नामधारी पर इतनी मेहरबान क्यों थी निशंक सरकार?

News18India

Updated: February 1, 2013, 5:56 PM IST
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देहरादून। उत्तराखंड में रही निशंक सरकार और देहरादून के तात्कालीन एसएसपी, नामधारी को लेकर सवालों के घेरे में हैं। करोड़ों रुपये की जमीन हड़पने के एक मामले को रफा दफा किए जाने के खुलासे से निशंक सरकार, पुलिस और नामधारी, तीनों के रिश्ते उजागर हो गए हैं।

पॉन्टी चड्ढा हत्याकांड के बाद दिल्ली पुलिस के हाथों गिरफ्तार सुखदेव सिंह नामधारी अब उत्तराखंड में भी गिरफ्तार हो सकता है। यही नहीं, उसकी वजह से उत्तराखंड के एक एक आईपीएस अफसर सहित कई पुलिसवालों की जान भी सांसत में पड़ गई है। नामधारी ने राज्य की पूर्व निशंक सरकार को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। कारण हरिद्वार पुलिस की ताजा रिपोर्ट है। जिसमें कहा गया है कि नामधारी के खिलाफ करोड़ों रुपये की जमीन हथियाने के मामले की चार्जशीट को बदलकर नामधारी को क्लीन चिट दे दिया गया। मामला खुलने के बाद उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार निशंक सरकार को घेरने में जुट गई है।

दरअसल मामला हरिद्वार के कनखल में मौजूद इस निर्मल विरक्त रुटिया से जुड़ा है। आईबीएन7 के पास मौजूद हरिद्वार पुलिस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 9 मई 2009 को हरिद्वार के कनखल के निर्मल विरक्त कुटिया के महंत भगवंत सिंह की शिकायत पर कोर्ट के आदेश पर सुखदेव सिंह नामधारी और उसके 7 साथियों के खिलाफ कनखल थाने में फर्जी दस्तावेज बनाने, जान से मारने की धमकी देने और आपराधिक साजिश सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। जांच के दौरान बिना वजह जांच अधिकारी बदले जाते रहे। मगर सच नहीं बदला और आखिरकार चार्जशीट भी तैयार हो गई।

पुलिस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक नए एसएसपी केवल खुराना ने पद संभालते ही सबसे पहले नामधारी के खिलाफ तैयार चार्जशीट पर रोक लगा दी। और मामले की दोबारा जांच शुरू कराई और वो भी दूसरी यूनिट से। इस यूनिट ने जांच की और नामधारी को क्लीन चिट देते हुए चार्जशीट खारिज करने की सिफारिश कर दी। अब मामला खुलने के बाद राज्य के पुलिस महानिदेशक ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दे दिये हैं।

पुलिस की अपनी ही ताजा रिपोर्ट ने ये साबित कर दिया है कि जमीन हथियाने के इस मामले में नाजायज तौर पर नामधारी का पक्ष लिया गया। लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि जिस एसएसपी पर कार्रवाई की जानी चाहिए वो राज्य की उस राजधानी का एसएसपी बना हुआ है। जहां न सिर्फ सरकार बल्कि पुलिस महकमें के तमाम आला अधिकारी रहते हैं।

First published: February 1, 2013
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