महंगी बिजली देने वाली इस कंपनी से योगी सरकार ने तोड़ा नाता

News18Hindi
Updated: July 17, 2017, 6:00 PM IST
महंगी बिजली देने वाली इस कंपनी से योगी सरकार ने तोड़ा नाता
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Updated: July 17, 2017, 6:00 PM IST
यूपी सरकार के के निर्देश पर उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन द्वारा हाई प्रोफाइल बजाज एनर्जी के पांच उत्पादन गृहों से पावर परचेस एग्रीमेंट (पीपीए) समाप्त कर दिया है.

पावर कार्पोरेशन द्वारा 90 मेगावाट के 5 उत्पादन गृहों उतरौला, (बलरामपुर), खम्भरखेरा (लखीमपुर खीरी), बरखेड़ा (पीलीभीत), कुन्दर्की (गोण्डा), मकसूदपुर (शाहजहाॅंपुर) जिनकी कुल क्षमता 450 मेगावाट थी के पावर परचेज एग्रीमेन्ट (पीपीए) को समाप्त करने का नोटिस जारी कर दिया है.

18 जुलाई के बाद इन सभी उत्पादन गृहों के पावर परचेज एग्रीमेन्ट से पावर कारपोरेशन मुक्त हो जाएगा. उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि इन पावर हाउसों की मंहगी बिजली के विरोध में लम्बे समय से संघर्ष कर रहा था. सरकार के इस निर्णय का वह स्वागत करते हैं.

अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग से अब मांग की है कि जिसमें उन्होंने बताया कि चूंकि बिजली कम्पनियों द्वारा जो वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) नियामक आयोग में दाखिल किया गया है, उसमें कम्पनियों द्वारा कुल बिजली खरीद की वर्ष 2017-18 के लिए जो औसत लागत निकाली गई है, वह 4.11 रुपए प्रति यूनिट है.

इसमें इन पांचों उत्पादन गृहों से लगभग 1773 करोड़ की बिजली खरीद प्रस्तावित थी, उसकी औसत लागत करीब 7.22 रुपए प्रति यूनिट है. ऐसे में 18 जुलाई के बाद जब इन उत्पादन गृहों का पावर परचेज एग्रीमेन्ट समाप्त हो जायेगा तो आयोग एआरआर में बदलाव कराए. इससे कुल औसत लागत में कमी आयेगी और फायदा उपभोक्ताओं को दिया जाए.

अवधेश वर्मा ने बताया कि पावर कारपोरेशन द्वारा बजाज एनर्जी के पांचों उत्पादन गृहों को अलग-अलग दी गई नोटिस में स्वतः माना है कि इन सभी पावर हाउसों से 7.11 रुपए प्रति यूनिट से लेकर 8.28 रुपए प्रति यूनिट तक बिजली की दर आ रही है, जो बहुत ही अधिक है. उपभोक्ता परिषद ने पावर कारपोरेशन व राज्य सरकार से पुनः यह मांग उठायी है कि ऐसे सभी उत्पादन गृहों के पीपीए खारिज किये जायें जो मंहगी बिजली पैदा कर रहे हैं.
First published: July 17, 2017
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