देखें: आईएस पर टूटी रूसी फौज की आफत, जंग-ए-मैदान से भागे बगदादी के हैवान

News18India
Updated: December 25, 2016, 12:04 AM IST
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Updated: December 25, 2016, 12:04 AM IST
नई दिल्ली। मोसुल और रक्का में लगातार हार रहे बग़दादी और उसके गुर्गे अपनी हार मानने के लिए तैयार नहीं हैं। वो ये भी जानते हैं कि वो ज़्यादा दिन तक मोसुल और रक्का में छिप कर नहीं रह सकते। लिहाज़ा अब वो इन दोनों जगहों से ऐसे भाग रहे हैं जिसे देख कर आप हैरान जाएंगे। सिर्फ ज़मीन ही नहीं बल्कि आसमान से भी आईएस के ठिकानों पर रूसी फाइटर जेट आग बरसा रहे हैं, लेकिन रूसी हथियारों के सामने अब आईएस के हैवान बौने नज़र आ रहे हैं क्योंकि रूसी सेना आईएस के शैतानों को मार गिराने के लिए जंग के मैदान में अपने सैनिकों के साथ-साथ रोबोट मशीनगन का इस्तेमाल भी कर रही है।

रूसी टैकों ने भी आईएस के आतंकियों पर क़हर बरपाया हुआ है और उनकी गोलीबारी की बदौलत ही सीरियाई सैनिक और फौज धीरे-धीरे ही सही पर आईएस को अपने देश से बाहर खदेड़ रही है। लेकिन, अगर इस जंग में सबसे ज़्यादा किसी का नुकसान हुआ है तो वो हैं अलेप्पो शहर के बाशिंदे। हालांकि, सीरिया के दूसरे सबसे बड़े शहर पर अब सीरियाई सेना अपना कब्ज़ा तो जमा चुकी है लेकिन शहर खंडहर में तब्दील हो चुका है और इस शहर की गलियां और सड़के वीरान और सुनसान हो चुकी हैं।

सीरिया में बीते चार महीने से जंग चल रही है और इन चार महीनों के दौरान यूं तो सैकड़ों सैनिक हलाक हुए और हजारों आतंकियों को मौत के घाट उतारा गया। लेकिन, शायद बुधवार को ये पहला मौका था जब आमने सामने की लड़ाई में आईएस के जेहादियों का पलड़ा थोड़ा भारी पड़ता दिखाई दिया, क्योंकि एक ही दिन में आतंकवादियों ने 16 फौजी मार दिए, जो कि इस इलाके में एक दिन में मारे गए सैनिकों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।

बुधवार को हुई इस आमने सामने की जंग में बेशक विद्रोही सेना के सैनिकों ने इस्लामिक स्टेट के 138 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। मगर गहरी चोट तो तुर्की सेना को लगी क्योंकि उसके 16 सैनिकों के मारे जाने के अलावा 33 सैनिक बुरी तरह जख्मी हो गए। सेना के हवाले से सामने आई खबरों पर यकीन किया जाए तो दज़ला की घाटी में चल रही ये लड़ाई और आतंकियों के खिलाफ ये ऑपरेशन अब अपने अंतिम दौर की तरफ है। तुर्की सैनिकों को पूरा यकीन हो गया है कि अब अल बाब बग़दादी के चंगुल से आजाद होकर ही रहेगा।

बीते दो दिनों के दौरान सीरिया डेमोक्रेटिक फोर्सेज के जाबांजों ने आईएस के कब्जे से 60 गांवों को आजाद करवा लिया है। 20 दिसंबर को कुर्दिश सेना ने रक्का ज़िले का सबसे अहम ठिकाना अल तबक़ा डैम आजाद करवाया, जबकि 21 दिसंबर को वाईपीजी की टुकड़ियों ने ग़ादबान, वेस्ट जाबर, ईस्ट जाबर और क़लाएत जाबर के इलाके से बग़दादी के आतंकियों को मार मार कर भगा दिया। सीरिया की एसडीएफ के सैनिकों ने असल में पूरी इलाको को तीन तरफ से घेर लिया था जबकि चौथी तरफ वाईपीजी की टुकड़ी तबक़ा डैम पर कब्जा करने के लिए आगे बढ़ चुकी थी।

वाईपीजी की ताबड़तोड़ गोलाबारी और आग उगलते उनके टैंकों की सटीक निशानेबाजी की बदौलत इस पूरे इलाके पर कब्जा जमाकर बैठे आईएस को आखिरकार यहां से भागना ही पड़ा। इस लड़ाई में इस्लामिक स्टेट के जेहादियों को भारी नुकसान भी हुआ, क्योंकि भागते वक्त उनका ज्यादातर गोला बारूद आगे बढ़कर कब्जा करने पर उतारू एसडीएफ के सैनिकों के हाथ लग गया। अंदाजा यही लगाया जा रहा है कि अब कुर्दिश सेना का अगला निशाना आईएसआईएस के कब्जे वाला रक्का का नॉर्थवेस्ट इलाका होगा, जिसे सीरिया के भीतर इस्लामिक स्टेट का सबसे बड़ा और मजबूत किला माना जाता है।
First published: December 24, 2016
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