'अंशकालिक शिक्षकों पर सरकार का निर्णय अच्छा कदम'

Sudhir Bhatt | ETV UP/Uttarakhand

First published: January 11, 2017, 11:34 AM IST | Updated: January 11, 2017, 6:46 PM IST
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'अंशकालिक शिक्षकों पर सरकार का निर्णय अच्छा कदम'
श्रीनगर गढ़वाल स्थित गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय में वर्षों से कार्यरत डेढ़ सौ से अधिक अंशकालिक शिक्षकों की यूनिवर्सिटी में नियमित होने की मुराद आज तक जहां पूरी नहीं हो सकी है. वहीं इनमें से कुछ शिक्षकों को श्रीदेव सुमन राज्य विवि में संविदा पर लिये जाने के सरकार के फैसले को विवि प्रशासन ने अच्छा कदम बताया है.

श्रीनगर गढ़वाल स्थित गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय में वर्षों से कार्यरत डेढ़ सौ से अधिक अंशकालिक शिक्षकों की यूनिवर्सिटी में नियमित होने की मुराद आज तक जहां पूरी नहीं हो सकी है. वहीं इनमें से कुछ शिक्षकों को श्रीदेव सुमन राज्य विवि में संविदा पर लिये जाने के सरकार के फैसले को विवि प्रशासन ने अच्छा कदम बताया है.

विवि कुलपति प्रो. जेएल कौल का कहना है कि ऐसे में जबकि एक दो विषयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए जारी विज्ञप्ति में गढ़वाल विवि को बड़ी संख्या में आवेदन मिले हैं, तो ऐसी स्थिति में अंशकालिक शिक्षकों के लिए परेशानी होती है. लेकिन राज्य सरकार के इस निर्णय से विवि प्रशासन की दिक्कतें कम होंगी.

उनका कहना है कि ये एक सकारात्मक कदम है, क्योंकि विवि में कार्यरत अंशकालिक शिक्षक वर्षों से से कार्यरत हैं. यदि आज भी उनको नियत वेतन पर संविदा में नियुक्ति मिलती है, व जल्द अथवा कुछ समय बाद उन्हें स्थायी नियुक्ति मिलने की संभावना है तो ये बहुत ही अच्छा कदम है.

उनका कहना है कि जैसी उन्हें जानकारी मिली है कि एक या दो विषयों में रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन दिये जाने के बाद 1400 आवेदन मिले हैं. ऐसे में हमें वो भी देखना पड़ेगा, लेकिन यदि विवि में कार्यरत अंशकालिक शिक्षकों को राज्य सरकार ये अवसर दे रही है तो ये उनके भविष्य के लिए बहुत अच्छा अवसर है.

गौरतलब है कि राज्य में चुनाव आचार संहिता से पूर्व राज्य सरकार ने गढ़वाल विवि के 52 अंशकालिक शिक्षकों को श्रीदेवसुमन राज्य विवि में बतौर संविदा लिये जाने का निर्णय लिया था. हालांकि ये सभी शिक्षक विवि में सबसे ज्यादा लम्बे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं. हर वर्ष इनके कार्यकाल का नवीनीकरण कर फिर से सेवा में एक वर्ष के लिए रख लिया जाता है.

खास बात यह भी है कि वर्ष 2009 में गढ़वाल विवि के राज्य विवि से केन्द्रीय विवि बनने के बाद विवि में कार्यरत अंशकालिक शिक्षकों की सुध ही नहीं ली गई. यही कारण है कि पहले राज्य विवि और फिर केन्द्रीय विवि में इन शिक्षकों के लिए नियमितीकरण की राह भी ना खत्म होने वाला इंतजार बन गया.

प्रदेश में चुनाव की तिथियों की घोषणा से ऐन पहले भले राज्य सरकार द्वारा लिया गया निर्णय चुनाव के बाद ही क्रियान्वित होने की ओर फैसले की तरह तेजी से बढ़ेगा या नहीं, ये तो अलग बात है लेकिन इसने अंशकालिक शिक्षकों के लिए अंधेरे में उम्मीद की एक मजबूत किरण तो दिखा ही दी है.

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