मुस्लिम देशों की एंट्री पर बैन: आतंक रोकना नहीं, कुछ और ही है ट्रंप का मकसद!

News18Hindi

Updated: January 29, 2017, 11:46 AM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले आदेश से ही पूरी दुनिया में अपने खिलाफ विरोध का झंडा बुलंद कर दिया है.

ट्रंप के इस आदेश से सीरिया समेत सात मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमेरिका में घुसने पर प्रतिबंध लग गया है. अब सीरिया, सूडान, इराक, ईरान, सोमालिया, यमन और लीबिया के नागरिक अनिश्चितकाल के लिए अमेरिका नहीं आ सकेंगे. ट्रंप के इस आदेश के बाद से उनकी काफी आलोचना की जा रही है.

मुस्लिम देशों की एंट्री पर बैन: आतंक रोकना नहीं, कुछ और ही है ट्रंप का मकसद!
PIC : AFP

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वाशिंगटन पोस्ट में छपी एक खबर के मुताबिक, ट्रंप ने जिन सात देशों पर प्रतिबंध लगाया है, उनमें एक बात कॉमन है. इन सातों ही देशों के साथ अमेरिका के कोई व्यापारिक हित नहीं जुड़े हैं. इस आदेश के अनुसार, सीरिया, ईरान, इराक, यमन, सूडान, सोमालिया और लीबिया के नागरिक अगले 90 दिनों तक अमेरिका में नहीं आ सकेंगे.

दूसरी ओर ट्रंप ने इस सूची में कुछ ऐसे देशों को छोड़ दिया है, जहां अमेरिका के व्यापारिक हित जुड़े हैं और वे देश लगातार आतंकवाद जैसे मुद्दों का सामना भी कर रहे हैं. मिस्र ऐसा ही एक देश है. आतंकवाद को झेल रहे इस देश के अमेरिका से व्यापारिक संबंध हैं. अमेरिका में ट्रंप के इस फैसले को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. लोग पूछ रहे हैं कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने यह फैसला व्यापारिक हितों को देखते हुए लिया है?

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सिटिजन्स फॉर रिस्पोंसिबिलेटी एंड इथिक्स इन वाशिंगटन में प्रवक्ता जोर्डन लिबोविट्ज का कहना है, राष्ट्रपति ट्रंप को अब व्यापार से बाहर आकर सोचना पड़ेगा, वरना उनके लिए गए हर फैसले पर लोग सवाल उठाएंगे और सोचेंगे कि क्या ये फैसला अमेरिका की जनता के लिए लिया गया है या अपने व्यापार और स्वार्थों को पूरा करने लिए.

इस ग्रुप के चेयरमेन और पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के इथिक्स एडवाइजर नोर्म आइसन ने अपने एक ट्वीट में कहा था- 'सावधान मिस्टर राष्ट्रपति, मुस्लिम देशों पर प्रतिबंध में आपने कुछ ऐसे देशों को छोड़ दिया है, जहां आपके व्यापारिक हित हैं. यह संविधान का उल्लंघन है. आपसे कोर्ट में मुलाकात होगी.'

हालांकि, ट्रंप ने यह कहा भी कहा था कि उन्होंने रियल एस्टेट, लाइसेंसिंग और मर्चेंडाइसिग बिजनेस अपने बड़े बेटे को सौंप दिए हैं, ताकि किसी को यह गलतफहमी ना रहे कि मैं राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठकर अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए फैसले ले रहा हूं. आश्चर्य की बात है कि कंपनी का स्वामित्व अभी भी ट्रंप के ही हाथ में है. इसका सीधा सा अर्थ है कि यदि उनके कार्यकाल में कंपनी को कामयाबी मिलती है तो इसका लाभ उन्हें ही मिलेगा.

ट्रंप के इस नए आदेश में तुर्की का भी कोई जिक्र नहीं है. गौरतलब है कि तुर्की में भी पिछले कुछ समय से लगातार आतंकवादी हमले हो रहे हैं, लेकिन प्रतिबंधित सूची वाले देशों में तुर्की का भी नाम नहीं है.

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इन देशों में पाकिस्तान का नाम न देखकर हैरानी होती है. पिछले कुछ दशकों से पाकिस्तान लगातार आतंक और आतंकवादियों की सरपरस्ती कर रहा है, लेकिन इन सात देशों में पाकिस्तान का नाम नहीं है. हालांकि, कहा गया है कि इस सूची में पाकिस्तान को जल्द शामिल किया जा सकता है. लेकिन जानकारों का कहना है कि जिन देशों पर प्रतिबंध लगाया गया है, वे ऐसे देश हैं जिनसे अमेरिका के कोई व्यापारिक रिश्ते नहीं है.

इन देशों के नागरिकों के अमेरिका आने या न आने से अमेरिका को व्यापारिक हितों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. जबकि, पाकिस्तान और इस सूची में शामिल नहीं होने वाले कुछ अन्य मुस्लिम देशों से अमेरिका के व्यापारिक हित जुड़े हैं. पाकिस्तान में तो अमेरिका लगातार निवेश करता रहा है. अफगानिस्तान भी इन सात देशों में शामिल नहीं हैं. साफ है कि ट्रंप के लिए व्यापार पहली प्राथमिकता है. ट्रंप के इस फैसले का पूरी दुनिया में विरोध हो रहा है. इसे अमेरिकी सिद्धांतों के खिलाफ कहा जा रहा है.

First published: January 29, 2017
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