सरकार पर भड़कीं ओलंपियन पूनम रानी, कहा- ऐसी नौकरी से तो जूते भी नहीं खरीद सकती

नित्यानंद पाठक | News18India.com
Updated: December 14, 2016, 3:58 PM IST
सरकार पर भड़कीं ओलंपियन पूनम रानी, कहा- ऐसी नौकरी से तो जूते भी नहीं खरीद सकती
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नित्यानंद पाठक | News18India.com
Updated: December 14, 2016, 3:58 PM IST

स्पोर्ट्स डेस्क। टैलेंट ऐसा कि सिर्फ 15 साल की उम्र में इंटरनेशनल टीम में हुआ सिलेक्शन। ढेरों मेडल। ओलंपिक में भी टीम इंडिया के लिए खेला। कहने को हरियाणा की शान, लेकिन यहां सरकार ने अब तक न तो अच्छी नौकरी दी और न ही कभी सम्मान किया। हम बात कर रहे हैं इंडियन हॉकी टीम की स्टार फॉरवर्ड पूनम रानी की। news18india.com से हुई खास बातचीत में पूनम ने अपने दर्द बयां किए।

अपने पैसे तो जूते भी नहीं खरीद पाऊं

रेलवे में कमर्शियल क्लर्क के तौर पर जॉब करने वाली पूनम कहती हैं- मुझे दो महीने पहले तक सिर्फ 15 हजार रुपए महीने मिल रहे थे। अब कुछ बढ़े हैं, लेकिन इसके बावजूद मैं एक महीने की पूरी सैलरी भी लगा दूं तो भी अपने लिए खेलने वाले अच्छी क्वालिटी के जूते नहीं खरीद सकती। रिटायरमेंट के बाद तो खेल से पैसे मिलने बंद हो जाएंगे। ऐसे में उन्हीं पैसों का सहारा होगा।

मैं डीएसपी क्यों नहीं बन सकती?

हरियाणा के हिसार की रहने वाली पूनम कहती हैं- हरियाणा पूर्व कांग्रेस सरकार ने तो कितने स्पोर्ट्स स्टार्स को कोटे से डीएसपी सहित कई अच्छे रैंक दिए। खासकर ओलंपियंस के लिए तो बहुत कुछ किया। अब मैं भी ओलंपियन हूं। ढेरों मेडल भी जीते हैं देश के लिए, लेकिन सरकार ने न तो सम्मान किया और न ही कोई अच्छी जॉब ऑफर की। ओलंपिक से वापस आने पर हम सभी से जॉब के लिए हरियाणा सरकार ने ऐप्लिकेशन जरूर लिया था, लेकिन क्या हुआ उसका अब तक पता नहीं चला। समझ नहीं आता मैं डीएसपी क्यों नहीं बन सकती? क्यों मुझे अवॉर्ड नहीं दिया जा सकता?

क्यों ओलंपिक मेडल तक नहीं पहुंच सके हम?

क्यों ओलंपिक मेडल तक नहीं पहुंच सके हम? सवाल के जवाब में ऑस्ट्रेलिया टूर पर मिली 2-1 से हारने वाली टीम की हिस्सा रहीं पूनम कहती हैं- विदेशी टीमें फिट थीं। उनकी स्पीड भी काफी अच्छी थी। वहीं, ऑस्ट्रेलिया टूर पर टीम के 5-6 स्टार खिलाड़ी चोटिल हो गईं थी। इस वजह से हम अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाए। बता दें कि 36 साल बाद भारतीय टीम ने रियो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था, लेकिन मेडल तक नहीं पहुंच सकी। इससे पहले 1980 के मास्को ओलंपिक में खेला था।

नए कोच की तलाश कब होगी पूरी?

इंडियन वुमन हॉकी टीम को नए कोच का इंतजार है। फिलहाल टीम भोपाल के साई सेंटर में हेलन मैरी की कोचिंग में प्रैक्टिस कर रही है। पूनम कहती हैं- नए कोच जल्द ही आ सकते हैं। नाम अभी सामने नहीं आया है। बता दें कि टैरी वाल्श के इस्तीफे के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम के ऑस्ट्रेलियाई कोच नील हागुड ने भी भारतीय हॉकी से नाता तोड़ते हुए इस साल के आखिर में खत्म हो रहे करार के नवीनीकरण से इनकार दिया था। उसके बाद से कोई कोच नहीं बना है।

हागुड के रहते टीम ने किया था रियो के लिए क्वालिफाई

हागुड के कोच रहते भारतीय महिला टीम ने 2013 एशिया कप और 2014 इंचियोन एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज जीता। कॉमनवेल्थ गेम्स में टीम 5वें स्थान पर रही और पिछले साल एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफी में उपविजेता रही। इसके अलावा जूनियर वर्ल्ड कप में पहली बार ब्रॉन्ज मेडल जीता और रियो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया।

First published: December 14, 2016
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