क्या रांची टेस्ट में हुआ ड्रॉ ऑस्ट्रेलिया की 'जीत' और भारत की 'हार' है?

विमल कुमार@Vimalwa
Updated: March 21, 2017, 6:02 PM IST
क्या रांची टेस्ट में हुआ ड्रॉ ऑस्ट्रेलिया की 'जीत' और भारत की 'हार' है?
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Updated: March 21, 2017, 6:02 PM IST
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रांची टेस्ट खत्म होने के बाद ऑस्ट्रलियाई कप्तान स्टीवन स्मिथ की खुशी का अंदाज़ा इस बयान से लग जाता है. आखिर किसने ये सोचा था कि धर्मशाला टेस्ट शुरू होने से पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम भी सीरीज़ जीतने की दावेदार होगी? दौरा शुरू होने से पहले ही सौरव गांगुली से लेकर हरभजन सिंह जैसे दिग्गजों ने 4-0 की भविष्याणी करके पहले ही ये तय कर दिया था कि इस कंगारू टीम को तो गंभीरता से लिया ही नहीं जा सकता है.

लेकिन, ऑस्ट्रेलिया की हमेशा से खासियत रही है उनका जुझारू रवैया. भारत दौरे से पहले ही ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्मिथ ने अपनी टीम को ये बता दिया था कि वो सिर्फ हार की औपचारिकता पूरा करने के लिए भारत नहीं जा रहें हैं. स्मिथ ने दौरे से पहले ही अपने युवा खिलाड़ियों को कहा था कि ये दौरा खुद को सर्वाकालीन महान में शामिल करने के दावे को मज़बूत करने का प्लेटफॉर्म साबित होगा. और अब तक सीरीज़ में यही हुआ भी है. अपनी टेस्ट कप्तानी के सुनहरे दौरे से गुज़र रहे विराट कोहली जैसे शेर को पहली बार परेशानी एक मज़बूत कंगारू से हो रही है.

 

अगर धर्मशाला में भी टेस्ट ड्रॉ होता है तो सीरीज बराबरी पर छूटेगी लेकिन बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी पर कब्जा ऑस्ट्रेलियाई टीम का होगा क्योंकि आखिरी सीरीज़ उन्होंने जीती है. लेकिन, अब तक दौरे पर करिश्माई खेल के लिए सिर्फ स्मिथ ही ज़िम्मेदार नहीं है. हर टेस्ट में इस टीम को एक अलग हीरो मिला है. पुणे में स्टीव ओकीफ और मिचेल स्ट्रार्क तो बैंगलोर में नेथन लायन. ग्लेन मैक्सवेल ने रांची टेस्ट में मौके पर चौका नहीं बल्कि छक्का लगाया. कुछ ऐसा ही कमाल दिखाया लंबे समय बाद टेस्ट क्रिकेट में लौटने वाले तेज गेंदबाज पैट कमिंस ने. आलम ये रहा कि सीरीज़ के बेहद प्रभावशाली खिलाड़ी रह चुके स्टार्क की कमी तक मेहमान टीम ने खलने नहीं दी. दरअसल, ऑस्ट्रेलियाई कोच डेरेन लीमन ने अपने खिलाड़ियों को भारत में हो सकने वाली हर तरह की संभावनाओं और मुश्किलों का सामने करने के लिए शानदार योजना बना रखी है.





रांची टेस्ट के चौथे दिन का खेल खत्म होने पर ऑस्ट्रेलिया 2 विकेट गंवा चुका था लेकिन लीमन को भरोसा था कि वो टीम ड्रॉ कराने में सक्षम है. जबकि जनवरी 2016 के बाद से इस टीम ने कभी भी ड्रॉ का नतीजा नहीं देखा था.

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आपको ये याद दिलाना ज़रूरी है कि स्मिथ ने भारत आने से पहले भी ड्रॉ मैच की अहमियत को दोहराया था. उन्हें पता था कि इस दौरे से पहले पिछले 6 टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को लगातार हार मिली थी और ऐसे में ड्रॉ भी कोई बुरा नतीजा नहीं होता है.

कुल मिलाकर देखा जाए तो अब तक सीरीज में कंगारुओं ने कथनी को करनी में बदला है. अपने विरोधी को अपने जुझारू खेल से हक्का बक्का किया है. कहा जा सकता है कि रांची टेस्ट में ड्रॉ का नतीजा ऑस्ट्रेलिया के लिए नैतिक जीत और भारत के लिए मनोवैज्ञानिक तौर पर हार है.

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First published: March 21, 2017
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