3 साल से संतरे बेच रही है ये नेशनल चैंपियन, अब जगी आस

News18Hindi
Updated: February 15, 2017, 11:00 AM IST
3 साल से संतरे बेच रही है ये नेशनल चैंपियन, अब जगी आस
नेशनल लेवल पर आर्चरी में दर्जनों मेडल्स जीतने वाली वुमन प्लेयर सड़क पर संतरे बेचकर पेट पालने पर मजबूर है.
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Updated: February 15, 2017, 11:00 AM IST
चिरांग (असम). नेशनल लेवल पर आर्चरी में दर्जनों मेडल्स जीतने वाली वुमन प्लेयर सड़क पर संतरे बेचकर पेट पालने पर मजबूर है. ये मामला असम का है. प्लेयर का नाम है बुली बासुमैत्री. वह पिछले तीन साल से चिरांग हाइवे पर संतरे बेचकर अपने फैमिली का जीवन यापन कर रही हैं. उन्होंने सरकार से गुहार भी लगाई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

बासुमैत्री ने बताती हैं- मैंने नेशनल लेवल पर कई मेडल जीते हैं. स्पोर्ट्स कोटे से असम पुलिस में नौकरी के लिए आवेदन भी किया था, लेकिन आज तक पुलिस महकमे में नौकरी नहीं मिल पाई. हालांकि, अब राज्य सरकार की ओर से बासुमैत्री को मदद की बात कही जा रही है. इस बारे में असम के स्पोर्ट्स मिनिस्टर पल्लब लोचन ने का कहना है कि अगले सप्ताह बासुमैत्री को तीरंदाजी का कोच नियुक्त किया जाएगा और बाद में उन्हें कोचिंग की शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग के लिए पंजाब भी भेजा जाएगा.

मजबूरी में छोड़ना पड़ा खेल
2010 में किसी शारीरिक समस्या के कारण बासुमैत्री को तीरंदाजी छोड़नी पड़ी. इसके बाद उनके जीवन में कठिनाइयों का दौर शुरू हो गया और अपने और अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए संतरे बेचने का फैसला लेना पड़ा. बासुमैत्री की दो बेटियां भी हैं, जिनकी क्रमश: उम्र 2 और 3 साल है.

उजागर होता खिलाड़ियों को प्रोत्साहन का सच
ये कहानी बयां करती है कि प्रदेश सरकारें किस तरह सिर्फ खिलाड़ियों के प्रोत्साहन की सिर्फ बात करती हैं. ग्राउंड लेवल पर कुछ और ही होता है. टैलेंटेड खिलाड़ी कई बार गरीबी की वजह से उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते, जिसके लायक होते हैं. अक्सर खिलाड़ी सरकार की बेरुखी का शिकार भी बनते हैं. बासुमैत्री के संतरे बेचने की कहानी खेलों के प्रति सरकारी रवैये की पोल खोलने के लिए काफी है.







First published: February 15, 2017
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