कांग्रेस और सपा की दोस्ती की स्क्रिप्ट लिखेंगी प्रियंका-डिंपल!

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First published: January 14, 2017, 8:18 AM IST | Updated: January 14, 2017, 8:26 AM IST
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कांग्रेस और सपा की दोस्ती की स्क्रिप्ट लिखेंगी प्रियंका-डिंपल!
समाजवादी पार्टी में टूट की पूरी तरह स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है. साइकिल चुनाव चिह्न के लिए अखिलेश और मुलायम गुट का झगड़ा अब चुनाव आयोग तक जा पहुंचा है. ऐसे में चर्चा है कि अखिलेश कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर यूपी के सियासी समर में उतर सकते हैं.

वह साल 2012 की बात थी. अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव कन्नौज से चुनावी मैदान में थी. उस वक्त डिंपल अमूमन कम ही चुनाव प्रचार में रूचि दिखाती थीं. चुनाव प्रचार का जिम्मा उनके पति अखिलेश यादव और ससुर मुलायम सिंह यादव के पास था.

खैर जब नतीजा आया तो डिंपल यादव निर्विरोध कन्नौज से सांसद चुनी गईं. अभी तक के संसदीय इतिहास में केवल 44 सांसद ही निर्विरोध चुने गए थे और यूपी से तो केवल चार. ऐसे में डिंपल की यह जीत काफी मायने रखती थी.

डिंपल की भूमिका बेहद अहम

खैर अब वक्त बदल गया है. उस चुनाव के पांच साल गुजर चुके हैं और वक्त का पहिया भी बहुत घूम चुका है. अब डिंपल यादव में परिपक्व राजनेता की छवि दिखती हैं, जो अखिलेश यादव के साथ हर कदम मिलाकर चलती हैं.

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खासकर इन दिनों पर्दे के पीछे से तो डिंपल की भूमिका बेहद ही अहम हो गई है. अखिलेश यादव अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे हैं. इस बार उनका मुकाबला अपने पिता मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल यादव से है.

समाजवादी पार्टी में टूट तय

यहां तक समाजवादी पार्टी में टूट की पूरी तरह स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है. साइकिल चुनाव चिह्न के लिए अखिलेश और मुलायम गुट का झगड़ा अब चुनाव आयोग तक जा पहुंचा है. ऐसे में चर्चा है कि अखिलेश कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर यूपी के सियासी समर में उतर सकते हैं.

[caption id="attachment_1526400" align="alignnone" width="630"]File Photo: PTI File Photo: PTI[/caption]

चर्चा है कि कांग्रेस और अखिलेश की समाजवादी पार्टी में गठबंधन का जिम्मा प्रियंका गांधी और डिंपल यादव को सौंपा गया है. एनडीटीवी के मुताबिक, गठबंधन को लेकर डिंपल की प्रियंका से मुलाकात भी हो चुकी है. दिलचस्प बात है कि प्रियंका गांधी का कांग्रेस में कोई ओहदा भी नहीं है, लेकिन पार्टी में उनकी दमदार हैसियत किसी से छुपी नहीं है.

राहुल के फैसलों पर प्रियंका की छाप

कांग्रेस की ओर से लिए गए फैसले में उनकी अहम भूमिका होती है. यहां तक कि राहुल और सोनिया गांधी का चुनाव प्रचार भी प्रियंका गांधी के जिम्मे रहता है. चर्चा तो यह भी है कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा में चुनाव प्रचार के लिए एक साथ मंच पर आने की सहमति बन चुकी है.

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कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ने इन अटकलों पर कहा कि प्रियंका गांधी पढ़ी लिखी हैं. विकास को लेकर उनकी अलग सोच है. उनके योगदान को नकारा भी तो नहीं जा सकता है.

कांग्रेस में आम राय नहीं

हालांकि, राहुल गांधी और अखिलेश यादव को साथ लाने को लेकर कांग्रेस में भी अभी तक आम राय नहीं बनी है. गुलाम नबी आजाद जैसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस पहल को इच्छुक नहीं हैं.

यहां तक कि मुलायम सिंह यादव भी इस गठबंधन को लेकर सशंकित हैं और वे तो सार्वजनिक रूप से कई बार ऐसे किसी गठबंधन की संभावना को खारिज कर चुके हैं. यही वजह है कि पर्दे के पीछे से डिंपल और प्रियंका को इस गठबंधन को अमलीजामा पहनाने का जिम्मा सौंपा गया है.

[caption id="attachment_1531169" align="alignnone" width="630"]Photo: PTI Photo: PTI[/caption]

डिंपल का सियासी सफर

वैसे डिंपल यादव समाजवादी पार्टी की चुनावी सभाओं में डिंपल यादव सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं. 1999 में अखिलेश से लव मैरिज के 10 साल बाद डिंपल वह चुनावी मैदान में उतरी.

हालांकि, पहली बार उन्हें राज बब्बर से शिकस्त झेलनी पड़ी. इसके बावजूद डिंपल ने हिम्मत नहीं हारी और 2012 में निर्विरोध सांसद चुनी गईं. 2014 के लोकसभा चुनाव में भी एक बार फिर से वह सांसद चुनी गईं.

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