'चीन के आर्थिक गलियारे से जुड़े भारत, इससे पाकिस्‍तान से कम होगा तनाव'

आईएएनएस
Updated: May 18, 2017, 11:14 PM IST
'चीन के आर्थिक गलियारे से जुड़े भारत, इससे पाकिस्‍तान से कम होगा तनाव'
(File Photo:PTI)
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Updated: May 18, 2017, 11:14 PM IST
चीन के एक वरिष्‍ठ पत्रकार ने भारत से चीन-पाकिस्‍तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) से जुड़ने को कहा है. अखबार में छपे लेख में कहा गया है कि ऐसा होने से भारत और पाकिस्‍तान के बीच तनाव कम हो सकता है. यह लेख ग्‍लोबल टाइम्‍स में पीपल्‍स डेली के वरिष्‍ठ संपादक डिंग गेंग ने लिखा है.

उन्‍होंने लिखा, "यदि भारत बीजिंग की इस पहल से जुड़ता और इसमें अपना योगदान देता है तो इससे भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और टकराव में कमी आएगी." डिंग रेनमिन यूनिवर्सिटी ऑफ चीन में चोंगयांग इंस्टीट्यूट फॉर फाइनेंशियल स्टडीज के साथ एक सीनियर फेलो के रूप में जुड़े हुए हैं.

उन्होंने कहा, "यह पहल स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को सुधार सकता है." भारत ने चीन के वन बेल्ट वन रोड प्रस्‍ताव से भी जुड़ने से इनकार कर दिया है. भारत ने अपनी संप्रभुता संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्‍ताव को खारिज कर दिया. बता दें कि सीपीईसी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरेगा. इस पर भारत को आपत्ति है.

भारत को चिंता है कि सीपीईसी परियोजना उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करता है. लेकिन डिंग ने कहा कि सीमा विवाद, जिसमें चीन और भारत के बीच सीमा विवाद भी शामिल है, ये अनुचित औपनिवेशिक आदेश का नतीजा है और ये कई दशकों बाद भी अशांत बने रहते हैं. सैन्य झगड़े अक्सर कश्मीर में देखे जाते हैं और इसमें दोनों तरफ से हानि होती है. अब इन मुद्दों को पुराने ढंग से सुलझाने के बजाय तरीकों को बदलने का समय है.

उन्होंने कहा, "जब तक संघर्ष बना रहता है और कोई नया नियम नहीं स्वीकार किया जाता, हम क्यों न इस मुद्दों को अलग कर दें और आम सहमति पर आधारित एक परियोजना या कार्यक्रम करने की कोशिश करें, जो आपसी विश्वास को स्थापित करने में पहला कदम हो?"

उन्होंने कहा, "विकास कई मुद्दों का समाधान है. यदि भारत सरकार एक कदम उठा सकती है, भले ही वह छोटा हो, तब यह इतिहास की घटनाओं में शुमार होगा. "

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First published: May 18, 2017
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