जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप: 15 साल बाद मिला मौका, क्या ट्रॉफी उठा पाएगा भारत?

भाषा
Updated: December 17, 2016, 12:35 PM IST
जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप: 15 साल बाद मिला मौका, क्या ट्रॉफी उठा पाएगा भारत?
जीत के अश्वमेधी रथ पर सवार भारतीय टीम पंद्रह बरस बाद जूनियर वर्ल्ड कप हॉकी फाइनल में रविवार को बेल्जियम के खिलाफ उतरेगी तो खिलाड़ी अपनी ...
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Updated: December 17, 2016, 12:35 PM IST
लखनऊ। जीत के अश्वमेधी रथ पर सवार भारतीय टीम पंद्रह बरस बाद जूनियर वर्ल्ड कप हॉकी फाइनल में रविवार को बेल्जियम के खिलाफ उतरेगी तो खिलाड़ी अपनी आक्रामकता और जुझारूपन को बरकरार रखते हुए देशवासियों को अर्से बाद हॉकी के मैदान पर खिताब तोहफे में देने के इरादे से उतरेंगे।

भारत तीसरी बार जूनियर वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा है। इससे पहले 2001 में ऑस्ट्रेलिया के होबर्ट में भारतीय टीम ने अर्जेंटीना को 6-1 से हराकर एकमात्र जूनियर वर्ल्ड कप जीता था। वहीं 1997 में इंग्लैंड में हुए टूर्नामेंट के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हराया था। भारत 11 साल पहले रोटरडम में कांस्य पदक के मुकाबले में स्पेन से पेनल्टी शूटआउट में हार गया था और उस समय भी टीम के कोच हरेंद्र सिंह ही थे।

वहीं हरेंद्र अब 11 साल बाद उस हार के नासूर पर खिताब का मरहम लगाने को बेताब हैं। उनका मानना है कि मानसिक दृढ़ता और जीत की भूख इस बार इन खिलाड़ियों को खाली हाथ नहीं लौटने देगी जो कल अपने कैरियर का सबसे बड़ा मैच खेलेंगे। हरेंद्र ने कहा, हमने अतीत में कई गलतियां की है, लेकिन एफआईएच के कोचिंग कोर्स से मैने बहुत कुछ सीखा और इन खिलाड़ियों पर उसे लागू किया। शारीरिक फिटनेस, दबाव के आगे घुटने नहीं टेकना और मानसिक दृढ़ता यह इस टीम की खासियत है और मुझे नहीं लगता कि अब इसे खिताब जीतने से कोई रोक सकता है।

उन्होंने कहा है कि मैं 2005 में रोटरडम में मिली हार को भूला नहीं हूं। वह हार आज तक मुझे कचोटती है लेकिन मैं टीम से इस बारे में बात नहीं करता। मैंने खिलाड़ियों से सिर्फ इतना कहा कि हमें पदक जीतना है और रंग कौन सा होगा, यह आप तय करो।

भारत ने क्वार्टर फाइनल में 55वें मिनट तक एक गोल से पिछड़ने के बाद स्पेन को हराया और फिर सेमीफाइनल में भी एक गोल से पिछड़ने के बाद वापसी की। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को पेनल्टी शूटआउट मे 4-2 से हराने वाली भारतीय टीम का आत्मविश्वास बुलंद है और सोने पे सुहागा रहा है दर्शकों का अपार समर्थन। मेजर ध्यानचंद स्टेडियम भारत के मैचों में खचाखच भरा रहा है और रविवार को भी भारी तादाद में दर्शकों के जुटने की उम्मीद है।

टीम के मैनजर और सीनियर टीम के मुख्य कोच रोलेंट ओल्टमेंस ने स्वीकार किया कि बेल्जियम की टीम मजबूत है और यह बराबरी का मुकाबला होगा। जूनियर वर्ल्ड कप से पहले वालेंशिया में चार देशों के टूर्नामेंट में भारत को एकमात्र पराजय बेल्जियम के हाथों मिली थी जबकि भारतीय टीम ने खिताब जीता था।

उन्होंने कहा, जो टीम छह बार की चैंपियन जर्मनी और नीदरलैंड को हराकर यहां तक पहुंची है। वह मजबूत तो होगी ही, लेकिन हमारे पास भी बहुत दमदार टीम है। खिलाड़ी फॉर्म में है हालांकि कुछ पहलुओं पर और मेहनत की जरूरत है जो हम कर रहे हैं। भारत के लिए अब तक हर मैच में एक नया खिलाड़ी हीरो बनकर निकला है। लीग चरण में मनदीप सिंह ने उम्दा प्रदर्शन किया तो सेमीफाइनल में गोलकीपर विकास दहिया ने छाप छोड़ी जबकि मिडफील्ड में कप्तान हरजीत सिंह ने लय बनाए रखी है। ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह शुरुआती नाकामियों के बाद फार्म में लौटे हैं। कुल मिलाकर टीम व्यक्तिगत प्रदर्शन की बजाय सामूहिक प्रयासों से जीत रही है जो अच्छा संकेत है।
First published: December 17, 2016
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