तीसरा टेस्ट मैच रांची में लेकिन धोनी की धूम दिखी दिल्ली में!

विमल कुमार@Vimalwa
Updated: March 15, 2017, 8:02 PM IST
तीसरा टेस्ट मैच रांची में लेकिन धोनी की धूम दिखी दिल्ली में!
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विमल कुमार@Vimalwa
Updated: March 15, 2017, 8:02 PM IST
अगर तीन साल पहले भी किसी ने ये भविष्याणी की होती कि जब रांची में पहले टेस्ट का आयोजन होगा तो महेंद्र सिंह धोनी उस मैच में नहीं खेलेगें तो शायद उस पर यकीन भी किया जा सकता था. लेकिन, अगर कोई ये कहता कि रांची में होने वाले टेस्ट की बजाए धोनी किसी घरेलू मैच खेलने के लिए भारत के किसी दूसरे शहर में होंगे तो इस बात पर कोई भी भरोसा नहीं करता. लेकिन, आज भारतीय क्रिकेट की ये हकीकत है.

मैच देखने पहुंचे हजारों फैन्स
दरअसल, दिल्ली एयरपोर्ट के समीप पालम क्रिकेट मैदान पर विजय हज़ारे ट्रॉफी का क्वाटर फाइनल मुकाबला झारखंड और विदर्भ के बीच शुरू हुआ तो अचानक ही हज़ारों की संख्या में क्रिकेट फैंस ने मैदान का रुख किया. सड़क के किनारे हर फैंस की नज़र सिर्फ एक खिलाड़ी की झलक पाने के लिए बेकरार थी. पूरा मैदान 'धोनी-धोनी' के नाम से गूंज रहा था. लेकिन, ये क्या विदर्भ की टीम ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए सिर्फ 18 रन पर 4 और उसके बाद 42 रन पर 5 विकेट खो दिए तो फैंस मायूस होने लगे. उन्हें इस बात का डर सताने लगा कि अब धोनी को बल्लेबाज़ी करने का मौका ही नहीं मिलेगा. बहरहाल, जब विदर्भ ने झारखंड के सामने जीत के लिए 160 रनों का लक्ष्य रखा तो हर किसी ने राहत की सांस ली. और ये उम्मीद की उन्हें माही को मारते देखने का मौका मिलेगा. इस मैदान पर क्रिकेट देखने के लिए ना तो आपको टिकट खरीदने की ज़रूरत थी और ना ही सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ामात से जूझने की जद्दोजेहद.

धोनी की एक झलक के लिए बेताब थे दर्शक

झारखंड का स्कोर एक समय 2 विकेट के नुकसान पर 101 रन था और ऐसा लगने लगा कि धोनी बल्लेबाज़ी के लिए ही ना उतरें. दर्शकों ने ऐसा भांपते हुए लगातार ये मांग करनी शुरू कर दी कि धोनी अपनी झलक ज़रूर दिखाएं. दरअसल, जब झारखंड की टीम बैटिंग कर रही थी तो धोनी ड्रेसिंग रूम के अंदर चले गए थे. देवव्रत के तौर पर जब तीसरा विकेट झारखंड ने खोया तो दर्शकों में उत्साह छा गया. हर कोई धोनी-धोनी के शोर के साथ तालियां बजाने लगा. लेकिन ये क्या धोनी की जगह ईशांक जग्गी मैदान पर उतरे. आलम ये रहा कि जग्गी की हूटिंग होने लगी और बच्चों और महिलाओं ने जग्गी से ये गुज़ारिश की कि वो वापस लौट जाएं और कप्तान धोनी को भेजें. ज़ाहिर सी बात है ऐसा हुआ नहीं लेकिन दर्शकों में बैचेनी देखने लायक थी.

मैदान पर हुआ जोरदार स्वागत
आखिरकार, जब सौरव तिवारी आउट हुए तो धोनी बल्ला लेकर मैदान पर उतरे और उनके स्वागत को लेकर जोश देखने लायक था. अचानक ही एक गुमनाम से घरेलू क्रिकेट मैच में अतंतराष्ट्रीय क्रिकेट की गंभीरता दिखने लगी. इसी बीच एक खेल प्रेमी ने सुरक्षा इंतजाम को धत्ता बताते हुए पिच के बीच में पहुंच गया और धोनी से ऑटोग्राफ लेने में कामयाब भी हुआ. जब धोनी झारखंड को मैच जिताने के करीब ले जा रहे थे और एक और दर्शक ने एंट्री की और उनके पैर छूने में कामयाबी हासिल की. नॉट आउट होकर धोनी जब ड्रेसिंग रूम की तरफ लौटे रहे थे तो उन्होंने अपने ही अंदाज़ में दर्शकों का अभिनंदन किया और बस फिर क्या था ऐसा लगा कि हर किसी का दिन बन गया.



चाहनेवालों से नहीं बच पाये धोनी
लेकिन, अभी मैच ख़त्म होने की बजाए दर्शकों के लिए असली मैच शुरू हुआ था. झारखंड ड्रेसिंग रूम के बाहर छोटे बच्चे और महिला फैंस का एक झुंड लगातार आर्मी वालों से इस बात कि विनती करता दिखा कि किसी तरह से धोनी के साथ एक पल की मुलाकात हो जाए. ऐसा मुमकिन नहीं था. इंतज़ार करते करते जब दर्शक थक रहे थे तो अचानक किसी ने कहा कि टीम बस के पास चलो वहीं माही के दर्शन होंगे. लेकिन माही अपनी निजी कार मंगा चुके थे और चुपके से पिछले दरवाज़े से निकलने की जुगाड़ में थे. लेकिन, जल्द ही ये बात आग की तरह मैदान में फैल गयी और लोगों ने धोनी की कार को घेर लिया.

निकलते-निकलते धोनी ने 3-4 बच्चों के साथ तस्वीरें खिंचायी और उसके बाद मुस्कराते हुए तेज़ी से अपनी कार में चल दिए. पुलिस के जवान भी सुरक्षा की बजाए अपनी सेल्फी के चक्कर में ज़्यादा दिखे. ये माही का जलवा था. अपने पूरे शबाब पर. यकीन करना मुश्किल था कि लोगों को ना तो मैच में दिलचस्पी थी और ना ही कोई गुरुवार से होने वाले रांची टेस्ट के बारे में चर्चा कर रहा था. हर किसी की सिर्फ एक ही हसरत थी. धोनी को लाइव देखना. चाहे वो सिर्फ पल भर के लिए ही क्यों ना हो. माही ने छ्क्का लगाकर झारखंड को मैच जिताया तो एक मासूम बच्चे ने कहा- "मां, चलो मैं मुंबई में 2011 वर्ल्ड कप का फाइनल भले ही नहीं देख पाया लेकिन माही को छक्का मारते मैच जिताने वाले पल का गवाह मैं भी बना...मेरे लिए इतना काफी है..."

शायद, पालम मैदान में आये हज़ारों दर्शकों के ज़ेहन में भी यही सोच रही होगी. रांची में उनके चाहने वाले शायद यही सोच रहें हों कि काश माही ने टेस्ट मैच को अलविदा ना कहा होता और वो विजय हज़ारे की बजाए भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलते तो बेहतर होता.
First published: March 15, 2017
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