एनडीए सरकार ने भी बांटी थी जिंदल स्टील्स को खदान

News18India

Updated: September 11, 2012, 3:13 PM IST
facebook Twitter google skype whatsapp

नई दिल्ली। यूपीए सरकार पर कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल को गलत तरीके से कोयला खदान आवंटन का आरोप पहले से है लेकिन अब एक मामला एनडीए सरकार के वक्त का सामने आया है। आईबीएन7 के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक साल 2002 में उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने नवीन जिंदल की कंपनी को खदान आवंटन की सिफारिश की थी। खास बात ये कि पटनायक उस वक्त केंद्र में राज कर रही एनडीए सरकार के सहयोगी थे। यानी एनडीए सरकार में भी कांग्रेस के सांसद नवीन जिंदल की कंपनी जिंदल स्टील्स एंड पावर लिमिटेड को फायदा पहुंचाया गया।

आईबीएन7 के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक साल 2002 में उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उस वक्त के कोयला मंत्री रविशंकर प्रसाद को चिट्ठी लिखकर जिंदल स्टील्स एंड पावर लिमिटेड को उड़ीसा के तालशेर में एक कोयला खदान आवंटन की सिफारिश की। 22 जून 2006 के लिखी गई इस चिट्ठी के मुताबिक नवीन पटनायक ने रविशंकर प्रसाद को लिखा था कि मैसर्स जिंदल स्टील्स एंड पावर लिमिटेड ने 1000 करोड़ रुपये की शुरुआती निवेश के साथ उड़ीसा के दो ज़िलों में स्पॉंज आयरन और पावर के प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया है। आपूर्ति के लिए कंपनी ने उत्कल बी-1 कोयला खदान के आवंटन की गुज़ारिश की है। कोयला मंत्रालय की स्क्रीनिंग कमेटी ने वो खदान वीडियोकॉन कंपनी के एक पावर प्लांट के लिए 3 जुलाई 1997 के आवंटित की थी। लेकिन कंपनी ने काम शुरू नहीं किया। जिंदल स्टील्स एंड पावर लिमिटेड को खदान आवंटन से सूबे में रोजगार बढ़ेगा और आदिवासी इलाके में विकास होगा।

एनडीए सरकार ने भी बांटी थी जिंदल स्टील्स को खदान
साल 2002 में उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने नवीन जिंदल की कंपनी को खदान आवंटन की सिफारिश की थी। खास बात ये कि पटनायक उस वक्त केंद्र में राज कर रही एनडीए सरकार के सहयोगी थे।

नवीन पटनायक की सिफारिश पर कोयला मंत्रालय ने वो खदान नवीन जिंदल की कंपनी को आवंटित कर दी। मामला सामने आने पर उस वक्त के कोयला मंत्री रविशंकर प्रसाद सफाई दे रहे हैं कि हर सीएम सिफारिश करता है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि नीलामी रोककर फायदा पहुंचाया जाए। कोयला खदान आवंटन के मसले पर अपने नेताओं का नाम आने से परेशान कांग्रेस इस ताजा खुलासे के बाद उत्साहित है। प्रवक्ता मनीष तिवारी कहते हैं कि हम हमेशा कहते आए हैं और अब साबित हो रहा है कि बीजेपी की कथनी करनी और नीयत में फर्क है।

सीएजी की रिपोर्ट सामने आने के बाद कोयला खदान आवंटन से जुड़े खुलासों ने साफ कर दिया है कि काले सोने की बंदरबांट का फायदा सबने उठाया। अब सवाल यही है कि जांच एजेंसियों की तफ्तीश क्या जनता के गुनहगारों के गिरेबान तक पहुंचेगी।

First published: September 11, 2012
facebook Twitter google skype whatsapp