चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं के गांव में घुसने पर ग्रामीणों ने लगाई पाबंदी

Saurabh Singh | ETV UP/Uttarakhand

First published: January 13, 2017, 10:21 PM IST | Updated: January 13, 2017, 10:21 PM IST
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चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं के गांव में घुसने पर ग्रामीणों ने लगाई पाबंदी
आक्रोशित ग्रामीणों ने इस बार नेताओं को सबक सिखाने की ठान ली है और नेताओं के गांव में घुसने पर पाबंदी लगा दी है.

नेताओं के झूठे वायदों से परेशान टिहरी झील प्रभावित नंदगांव के ग्रामीणों ने इस बार उन्हें सबक सिखाने की ठान ली है. चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी नेता के गांव में घुसने पर पाबंदी लगा दी है. साथ ही चेतावनी दी है कि यदि कोई नेता गांव में आता है और झूठे वायदे करता है तो उसका विरोध किया जाएगा.

टिहरी झील के पानी के उतार चढ़ाव के चलते नंदगांव में भारी भूस्खलन और भूधसांव होने पर वर्ष 2002 में 97 परिवारों को का पूर्णरूप से विस्थापन किया गया. करीब 47 परिवार आंशिक डूब क्षेत्र की श्रेणी में आए.

झील के कारण लगातार हो रहे भूस्खलन और भूधसांव से इन 47 परिवारों पर भी खतरा बढ़ने लगा है. मकानों में दरारें बड़ी हो गई और कई मकान पूरी तरह जंमीदोष हो गए. कृषि भूमि में धसाव के चलते ग्रामीणों को अपने खेत छोड़ने पड़े.

विस्थापन की मांग कर रहे कर रहे ग्रामीणों ने धरने प्रदर्शन, चक्का जाम, भूख हड़ताल की, लेकिन मिला तो सिर्फ आश्वासन. हर वर्ष चुनाव के समय में भी नेता गांव के ग्रामीणों से वायदे करचे हैं कि चुनाव जीतने के बाद उनका विस्थापन सबसे पहले होगा, लेकिन जीतने के बाद नेता कभी गांव कि तरफ झांकने भी नहीं आते हैं.

ग्रामीणों को आश्वासन पर आश्वासन जरूर दिए गए, लेकिन किसी ने उनकी पीड़ा को नहीं समझा. अब एक बार फिर से चुनावी मौसम शुरू हो गया है तो नेताओं को भी अपने वायदे याद आने लगे हैं.

नंदगांव विस्थापन संघर्ष समिति के अध्यक्ष सोहनसिंह राणा का कहना है कि आक्रोशित ग्रामीणों ने इस बार नेताओं को सबक सिखाने की ठान ली है और नेताओं के गांव में घुसने पर पाबंदी लगा दी है.

टिहरी झील से सटे नंदगांव ही नहीं रोलाकोट, भटकंडा, पिपोला, गोजियाणा, तुणेठा सहित 17 गांव एसे हैं, जहां झील के पानी के उतार चढ़ाव से भारी भूस्खलन और भूधसांव हो रहा है. इस कारण से ग्रामीण विस्थापन की मांग कर रहे हैं. लेकिन क्या नेता, क्या अधिकारी ग्रामीणों को सिर्फ मिला तो आश्वासन और वर्षों बाद भी उनका पुर्नवास नहीं हुआ.

वहीं पुर्नवास निदेशक इंदुधर बौड़ाई का कहना है कि नंदगांव के पुर्नवास की प्रक्रिया वरीय स्तर पर लंबित है और वहीं से दिशा निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

चुनावों में नेता भले ही कितने भी वायदे कर ले लेकिन हकीकत में कितने वायदे पूरे किए जाते हैं ये जनता जानती है. झील प्रभावित नंदगांव के ग्रामीणों ने इस बार नेताओं को सबक सिखाने और अब अपनी पीड़ा को बताने के लिए चुनाव ही नहीं नेताओं का भी बहिष्कार कर दिया है.

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