आतंकी मसूद अजहर का साथ देने पर चीन ने किया बचाव, अपनी सफाई में दिया ये बहाना

भाषा

Updated: February 9, 2017, 12:01 AM IST
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आतंकी मसूद अजहर को बैन करने के यूएन के प्रस्ताव को नामंजूर करने वाले चीन ने अब इस पर सफाई पेश की है. चीन ने बुधवार को कहा कि उसने अमेरिका के इस कदम को संयुक्त राष्ट्र में इसलिए रोक दिया, क्योंकि इस कदम का समर्थन करने की शर्तें पूरी नहीं हो पाई थीं. पठानकोट हमले के मुख्य आरोपी मसूद पर प्रतिबंध लगाने के लिए भारत पहले भी यूएन में पहल कर चुका है, लेकिन चीन ने हर बार आतंकी का साथ दिया है.

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आतंकी मसूद अजहर का साथ देने पर चीन ने किया बचाव, अपनी सफाई में दिया ये बहाना
आतंकी मसूद अजहर को बैन करने के यूएन के प्रस्ताव को नामंजूर करने वाले चीन ने अब इस पर सफाई पेश की है.

बीजिंग ने कहा कि उसने अमेरिका के प्रस्ताव को इसलिए वीटो कर दिया, ताकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा व्यापक रूप से स्वीकार्य किसी उचित निर्णय पर पहुंचने के लिए सभी पक्षों पर चर्चा करन का पूरा समय मिल जाए. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा कि सुरक्षा परिषद की 1267 कमेटी ने पिछले साल इस मुद्दे पर चर्चा की थी, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया था क्योंकि सुरक्षा परिषद के सदस्यों की इस मुद्दे पर अलग-अलग राय था. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने फिर से आवेदन दाखिल किया, लेकिन अभी भी आवश्यक शर्तें पूरी नहीं हो पाईं, जिससे कि कमेटी किसी सहमति पर पहुंचे और कोई निर्णय ले सके.

लू ने कहा कि उनके देश का निर्णय सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव और कमेटी के नियमों के अनुरूप है. ये पूछे जाने पर कि क्या चीन के इस कदम से भारत-चीन संबंधों पर असर पड़ेगा? लू ने कहा कि सुरक्षा परिषद और इसकी सहयोगी संस्थाओं के अपने नियम और प्रक्रियाएं हैं. मैं आशा करता हूं कि कमेटी के सभी सदस्य आवेदनों से निपटने में इन नियमों के अनुरूप काम करेंगे, चाहे आवेदक कोई भी हो. उन्होंने बताया है कि चीन और भारत ने भी इस मुद्दे पर विचारों के आदान-प्रदान किए हैं और मुझे नहीं लगता कि इससे भारत-चीन संबंध प्रभावित होंगे.

गौरतलब है कि पिछले साल चीन ने मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादियों की संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल किए जाने के भारत के प्रस्ताव को तीन बार खारिज कर दिया था. पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन, जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख अजहर को पिछले वर्ष पठानकोट वायुसेना अड्डे पर हुए हमले और जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना के शिविर पर हुए हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है.

First published: February 8, 2017
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