इस महिला के नाम से कांपते हैं आईएस के आतंकी, फिर भी खौफ में बिता रही जीवन

News18India
Updated: December 26, 2016, 7:07 AM IST
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नई दिल्ली। आसमान में तेज रफ्तार से उड़ते लड़ाकू विमानों को देखकर दुश्मनों के पसीने छूट जाते हैं। इन लड़ाकू विमानों के पायलट दुश्मनों पर मौत बनकर बरसते हैं। जंग के मैदान में ये मंजर बहुत आम होता है, लेकिन अगर दुश्मन तालिबान हो और लड़ाकू विमान की पायलट कोई महिला हो तो कहानी कुछ और हो जाती है और यही कहानी है निलोफर रहमानी की। 25 साल की निलोफर रहमानी को पूरी दुनिया जानती है क्योंकि ये अफगानिस्तान की पहली महिला पायलट है। जिस अफगानिस्तान में तालिबान के खौफ के चलते ज्यादातर महिलाएं बुर्के में ही सिमटी रह जाती हैं, वहां निलोफर ने लड़ाकू विमान उड़ाने में महारथ हासिल करके मिसाल कायम की।

निलोफर की बहादुरी को ना सिर्फ अफगानिस्तान के लोगों ने बल्कि पूरी दुनिया ने सलाम किया, लेकिन अब वो अमेरिका से मदद चाहती है। निलोफर ने खुद की और अपने परिवार की जिंदगी पर मंडराते खतरे को देखते हुए अमेरिका से शरण देने की मांग की है। निलोफर इस वक्त अमेरिका में ही हैं। उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें अमेरिकी एयर फोर्स के साथ ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। पिछले एक साल से निलोफर अरकांसस में लिटिल रॉक एयरफोर्स बेस पर ट्रेनिंग ले रही थीं। उनकी ट्रेनिंग इसी गुरुवार खत्म हो गई। उन्हें शनिवार तक अफगानिस्तान वापस लौटना था, लेकिन निलोफर तय वक्त पर अपने वतन नहीं लौटीं।

उन्होंने कहा मुझे अपने देश से प्यार है, मैं अपने वतन की सेवा भी कहना चाहती हूं, लेकिन वहां मेरी जान जाने का ख़तरा है। इस बयान के बाद अफगानिस्तान में एक बार फिर तेजी से सिर उठाते तालिबान की चर्चाएं तेज हो गईं। दरअसल निलोफर का डर बेवजह नहीं है। उनके एयरफोर्स में जाने की खबर सामने आने के बाद से ही उन्हें धमकियां मिलने लगी थीं। तालिबान ने निलोफर की मौत का फतवा जारी कर दिया। इसके बावजूद निलोफर ने हार नहीं मानी तो उसके परिवार के खात्मे की धमकियां दी जाने लगीं।

तालिबानी आतंकियों ने एक खत निलोफर के घर भेजा, जिसमें लिखा था कि तुम हमारी धमकी को गंभीरता से नहीं ले रही हो। इस्लाम ने महिलाओं को अमेरिकी और ब्रिटिश सेना के साथ जुड़ने से मना किया है। अगर तुम अब भी उनके साथ जुड़ी रहोगी तो अपनी और अपने परिवार की बर्बादी की जिम्मेदार खुद होगी।

निलोफर को उसकी बहादुरी के लिए अमेरिका भी सम्मानित कर चुका है, लेकिन अब इस महिला पायलट का हौसला टूटने लगा है। दरअसल, निलोफर जिस समाज में रहती है, वहां भी एक महिला का लड़ाकू विमान उड़ाना अच्छा नहीं माना जाता। तालिबान के दकियानूसी समाज में महिलाओं को बराबरी का रुतबा हासिल नहीं है। इसलिए निलोफर अपने वतन नहीं लौटना चाहती।

रहमानी के खौफ की वजह ये है कि जब से तालिबान ने धमकी दी है, वो अपने परिवार को तीन बार अलग-अलग जगहों पर ले जा चुकी है, लेकिन हर बार कहीं ना कहीं से तालिबान को उसका पता-ठिकाना मिल जाता है और फिर धमकियों का सिलसिला शुरू हो जाता है। निलोफर का वतन ना लौटने का ऐलान अफगानिस्तान के लिए बहुत बड़ा झटका है। अब सरकार के सामने तालिबान को पूरी तरह कुचलने की चुनौती है। वरना उसके मुल्क के होनहार नौजवान देश छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
First published: December 25, 2016
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