मनमोहन की नई टीम को शक्ल देने में राहुल का असर नहीं!

News18India

Updated: October 28, 2012, 4:04 PM IST
facebook Twitter google skype whatsapp

नई दिल्ली। यूपीए-2 सरकार में मंत्रिमंडल के आखिरी फेलबदल में मनमोहन सिंह ने युवा चेहरों के बजाय अनुभवी चेहरों पर दांव लगाया है। मनमोहन सिंह की नई टीम को शक्ल देने में राहुल गांधी की भूमिका की चाहे जितनी चर्चा हुई हो, लेकिन इसका ज्यादा असर नहीं दिख रहा है। फेरबदल में जिन युवाओं को मौका मिला है उसके पीछे उनका प्रदर्शन माना जा रहा है।

कांग्रेस पार्टी इन चेहरों को सामने रख कर 2014 में केंद्र की सत्ता के लिए हैट्रिक की कोशिश करेगी। लेकिन सवाल ये उठता है कि मनमोहन की इस टीम में राहुल ब्रिग्रेड के कितने योद्धा हैं। कुछेक चेहरों को छोड़ दे तो टीम राहुल को मंत्रिमंडल विस्तार से निराशा ही हाथ लगी है। मसलन राहुल की करीबी मीनाक्षी नटराजन के मंत्री बनने की चर्चा जोरों पर थी, पर पहली बार लोकसभा पहुंचीं मीनाक्षी, मनमोहन की नई टीम में फिट नहीं हो पाईं। तमिलनाडु के कद्दावर नेता वाइको को धूल चटाने वाले मानिक टैगोर भी मंत्री बनने से चूक गए। मिलिंद देवड़ा को भी तरक्की नहीं मिली। जितिन प्रसाद और आरपीएन सिंह राज्य मंत्री थे और राज्य मंत्री ही रह गए।

ऐसे में सवाल ये उठता है कि इस मंत्रिमंडल विस्तार पर राहुल गांधी की कितनी छाप है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यमंत्री से तरक्की देकर उर्जा जैसे अहम मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। सचिन पायलट और जितेन्द्र सिंह को भी तरक्की देकर राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी दी गई है। सचिन पायलट को कॉरपोरेट अफेयर्स तो जितेंद्र सिंह को खेल और युवा मामलों का मंत्री बनाया गया है।

मनीष तिवारी को भी सूचना और प्रसारण मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्यमंत्री बनाया गया है लेकिन उसकी वजह राहुल नहीं, बल्कि बतौर प्रवक्ता पार्टी और सरकार के रुख को बेबाकी से रखने की उनकी काबिलियत है। अजय माकन को तरक्की देकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है, पर उसकी बड़ी वजह अगले साल दिल्ली होने वाला दिल्ली विधानसभा चुनाव और खेल मंत्री के तौर पर उनका बेहतरीन और साफ सुथरा प्रदर्शन है।

इस फेरबदल की एक खास बात ये है कि युवा चेहरों को फ्री-हैंड दिया गया है, ताकि वे अपने काम से राहुल के एजेंडे को आगे ले जाए। राहुल को भी कई बार, खुद प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल में शामिल होने का न्योता दे चुके हैं। लेकिन हर बार राहुल ने सरकार के बजाय संगठन को तरजीह की दलील के साथ उसे ठुकरा दिया है। ऐसे में कहा ये भी जा रहा है कि राहुल 2014 के पहले अपनी टीम को दुरुस्त कर लेना चाहते हैं।

First published: October 28, 2012
facebook Twitter google skype whatsapp