दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद साइकिल' को लेकर चुनाव आयोग ने फैसला रखा सुरक्षित

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First published: January 13, 2017, 6:06 PM IST | Updated: January 13, 2017, 6:09 PM IST
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दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद साइकिल' को लेकर चुनाव आयोग ने फैसला रखा सुरक्षित
चुनाव आयोग में शुक्रवार को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और अखिलेश गुट की तरफ से साइकिल सिम्बल को लेकर दी गई दलील पूरी हो गई है. वहीं चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया है.

चुनाव आयोग में शुक्रवार को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और अखिलेश गुट की तरफ से साइकिल सिम्बल को लेकर दी गई दलील पूरी हो गई है. वहीं चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया है.

बता दें, कि सुनवाई के पहले हिस्से में अखिलेश यादव के खेमे ने अपनी बात रखी. जिसमें उन्होंने दो तिहाई बहुमत का हवाला देते हुए ‘साइकिल’ पर दावा पेश किया.

वहीं दूसरे हिस्से में मुलायम सिंह ने अपना पक्ष रखा, उनका तर्क है कि चिन्ह पर राष्ट्रीय अध्यक्ष का अधिकार होता है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद चुनाव आयोग ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है. चुनाव आयोग में अखिलेश यादव का पक्ष रखने के लिए सीनियर वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने साइकिल के निशान पर अखिलेश गुट को दिए जाने की मांग की.

उन्होंने सिंबल आदेश के सेक्शन 15 का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी में प्रतिनिधि, विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों का दो तिहाई से ज़्यादा बहुमत हमारे साथ है इसलिए चिन्ह हमें दिया जाए.

किसके हिस्से, कौन सा सिंबल?

मुलायम खेमे ने जहां राष्ट्रीय लोकदल और इसके चुनाव निशान (हल जोतता किसान) का विकल्प आजमाने की तैयारी की है. अखिलेश खेमे की कोशिश है कि यदि उनका साइकिल से मिलता जुलता नाम मोटरसाइकल भी ना मिल पाने की स्थिति में वे बरगद के निशान पर चुनाव मैदान में उतर सकते हैं.

दरअसल, सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने राम गोपाल यादव पर भाजपा से मिलकर सपा को तोड़ने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि अपने पुत्र और बहू को सीबीआई से बचाने के लिए राम गोपाल यादव भाजपा से मिलकर सपा को तोड़ रहे हैं.

चुनाव चिह्न पर दावे के अपने अपने तर्क

मुलायम गुट का दावा है कि पार्टी की स्थापना मुलायम सिंह यादव ने की है. चुनाव चिह्न साइकिल पर उनके हस्ताक्षर हैं, इसलिए ये उन्हें मिलना चाहिए. अखिलेश धड़े का दावा है कि पार्टी के 90 प्रतिशत सांसद, विधायक और पदाधिकारी उनके साथ हैं, इसलिए चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम पर उनका हक है.

 

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