकार से बाहर काम करने का निर्णय लेते हैं, तब हमारा कर्तव्य बनता है कि उन्हें संवैधानिक मर्यादा का पालन करने की बात याद दिलाएं।

कांग्रेस प्रवक्ता ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि जब सीएजी की रपट गुजरात, छत्तीसगढ़ या मध्य प्रदेश जैसे भाजपा शासित राज्यों के बारे में इसी तरह के प्रश्न खड़े करती है, तब उनके मुख्यमंत्री कहते हैं कि यह लेखाकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। तिवारी ने कहा कि लेकिन जब यह मामला केंद्र से जुड़ा होता है, तब वे सभी नियम भूल जाते हैं और सरकार की निंदा करना शुरू कर देते हैं।

सीएजी की रपट में कथित अनियमितता की ओर इशारा किए जाने के मुद्दे पर भाजपा ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस्तीफे की मांग की, क्योंकि 2006 और 2009 के बीच केंद्रीय कोयला मंत्रालय का प्रभार प्रधानमंत्री के ही पास था।

First published: August 18, 2012
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