ये नदी नहीं, जिंदा इंसान है, गंदा करने पर घसीट लेगी कोर्ट में

News18Hindi
Updated: March 21, 2017, 3:01 PM IST
ये नदी नहीं, जिंदा इंसान है, गंदा करने पर घसीट लेगी कोर्ट में
न्यूजीलैंड में की पुरानी नदी वांगनुई को 'ह्यूमन एंटीटी' यानी की जीवित मनुष्य के अधिकार दिए हैं. वहां की संसद में इसके लिए बाकायदा एक बिल भी पास किया गया.
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Updated: March 21, 2017, 3:01 PM IST
दुनिया में पहली बार न्यूजीलैंड की एक नदी वांगनुई को जीवित मनुष्य के अधिकार दिए गए हैं. वहां की संसद में इसके लिए बाकायदा एक बिल भी पास किया गया. न्‍यूजीलैंड सरकार के फैसले को ही आधार मानकर भारत में गंगा और युमना को भी जीवित व्‍यक्‍ति का दर्जा दिया गया है. उत्‍तराखंड  में नैनिताल हाईकोर्ट के दिए इस फैसले में अब देश की इन दोनों नदियों को एक नागरिक की तरह अधिकार मिल गए हैं.

पहली बार न्‍यूजीलैंड में एक नदी को दिए गए मानवाधिकारों की दुनिया भर में चर्चा है. आइए नजर डालते हैं न्‍यूजीलैंड में वांगनुई नदी को दिए गए मानवाधिकारों पर

न्यूजीलैंड में वांगनुई नदी को एक जीवित व्यक्ति के अधिकार देने की कानूनी लड़ाई यहां की स्थानीय माओरी जाति ने लड़ी.
माओरी जाति से तकरीबन 1870 समय से वांगनुई पर अपने हक की मांग कर रही थी. यह वहां के इतिहास की सबसे लंबी कानूनी जंग थी.

वांगनुई न्यूजीलैंड की एक नागरिक है और  उसके पास वो सारे संवैधानिक अधिकार हैं जो एक न्‍यूजीलैंड के सिटीजन के हैं.
ये वही नागरिक अधिकार हैं, जो न्यूजीलैड के संविधान में माओरी जाति को हासिल हैं.
सरकार की ओर से वांगनुई को दो व्‍यक्‍तियों का संरक्षण भी दिया गया है. इनमें से एक व्‍यक्‍ति न्‍यूजीलैंड सरकार का है और दूसरा माओरि जाति का.
अब वांगनुई को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो वही कानूनी धाराएं लगेंगी जो माओरी जाति के किसी व्यक्ति नुकसान पहुंचाने पर लागू होती हैं.
वांगनुई का प्रतिनिधित्व माओरि जाति का ही कोई व्यक्ति  करेगा. वह नुकसान पहुंचाने वाले के खिलाफ वांगनुई की ओर से मुकदमा भी लड़ेगा.
न्‍यूजीलैंड संसद ने वांगनुई को मानवाधिकार के साथ मुआवजा भी दिया है.
वांगनुई भारत की गंगा की तरह ही न्यूजीलैंड के लोगों के लिए आस्था की नदी है.

उत्‍तराखंड की नैनिताल हाईकोर्ट ने वांगनुई की तरह ही तीन लोगों को गंगा और युमना के प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्‍त किया है. यह नदियों को नुकसान पहुंचाने पर उसकी ओर से कानूनी लड़ाई लड़ेेंगे.
First published: March 21, 2017
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