नाक बचाने को पाकिस्तानी सेना बोली, हाफिज सईद की नजरबंदी ‘नीतिगत फैसला’

भाषा

Updated: January 31, 2017, 8:17 PM IST
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लाहौर. मुंबई हमले का मास्टरमाइंड पाकिस्तान में नजरबंद होने के बाद भी बाज नहीं आ रहा है. जमात उद दावा के मुखिया हाफिज सईद ने दावा किया है कि उसकी हिरासत से कश्मीरियों के भारत के खिलाफ संघर्ष को नयी प्रेरणा मिलेगी. सईद को कल लाहौर में मस्जिद अल-कुदसिया चौबुर्जी स्थित जमात के मुख्यालय से हिरासत में लिया गया और बाद में उसके जौहर टाउन स्थित घर में बंद कर दिया गया. पंजाब प्रांत के प्रशासन ने सईद के घर को बाद में उपजेल घोषित कर दिया गया.

वहीं एक असाधारण कदम उठाते हुए पाकिस्तानी सेना ने आज कहा कि मुंबई हमले के सरगना हाफिज सईद की हिरासत राष्ट्रहित में लिया गया एक ‘नीतिगत फैसला’ है. सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने यहां संवाददाताओं से कहा कि उसे हिरासत में लिया जाना राष्ट्रहित में लिया गया एक नीतिगत फैसला है. पंजाब प्रांत के गृह विभाग के आदेश के बाद सईद और चार अन्य जमात नेताओं को कल पंजाब प्रांत में नजरबंद किया गया. यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय के 27 जनवरी के निर्देश के बाद किया गया.

सईद और उसके सहयोगियों अब्दुल्ला उबैद, जफर इकबाल, अब्दुर रहमान आबिद और काजी काशिफ नियाज को जमात उद दावा के लाहौर मुख्यालय के पास चौबुर्जी से हिरासत में लेने के बाद नजरबंद किया गया है.

सईद को फिलहाल 90 दिन की नजरबंदी में रखा गया है. सरकार ने आज इस बात के संकेत दिए कि इसे और बढ़ाया जा सकता है. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने सईद और जमात उद दावा और फलाह-ए-इंसानियत (एफआईएफ) के चार अन्य नेताओं को 30 जनवरी से 90 दिनों के लिए हिरासत में लिया है, लेकिन जरूरत हुई तो इस अवधि के पूरा होने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले दिनों में जमात उद दावा और उसकी सहयोगी संस्थाओं के खिलाफ कुछ और कदम उठा सकती है.

गृह मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि जमात और एफआईएच के कुछ कार्यकर्ताओं के नाम उस सूची (एग्जिट कंट्रोल लिस्ट) में शामिल किया गया है, जिनके देश छोड़ कर जाने पर रोक है. गृह मंत्रालय के आदेश के बाद सईद और चार अन्य जमात नेताओं को कल पंजाब प्रांत में नजरबंद किया गया था. यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय के 27 जनवरी के निर्देश के बाद जारी किया गया था. उन्होंने कहा कि वे पंजाब के अलग-अलग जिलों से आते हैं लेकिन सरकार ने उन्हें लाहौर में एक ही घर में रखने का फैसला किया है.

First published: January 31, 2017
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