अमित शाह: राजनीतिक रंगमंच का माहिर खिलाड़ी, जो है 'मैच' जिताऊ नेता!

ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: March 12, 2017, 12:00 AM IST
अमित शाह: राजनीतिक रंगमंच का माहिर खिलाड़ी, जो है 'मैच' जिताऊ नेता!
फाइल फोटो
ओम प्रकाश | News18India.com
Updated: March 12, 2017, 12:00 AM IST
यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी की धमाकेदार जीत का असली सेहरा अगर किसी के सिर बंधता है तो वो हैं अमित शाह. इसके पीछे वजहें भी हैं.

अमित शाह शतरंज के खिलाड़ी रहे हैं. 2006 में वह गुजरात स्टेट चेस ऐसोसिएशन के चेयरमैन थे. वो जानते हैं कि कौन मोहरा किस जगह राजा और रानी के लिए ख़तरा बन सकता है.

ख़ास बात ये है कि अमित शाह की इस शतरंज के कोई तयशुदा नियम नहीं है, जैसा मौक़ा वैसी चाल.

नाटकों में भी उनकी रुचि है. अपने विद्यार्थी जीवन में उन्होंने मंच पर कई बार प्रदर्शन किया है. सियासत भी रंगमंच ही है, इसे उनसे बेहतर कौन समझ सकता है.

अमित शाह ने चुनाव के दिनों में एक दिन में औसतन 495 किलोमीटर का सफ़र किया. उनकी वेबसाइट पर उनकी दिनचर्या का पूरा हिसाब मौजूद है. आपको शायद यक़ीन न हो, उन्होंने पिछले 18 महीने में दो लाख 65 हज़ार किलोमीटर से ज़्यादा लंबी यात्राएं कीं. इनमें ज़्यादातर दौरे वो थे जिनमें वो पार्टी का ज़मीनी ढांचा मज़बूत कर रहे थे या उसे यूपी जैसे राज्य में पूरी तरह ज़मीन से ही खड़ा कर रहे थे. इसलिए कोई इससे इनकार नहीं कर रहा है कि यूपी की ज़ोरदार जीत असल में अमित शाह की ही जीत है.



पोल एजेंट से चुनाव जिताऊ नेता तक

अमित शाह गुजराती हैं, मुंबई में जन्मे. अहमदाबाद में वह आरएसएस सदस्य बने. एबीवीपी के लिए काम किया और 1984-85 में बीजेपी में आए. पहली बार पार्टी ने उन्हें अहमदाबाद के नारायणपुर वार्ड में पोल एजेंट बनाया था.

पोल एजेंट रहने के दौरान ही उन्होंने राजनीति का गणित समझना शुरू कर दिया था.

इसके बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और फिर गुजरात भाजपा के राज्य सचिव और उपाध्यक्ष तक वह एक के बाद एक सीढ़ियां चढ़ते गए. ज़मीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं तक उनकी पहुँच और उनसे निजी तौर पर जुड़े रहने ने उन्हें बाक़ी नेताओं से अलग छवि दी. आम लोगों की नज़र में वह तब आए जब वे अहमदाबाद नगर के प्रभारी बने. यहीं से उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन और एकता यात्रा के पक्ष में जनमत तैयार किया.

गांधीनगर से उन्होंने बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी का चुनाव प्रबंधन संभाला और जब गुजरात में मोदी युग शुरू हुआ तो उन्‍हें गृह मंत्रालय दिया गया. 2014 में जब वे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तो इसके बाद 10 करोड़ से ज़्यादा सदस्यों के साथ पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी थी.

2014 में ही बेहद अहम लोकसभा चुनाव हुए और तभी से उनका उत्तर प्रदेश से रिश्ता शुरू हुआ. बीजेपी ने उन्हें उत्तर प्रदेश जैसे सियासी तौर पर बेहद जटिल माने जाने वाले राज्य का काम सौंपा. वह भी समझ रहे थे, इसलिए उन्होंने यूपी की यात्रा शुरू की. नतीजा इतना शानदार रहा कि बीजेपी ने यूपी में 80 में से 73 सीटों पर जीत हासिल की.



चुनाव के गणितज्ञ

पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद पहले ही साल बीजेपी ने पांच में से चार विधानसभा चुनाव जीत लिए- महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा में पार्टी के मुख्यमंत्री बने तो जम्मू और कश्मीर में उपमुख्यमंत्री के पद के साथ बीजेपी गठबंधन सरकार का हिस्सा बनी.

हालांकि दिल्ली और बिहार में हार के बाद बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अमित शाह की लीडरशिप पर सवाल खड़े किए थे पर असम की जीत के बाद अमित शाह की तारीफ़ करने में तनिक भी देर नहीं की. ज़ाहिर है कि ये तारीफ़ बेकार नहीं गई.
First published: March 11, 2017
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