66 साल पुराना दर्द, 50 मीटर की दूरी और अब रचा इतिहास

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First published: January 14, 2017, 4:07 PM IST | Updated: January 14, 2017, 4:07 PM IST
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66 साल पुराना दर्द, 50 मीटर की दूरी और अब रचा इतिहास
गुजरात ने पहली बार रणजी ट्रॉफी खिताब जीतते हुए इतिहास रच दिया. गुजरात ने उसी इंदौर शहर में रणजी ट्रॉफी खिताब जीता, जहां 66 साल पहले फाइनल मुकाबले में उसे हार का सामना करना पड़ा था. गुजरात ने फाइनल मुकाबले में मुंबई को पांच विकेट से हरा दिया.

गुजरात ने पहली बार रणजी ट्रॉफी खिताब जीतते हुए इतिहास रच दिया. गुजरात ने उसी इंदौर शहर में रणजी ट्रॉफी खिताब जीता, जहां 66 साल पहले फाइनल मुकाबले में उसे हार का सामना करना पड़ा था. गुजरात ने फाइनल मुकाबले में मुंबई को पांच विकेट से हरा दिया.

गुजरात की टीम दूसरी बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंची थी. 66 साल पहले फाइनल में गुजरात को होलकर टीम के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था.

1951 में मेजबान होलकर टीम के खिलाफ खिताबी मुकाबला गुजरात की टीम 189 रन से हार गई थी. यह मैच मौजूदा रणजी ट्रॉफी फाइनल के मैदान होलकर स्टेडियम से महज 50 मीटर की दूरी पर यशवंत क्लब मैदान पर खेला गया था.

होलकर टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए मुश्ताक अली के 187 रनों की बदौलत 429 रन बनाए थे. जवाब में गुजरात की पारी 327 रन पर सिमट गई थी.

पहली पारी में 102 रन की बढ़त हासिल करने के बाद होलकर टीम ने दूसरी पारी में 443 रन बनाए थे. होलकर के लिए सीटी सर्वटे ने 234 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी. 545 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए गुजरात की दूसरी पारी 356 रन पर ऑल आउट हो गई.

इंदौर में मिली हार के बाद 66 साल तक गुजरात की टीम कभी फाइनल में नहीं पहुंच सकी थी. अब 66 साल बाद गुजरात फाइनल में पहुंची तो संयोगवश फाइनल मुकाबल भी इंदौर में खेला गया, लेकिन इस बार पार्थिव पटेल के नेतृत्व में गुजरात टीम ने इतिहास रचकर 66 साल पुराने गम को खुशी में बदल दिया.

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