यूपी फतेह के लिए बीजेपी का ये है कास्ट फार्मूला!

Manish Kumar | ETV UP/Uttarakhand

First published: January 13, 2017, 8:34 AM IST | Updated: January 13, 2017, 12:35 PM IST
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यूपी फतेह के लिए बीजेपी का ये है कास्ट फार्मूला!
Pradesh18

2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा से ज्यादा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि दांव पर लगी है, क्योंकि भाजपा ने मोदी के चेहरे पर ही चुनाव में उतरने का फैसला किया है. देश की राजनीति में चाहे जैसे भी बदलाव देखने को मिले हों लेकिन, यूपी की राजनीति में जातीय समीकरण का ही बोलबाला रहा है. विकास के नाम पर वोट हासिल करने का नारा यूपी की जातीय राजनीति में महज तड़के के बराबर ही है.

भाजपा भी इसे बखूबी समझती है. इसीलिए भाजपा ने यूपी फतह करने के लिए एक विशेष जातीय समीकरण तैयार किया है. लखनऊ के भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय के बाहर लगी होर्डिंग इसकी गवाही देती है.

भाजपा के प्रदेश मुख्यालय के बाहर लगी होर्डिंग पर जिसे अब आचार संहिता लगने के बाद ढ़क दिया गया है, से साफ जाहि्र होता है कि भाजपा किन जातियों के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की फिराक में हैं. इस होर्डिंग की फोटो प्रदेश18 के पास है. देखने से साफ हो जाता है कि भाजपा अगड़ों और अन्य पिछड़ी जातियों के सहारे यूपी चुनाव फतह करना चाहती है.

इस होर्डिंग में एक तरफ नरेन्द्र मोदी, अमित शाह की फोटो लगी है तो दूसरी तरफ राजनाथ सिंह, कलराज मिश्रा, उमा भारती और केशव प्रसाद मौर्य की फोटो लगी है. भाजपा की जातीय रणनीति का खुलासा इन्हीं चार की फोटो से हो जाता है. राजनाथ सिंह और कलराज मिश्रा के सहारे पार्टी अगड़ों यानी ठाकुर और ब्राहमण वोट को हासिल करना चाहती है तो पिछड़ी जातियों के लिए उसने उमा भारती और केशव मौर्य का सहारा लिया है.

य़ूपी में ठाकुरों और ब्राहमणों का वोट प्रतिशत 8-10 फीसदी माना जाता है. भाजपा ये मान रही है कि इन दोनों ही वर्गों का वोट उसे हासिल होगा. अब बात करते हैं पिछड़ी जातियों की. ओबीसी का वोट प्रतिशत यूपी में लगभग चालीस फीसदी माना जाता है. इसमें गैर यादव पिछड़ी जातियों पर पार्टी का सबसे ज्यादा जोर है. उमा भारती लोध जाति से आती हैं. उमा भारती को बुंदेलखण्ड में उतारा गया है, जिन्होंने परिवर्तन यात्रा के जरिये जमकर प्रचार किया है. इसके अलावा केशव प्रसाद मौर्य भी उस मौर्य समाज से आता है जिसका बड़ा वोट प्रतिशत पिछड़ी जातियों के भीतर है. पिछले दिनों भापजा ने कुछ ऐसे कदम उठाये हैं जिससे ये जाहिर होता है कि उसके निशाने पर सबसे ज्यादा ओबीसी के वोट ही हैं.

पिछड़ी जातियों के नेताओं का भाजपा में शामिल होना और उनसे गठबंधन

भारतीय जनता पार्टी ने थोक के भाव से दूसरे दलों के उन नेताओं को पार्टी ज्वाइन करायी है जो ओबीसी से आते हैं. स्वामी प्रसाद मौर्य, छोटे लाल वर्मा और हाल ही में नरेन्द्र कश्यप को भाजपा ने तोड़कर अपने में शामिल किया है. ओबीसी नेताओं को भाजपा में शामिल कराने के साथ ही पार्टी ने उन नेताओं से गठजोड़ भी किया है जो अपने अपने इलाके में ओबीसी का प्रतिनिधित्व करते हैं. अपना दल की अनुप्रिया पटेल को तो नरेन्द्र मोदी ने कैबिनेट मंत्री बना दिया. प्रतापगढ़, इलाहाबाद, कौशाम्बी,मिर्जापुर, कानपुर देहात जैसे जिलों में पटेल समाज बड़ी तादात में हैं. इसके अलावा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से भी भाजपा ने गठबंधन किया है. इस पार्टी की मजबूत पकड़ बलिया, मऊ, गाजीपुर और आजमगढ़ में मानी जाती है. सुहेलदेल भारतीय समाज पार्टी को भाजपा ने कितना भाव दिया इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अमित शाह खुद मऊ आये थे जब गठजोड़ फाइनल किया गया था.

पिछड़ी जातियों में वो जातियां बहुत अहम हैं जिनका प्रतिनिधित्व यूपी की राजनीति में नहीं दिखाई देता है. इनमें मुख्य तौर पर सत्रह जातियों का जिक्र आता है. इनकी संख्या किसी एक विधानसभा क्षेत्र में बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन इतनी जरूर है कि दो तीन जातियां एक ही पार्टी को वोट कर दें तो सीट पक्की हो जाती है. केवट, कश्यप, कहार, मल्लाह, निषाद, गोंड जैसी सत्रह जातियां यूपी में अति पिछड़ी जातियां मानी जाती है. इनपर भाजपा का बहुत जोर है. भाजपा ने इन जातियों को लुभाने के लिए कई लोगों को संगठन में अहम ओहदा दिया है. इसके साथ ही भाजपा यूपी में दो सौ से ज्यादा पिछड़ा वर्ग सम्मेलन भी कर चुकी है.

लोक सभा चुनावों में जीत का एडवांटेज

इस जातीय समीकरण के अलावा भाजपा को बड़ा फायदा लोकसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के जरिये भी मिलने की उम्मीद है. बता दें कि दो साल पहले हुए लोकसभा के चुनाव में भाजपा को यूपी की अस्सी सीटों में से 71 सीटों पर जीत मिली थी. इन 71 लोकसभा की सीटों में विधानसभा की 328 सीटें आती हैं. यानी 80 फीसदी सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी. लोकसभा के चुनाव में यूपी में भाजपा को 40 फीसदी वोट मिले थे. हालात कितने भी भाजपा के खिलाफ हो जायें तो भी उसका वोट प्रतिशत 25 फीसदी से नीचे नहीं जायेगा. यूपी में 25 से 30 फीसदी वोट पाने वाली पार्टी बहुमत से सरकार बनाती रही है. ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि उसका वोट प्रतिशत तीस फीसदी से उपर ही रहेगा.

यूपी में भाजपा के मीडिया प्रभारी मनीष शुक्ला का कहना है कि पार्टी का मानना है कि समाज के निचले तबके तक जब तक विकास नहीं पहुंचेगा तब तक देश का विकास सम्भव नहीं है. मनीष शुक्ला ने ये भी कहा कि पिछड़ी जातियों में भी अति पिछड़ी जातियों को भरपूर लाभ नहीं मिल पाया है. भाजपा उन्हें इसका लाभ देने के लिए प्रतिबद्ध है.

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