यूएन सिक्योरिटी काउंसिल का स्थायी सदस्य बन सकता है भारत, नहीं होगी ये पॉवर!

भाषा

Updated: March 8, 2017, 11:41 PM IST
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संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) सिक्योरिटी काउंसिल में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए कई नए रास्ते खोजने की प्रक्रिया जारी है. संयुक्त राष्ट्र की सुधार प्रक्रिया के तहत भारत समेत जी4 देशों ने बयान जारी कर कहा है कि सदस्यता के लिए उन नए मॉडल्स पर भी विचार कर सकते हैं जिनमें सीमित वीटो अधिकार के साथ स्थायी सदस्यता देने का विचार किया जा रहा है. हालांकि इस तरह के कई विकल्पों पर अभी भी विचार जारी है और ये विकल्प नए मुल्कों की आवाजों को दरकिनार करने वाले नज़र आते हैं.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि भारत सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए बड़ी संख्या में सिक्योरिटी काउंसिल में देशों की स्थाई सदस्यता का समर्थन करता है. बता दें कि जी-4 में भारत के अलावा ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं.

यूएन सिक्योरिटी काउंसिल का स्थायी सदस्य बन सकता है भारत, नहीं होगी ये पॉवर!
Image Source: PTI

वीटो के मुद्दे पर अकबरूद्दीन ने कहा कि वीटो के सवाल पर कई लोगों ने अलग-अलग नजरिए से गौर किया, लेकिन जी4 का रुख यह है कि वीटो कोई समस्या नहीं है. स्थायी सदस्यता मिलने के मामले में दिक्कत नए स्थायी सदस्यों को तत्काल वीटो न मिलना नहीं है, लेकिन असल समस्या अवरोधों का प्रावधान करने को लेकर है.

जी4 ने एक बयान में कहा, 'हमारा रुख इसी भावना के अनुरूप है. नए स्थायी सदस्यों के पास सैद्धांतिक तौर पर वो सभी जिम्मेदारियां और बाध्यताएं होंगी जो मौजूदा समय के स्थायी सदस्यों के पास है, हालांकि नए सदस्य वीटो का उपयोग तब तक नहीं करेंगे जब तक समीक्षा के दौरान कोई फैसला नहीं हो जाता. जी4 ने कहा कि वीटो का मुद्दा अहम है, लेकिन सदस्य देशों को 'सुरक्षा परिषद की सुधार प्रक्रिया पर वीटो' नहीं होने देना चाहिए.

जी4 ने अपने बयान में ये भी कहा कि फिलहाल उन्हें लगता है कि आगे बढ़ने का कोई और दूसरा रास्ता नहीं है लेकिन इन नए तरीकों से ही सही संयुक्त राष्ट सुरक्षा परिषद में प्रस्तावित सुधारों की प्रक्रिया का हम स्वागत करते हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अभी तक उन्हें कोई प्रगतिशील विचार सुनने को नहीं मिला है और कुछ देश पुराने ठुकराए गए विचारों को दोबारा पेश कर रहे हैं.

बयान में कहा गया कि उनका मानना है कि सुरक्षा परिषद में स्थाई और गैर स्थाई सदस्यों के बीच 'प्रभाव का असंतुलन' है और गैर स्थाई श्रेणी में विस्तार करने भर से समस्या हल नहीं होगी. बयान में आगे कहा गया है, 'वास्तव में यह स्थाई और गैर स्थाई सदस्यों के बीच अंतर को और गहरा करेगा.'

First published: March 8, 2017
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