अजहर मसूद को बचाकर चीन साध रहा एक तीर से कई निशाना, ये है चाल!

News18India

Updated: January 8, 2017, 10:43 PM IST
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नई दिल्ली। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अज़हर। ये शख्स और इसका संगठन आतंक की दुनिया का वो नाम है, जिसकी खूनी साजिशों ने भारत ही नहीं बल्कि ब्रिटेन तक में आतंक मचाया है। लेकिन आतंक के इस खौफनाक चेहरे से चीन को प्यार है। चीन इसे आतंकी मानता ही नहीं। चीन ने पहले 31 मार्च 2016 और फिर 30 दिसंबर 2016 को मसूद अजहर को सुरक्षा परिषद से आतंकी घोषित कराने की भारत की पहल में अड़ंगा लगा दिया। हैरानी की बात ये है कि 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में भारत को 14 देशों का समर्थन मिल रहा है, लेकिन अकेला चीन वीटो कर देता है। सिर्फ़ चीन भारत के ख़िलाफ़ है जबकि सुरक्षा परिषद में सऊदी अरब जैसे देश भी भारत के साथ हैं।

अमेरिका को जवाब

चीन के एक आतंकी को बचाने के पीछे कई चाल हैं। मसूद अजहर जैसे आतंकी को बचाने के पीछ चीन की सबसे बड़ी चाल अमेरिका को जवाब देना है। क्योंकि भारत और अमेरिका की नज़दीकियों के बढ़ने से अब चीन एक ऐसा समूह तैयार करना चाहता है, जिससे वो अमेरिका के मुकाबले खड़ा हो सके। इसलिए वो मसूद अजहर को बचा कर भारत और अमेरिका दोनों पर निशाना साध रहा है। हाल के दिनो में रूस और पाकिस्तान के रिश्ते भी मजबूत हुए हैं। ऐेसे में चीन चाहता है कि पाकिस्तान को अफगानिस्तान में बड़ी भूमिका दिलाई जाए, ताकि अमेरिका के खिलाफ एक गुट तैयार हो और पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग होने से बचाया जा सके।

पाकिस्तान के एहसान

अपने तरीकों से जहां एक तरफ  चीन अमेरिका के खिलाफ एक गुट खड़ा करने की कोशिश कर रहा है तो  दूसरी ओर वो भारत की तरक्की के रास्ते में रोड़ा भी डालने की चाल चल रहा है। भारत जिस तरह से एशिया में अब महाशक्ति बनता जा रहा है, उसने चीन को डरा दिया है क्योंकि उसे लगता है कि एशिया में अगर कोई उसके बराबर खड़ा होता है तो उसका असर कमजोर पड़ने लगेगा। मसूद अजहर को बचाने की एक बड़ी वजह ये भी है वो पाकिस्तान के एहसान का बदला चुका रहा है, क्योंकि चीन के शिनचियांग में उइगुर मुसलमानों पर अत्याचार की लगातार खबरें आती रही है। इसके बाद भी पाकिस्तान ने इस्लामिक देशों के समूह OIC में चीन का जमकर बचाव किया है। अब पाकिस्तान के आतंकी मसूद अजहर को बचाकर चीन उन एहसानों का बदला चुका रहा है।

आर्थिक कॉरिडोर

चीन और पाकिस्तान के बीच बन रहा आर्थिक कॉरिडोर भी मसूद अजहर को बचाने की एक बड़ी वजह है। ये प्रोजेक्ट चीन के काशगर को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जोड़ेगा। इसके बीच रेल और सड़क दोनों बनाई जा रही है। 50 बिलियन डॉलर का ये प्रोजेक्ट चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए काफी अहमियत रखता है। चीन को डर है कि अगर वो आतंकी मसूद अजहर जैसे लोगों के खिलाफ प्रस्ताव का पास कराता है तो पाकिस्तान के आतंकी संगठन इस परियोजना के खिलाफ हो सकते हैं।

दलाई लामा का बदला

बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा को भारत ने शरण दे रखी है। चीन हमेशा दलाई लामा पर भारत के रुख से नाराज रहता है। आतंकी मसूद अजहर का मामला सामने आने पर उसे भारत से दलाई लामा मामला का बदला लेने का सुनहरा मौका मिल गया है। जानकार मानते हैं कि वो इस तरह भारत को संदेश देना चाहता है।

ये है चीन की सफाई

दुनिया भर मे चीन की इस बारे में आलोचना शुरु हुई तो चीन सरकार ने इस बारे में सफाई तक दी। उसका कहना है कि हमने मसूद अज़हर के मामले में एक पेशेवर, ज़िम्मेदार और सकारात्मक भूमिका निभाई। इस मामले पर सदस्यों की राय अलग अलग थी। इसलिए इसे रोकने का मकसद विचार विमर्श के लिए और वक्त लेना है। चीन भले ही ये सफाई दे रहा है, लेकिन उसने पहली बार प्रस्ताव का विरोध नहीं किया, बल्कि दूसरी बार ये हरकत की है। उसका मकसद साफ है। वो मसूद अजहर को बचा कर एक साथ कई फायदे ले रहा है।

पाकिस्तान पर बढ़ता दबाव

मौलाना मसूद अजहर को अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से आतंकी घोषित किया जाता तो इससे पाकिस्तान पर भी दबाव बढ़ जाता। साथ ही उस पर इस बात का भी दवाब बढ़ जाता कि वो मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करे। मसूद अज़हर ने भारत में संसद हमला, पठानकोट एयरबेस पर हमला जैसे दर्जनों हमलों की साजिशें रची हैं। ऐसे में उसके आतंकी घोषित होते ही पाकिस्तान पर इन सभी मामलों में कार्रवाई का दबाव और बढ़ जाता।

चीन का दोहरा चेहरा

मसूद अजहर का साथ देने से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में चीन का दोहरा चेहरा दुनिया के सामने आ चुका है। उसके इस रुख से दुनिया में उसकी बदनामी तो हो ही रही है, उसके अपने देश में भी इसके खिलाफ आवाज उठ रही है। भारत में सेवाएं दे चुके चीन के एक पूर्व चीनी राजनयिक माओ सिवेई ने कहा है कि चीन को अपने रुख में बदलाव करना चाहिए।

First published: January 8, 2017
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