विधायक निधि के दुरुपयोग मामले में दोषी अफसरों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर

Mukesh Kumar | ETV UP/Uttarakhand

First published: January 14, 2017, 3:03 PM IST | Updated: January 14, 2017, 3:03 PM IST
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विधायक निधि के दुरुपयोग मामले में दोषी अफसरों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर
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नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हरिद्वार में विधायक निधि के दुरुपयोग मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. जस्टिस राजीव शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दोषी अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया है.

हरिद्वार निवासी दिनेश चंद्र जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हरिद्वार में 11 जगहों पर पुस्तकालय और वाचनालय बनाने में विधायक निधि का दुरुपयोग किया गया है. लैंड-यूज बदले बिना ही आश्रमों और निजी स्थानों पर विधायक मदन कौशिक की निधि से लाइब्रेरी बनवा दी गई, जो धन का दुरुपयोग है.

याचिकाकर्ता ने इससे पहले 27 सितम्बर 2011 को मुख्यमन्त्री हरीश रावत से भी शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई. लोकायुक्त को शिकायत करने के बाद जांच हुई तो गड़बड़ी का खुलासा हुआ.

3 जुलाई 2012 को जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि नियमों के हिसाब से लाइब्रेरी का निर्माण नहीं हुआ है. जांच रिपोर्ट में आईपीसी की धारा 409 व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत इंजीनियर अरविन्द मोहन गर्ग के खिलाफ एफआईआर की संस्तुति की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

15 अक्टूबर 2012 को लोकायुक्त ने डीएम की अध्यक्षता में जांच समिति बनाने का आदेश सचिव ग्रामीण विकास विभाग को दिया. जांच 25 मार्च 2013 को पूरी तो हुई, लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई. हद तो ये है कि लाइब्रेरी निर्माण के बाद भी सरकारी विभाग या नगर निगम को नहीं सौंपी गई.

जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक माह के भीतर विधायक मदन कौशिक की विधायक निधि से बनाए गए सभी पुस्तकालय एक माह के भीतर नगर निगम के सुपुर्द करने का आदेश राज्य सरकार को दिया है. कोर्ट ने ये भी कहा है कि राज्य सरकार इन पुस्तकालयों में जरूरी पुस्तकें और समाचार पत्र मुहैय्या कराने के लिये पर्याप्त बजट भी दे.

लोकायुक्त की सिफारिश के मुताबिक, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इंजीनियर अरविन्द मोहन गर्ग और अन्य दोषी अधिकारियों के खिलाफ तीन हफ्ते के भीतर आईपीसी की धारा 409 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश भी दिया है.

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