पाक में हाफिज सईद नजरबंद, इसके पीछे ट्रंप नहीं बल्कि चीन का दबाव था

Updated: February 2, 2017, 6:08 PM IST
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पूरी दुनिया में खबर आई कि आतंकवादी हाफिज सईद को पाकिस्तान में नजरबंद कर दिया गया है. ज्यादातर लोगों को यही मानना है कि उसके नजरबंद किये जाने के पीछे अमेरिका का दबाव है. पर असलियत कुछ और ही है. पाकिस्तानी अखबार द डॉन के मुताबिक हाफिज सईद को नजरबंद अमेरिकी नहीं चीन के दबाव में किया गया है.

हाफिज सईद को इस बार से पहले मुंबई अटैक के बाद दिसंबर 2008 में भी नजरबंद किया गया था, इसके बाद उसे फिर सितंबर 2009 में पकड़ा गया था लेकिन दोनों ही मामले में उसे बरी कर दिया गया. हाल के सालों में व​ह लाहौर में खुलेआम घूमता था और रैलियां करता था.

पाक में हाफिज सईद नजरबंद, इसके पीछे ट्रंप नहीं बल्कि चीन का दबाव था
पूरी दुनिया में खबर आई कि आतंकवादी हाफिज सईद को पाकिस्तान में नजरबंद कर दिया गया है. ज्यादातर लोगों को यही मानना है कि उसके नजरबंद किये जाने के पीछे अमेरिका का दबाव है. पर असलियत कुछ और ही है. पाकिस्तानी अखबार द डॉन के मुताबिक हाफिज सईद को नजरबंद अमेरिकी नहीं चीन के दबाव में किया गया है.

फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि पाकिस्तान सरकार ने उसे नजरबंद कर दिया? सवाल सबके मन में उठा और मीडिया ने यही कहा कि ये अमेरिकी सरकार के दबाव का असर है. पर पाकिस्तानी अखबार द डॉन के मुताबिक ओबामा सरकार के समय और नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पद भार ग्रहण करने के बाद भी आतंकवाद के खिलाफ तो बोला ही जाता रहा है लेकिन इसका हाफिज सईद की नजरबंदी से कोई मेल नहीं. दरअसल ये चीन के दबाव का असर है. द डॉन के मुताबिक अमेरिका का भारत की ओर बढ़ते झुकाव के बीच पाकिस्तान लगातार चीन से दोस्ती की जड़ें मजबूत करने में लगा है.

अखबार ने कहा कि ट्रंप सरकार और नए राष्ट्रपति के पास पाकिस्तान से ज्यादा तमाम जरूरी मुद्दे हैं प्राथमिकता के आधार पर काम करने के लिए. इसके अलावा पाकिस्तान पर अगर बाहरी दबाव काम भी करेगा तो वो वॉशिंगटन के बजाए बीजिंग का करेगा. अखबार ने इसका भी जिक्र किया कि चीन के एक पूर्व काउंसलर जनरल ने कोलकाता में एक ब्लॉग पोस्ट में कहा था कि चीन को भारत के उस प्रयास की ओर एक बार फिर सोचना चाहिए जिसमें वह मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंध लगाने की मांग उठा रहा है.

चीन—पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर दोनों ही देशों के लिए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है. भले ही हाफिज सईद चीन के लिए सीधा खतरा न हो लेकिन इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए वह ये जरूर चाहता है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ सक्रियता से कार्रवाई करे. हाल ही में पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ एक आॅपरेशन में चीन के निर्णय को प्राथमिकता दी गई थी. चूंकि इन आतंकियों ने चीनी निवेशकों और श्रमिकों को धमकी दी थी.

हालांकि अखबार ने लेख के अंत में समीक्षात्मक रूप से ये भी लिखा है कि अगर चीन के दबाव में हाफिज सईद पर कार्रवाई की बात मान भी लें तो सवाल यही उठता है कि आखिर इस वक्त क्यों? ये काम कुछ महीने पहले क्यों नहीं किया गया? इसके जवाब में भी डॉन ने लिखा है कि जरूर इस कार्रवाई से पहले ट्रंप के सात मुस्लिम देशों के नागरिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध के फैसले को दिमाग में जरूर रखा गया होगा.

First published: February 2, 2017
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