भारतीय महिला हॉकी टीम के हौसले बुलंद, 36 साल बाद ले रही है ओलंपिक में हिस्सा

विमल कुमार@Vimalwa | News18India
Updated: August 4, 2016, 12:05 PM IST
विमल कुमार@Vimalwa | News18India
Updated: August 4, 2016, 12:05 PM IST

नई दिल्ली। 36 सालों के लंबे अंतराल के बाद ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली महिला हॉकी टीम रियो में जहां तक भी सफर तय करेगी उनके लिए ये कामयाबी की तरह ही होगी क्योंकि दुनिया की 13वें नंबर की टीम ने जिन मुश्किल परिस्थितियों में ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया है ये ओलंपिक से पहले उनके लिए सबसे बड़ी जीत है।

भारतीय महिला हॉकी टीम का नाम जेहन में आने से हर किसी को सबसे पहले शाहरुख खान की चक दे इंडिया टीम की यादें ताजा हो जाती हैं। इस फिल्म की कामयाबी ने निश्चित तौर पर महिला हॉकी की प्रोफाइल को देश में बदला। आज जब 36 साल के अंतराल के बाद दोबारा महिला टीम ओलंपिक में शिरकत करने पहुंची है तो पुरुष टीम के साथ-साथ इनसे भी बड़ी उम्मीदें बंधने लगी हैं। लेकिन, हकीकत यही है कि इस टीम के लिए असली चुनौती रियो से ही शुरू होती है।

6-6 टीमों वाले दो ग्रपु में भारत के साथ उनके ग्रुप में हर टीम उनसे जबेहतर रैंकिग वाली है। अर्जेंटिना, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, अमेरिका और जापान जैसे देश भारत के ग्रुप में हैं। टीम इंडिया को रियो के लिए क्वालिफाई कराने वाली कप्तान रितु रानी के चयन नहीं होने से काफी विवाद हुआ। बावजूद इस टीम में युवा जोश और अनुभव का तालमेल है।

2013 जूनियर वरल्ड कप में ब्रॉज जिताने में अहम भूमिका निभाने वाली वंदना कटारिया ने अब तक 130 मैचों में 30 गोल किए हैं तो रानी रामपाल के पास 154 मैचों का अनुभव है। लेकिन, आम-तौर पर 18 दलों वाली हॉकी टीम को जब ओलंपिक के लिए सिर्फ 16 खिलाड़ियों को चुनने की मजबूरी आई तो इस टीम के पास गोलकीपर के तौर पर सिर्फ सविता ही हैं।

पूरे 36 साल हो गए भारतीय महिला हॉकी टीम को ओलंपिक में भाग लिए। इन 36 सालों में हॉकी की 2 पीढ़ियां निकल गई। 1980 में मास्को ओलंपिक में 4 टीमों ने शिरकत की थी और अब रियो में टीमों की संख्या 12 तक पहुंच गई है, लेकिन अगर टीम इंडिया मैडल ना भी जीतें और आखिरी 8 में स्थान बनाने में कामयाब हो जाए तब भी इस बड़ी उपलब्द्धि माना जाएगा।

First published: August 4, 2016
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