क्या केजरीवाल का जादू लंबे समय तक रह पाएगा?

Updated: November 1, 2012, 3:11 PM IST
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नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की चुनौती के जवाब में अरविंद केजरीवाल पूरे दल-बल के साथ फर्रुखाबाद पहुंचे और एक बार फिर राजनीति के बड़े चेहरों पर निशाना साधा। खुलासों और आरोपों की सियासत करने वाले केजरीवाल पहली बार दिल्ली से बाहर शक्ति प्रदर्शन के अंदाज में नजर आए, लेकिन सवाल ये है कि क्या केजरीवाल का जादू और उनकी सियासत का तरीका लंबे समय तक बरकरार रह पाएगा। क्या वर्तमान राजनीति से निराश लोगों का केजरीवाल को मिल रहा है समर्थन?

केजरीवाल आम आदमी की टोपी पहनकर फर्रुखाबाद पहुंचे और अपने समर्थकों के साथ जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। उन्होंने खुर्शीद को उनके गढ़ में घुसकर चुनौती दी कि वो फर्रुखाबाद आए भी हैं और लौटकर भी जाएंगे। लेकिन सवाल ये है कि क्या केजरीवाल का करिश्मा काम कर रहा है या फिर भीड़ में जुटे लोग सिर्फ इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कार्यकर्ता हैं?

अरविंद केजरीवाल का अब तक का आक्रामक अंदाज दिलचस्प रहा है। वो बड़ी शख्सियत पर निशाना साधते हैं।

जाने-माने लोगों पर आरोप लगाते हैं। आम आदमी से जुड़े मुद्दों को उठाकर सत्ता में बैठे लोगों को कठघरे में खड़ा करते हैं। सीधी कार्रवाई करते हुए नजर आते हैं। सभी राजनीतिक दलों में सांठगांठ की बात कहकर उन्हें गैर भरोसेमंद करार देते हैं। राजनीतिक पार्टियों को उद्योगपतियों की दुकान बताते हैं और फिर व्यवस्था परिवर्तन का सपना दिखाते हैं।

राजनीतिक हताशा और निराशा में जकड़े लोगों और खासकर नौजवानों को अरविंद केजरीवाल में एक उम्मीद नजर आती है। इसकी वजह से कुछ लोग आकर्षित भी होते हैं, लेकिन केजरीवाल के विरोधी कहते हैं कि राजनीति का ये तरीका कब तक चमक पैदा करेगा। क्या ये भीड़ वोटों में तब्दील होगी या फिर नारों के साथ हवा में उड़ जाएगी?

सिर्फ आरोपों की सियासत नहीं जनता के सामने अपना विजन स्पष्ट करें केजरीवाल। बातचीत के लिए रांची से मौजूद हैं प्रभात खबर के संपादक हरिवंश, जाने माने समाजशास्त्री और जेएनयू के प्रोफेसर आनंद कुमार, राजनैतिक विश्लेषक सैबाल दासगुप्ता, सीएनबीसी आवाज के मैनेजिंग एडिटर संजय पुगलिया और बीजेपी नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह। (वीडियो देखें)

First published: November 1, 2012
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