चीनी सामान का बहिष्‍कार? जानिए कैसी है भारत और चीन के आर्थिक रिश्‍तों की तस्‍वीर

News18India
Updated: July 17, 2017, 6:52 PM IST
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Updated: July 17, 2017, 6:52 PM IST
एक तरफ चीन सरहद पर दादागिरी दिखा रहा है वहीं दूसरी तरफ आर्थिक मोर्चे पर भी भारत के लिए मुश्किल खड़ी कर रहा है. एक आकड़े के मुताबिक भारत चीन से करीब साढ़े 4 लाख करोड़ रुपये का कारोबार करती है.

वहीं भारत से चीन करीब 60 हजार करोड़ का माल खरीदता है. यानी चीन के कारोबार के मुकाबले हम न के बराबर हैं. सिक्किम के 'डोका ला' में भूटान के पास चीनी धौंसबाजी के उपजे विवाद के बाद एक राय ये दी जा रही है कि चीन के सामान का बहिष्कार किया जाए लेकिन क्या वाकई ये आसान है. आंकड़ों को समझें तो चीन को आर्थिक रण में हराना आसान नहीं है.

स्मार्टफोन के कारोबार में भारत यहां हर साल 50 हजार करोड़ रुपए के स्मार्टफोन बिकते हैं. इसमें से आधे से ज्यादा यानी करीब 51% बाजार पर चीन का कब्जा है. दूसरी तरफ टेलीकॉम बाज़ार सालाना 70 हज़ार करोड़ रुपये का है और इसमें भी चीनी कंपनियां हावी है. ज्यादातर उपकरण चीन की Huawei और ZTE जैसे कंपनी से मंगाए जाते हैं. भारत में सोलर एनर्ज़ी बाज़ार 12 हज़ार करोड़ रुपये सालाना है जिसमें 87% हिस्सेदारी चीन के पास है.

एक वजह ये भी है कि जिस देश से विवाद हो जाता है चीन और वहां के लोग उसका सामान खरीदना बंद कर देते हैं. जैसे अभी हुआ, इंटरनेशनल कोर्ट ने दक्षिण चीन सागर पर चीन का दावा नहीं माना तब चीन के लोगों ने अमेरिकी ब्रांड McDonald's और KFC जाना ही बंद कर दिया.

यही नहीं चीन विदेशी चीजों की नकल बना कर भी अपने देश में उनका धंधा चौपट कर देता है. जैसे ऑनलाइन 'एमेजॉन' के जवाब में चीन ने अपनी कंपनी 'अलीबाबा' को बढ़ावा दिया. दुनिया वेबसाइट देखने के लिए 'क्रोम ब्राउजर' का इस्तेमाल करती है चीन के लोग अपने यहां बने 'यूसी ब्राउज़र' का इस्तेमाल करते हैं. फेसबुक की जगह चीन में रेनरेन है और गूगल की जगह बाइदू है.

इसीलिए चीन को पीछे धकेलने के लिए अब भारत में भी चीन के सामान का बहिष्कार करने को कहा जा रहा है. समझने वाली बात ये है कि क्या भारत के लोग चीन के लोगों की तरह ऐसा कर पाएंगे.
First published: July 17, 2017
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