सऊदी अरब ने राहिल शरीफ को बनाया इस्लामिक मिलिट्री का मुखिया

News18India

Updated: January 8, 2017, 8:59 AM IST
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नई दिल्ली। जनरल राहिल शरीफ को पाकिस्तानी सेना से रिटायर होने के बाद एक नई सेना का कमांडर बनाया गया है। इस सेना में सिर्फ पाकिस्तान नहीं बल्कि 39 देशों की सेना शामिल होगी। ये सैन्य संगठन सऊदी अरब ने बनाया है, जिसे इस्लामिक आतंक निरोधी गठबंधन नाम दिया गया है। पाकिस्तान और सऊदी अरब की ये नजदीकी भारतीय कूटनीति के लिए झटका मानी जा रही है।

पाकिस्तान की सेना का जनरल रहते राहिल शरीफ और आईएसआई ने मिलकर भारत में पठानकोट और उड़ी जैसे हमले कराए, लेकिन नवंबर में भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद राहिल शरीफ बड़े बेआबरू होकर अपनी ही सेना के कूचे से निकले। नवंबर 2016 में राहिल शरीफ़ पाकिस्तानी सेना के जनरल पद से रिटायर हो गए और उनकी जगह जनरल क़मर जावेद बाजवा ने ले ली।

नवंबर में जब पाकिस्‍तान सेना के पूर्व जनरल राहील शरीफ रिटायर हुए तो हर कोई जानना चाहता था कि अब वह क्‍या करेंगे। लेकिन आपको बता दें कि अब वो इस्‍लामिक मिलिट्री अलायंस को लीड करेंगे और उनकी पोस्टिंग सऊदी अरब में होगी। राहिल शरीफ को इस्लामिक देशों की गठबंधन सेना का मुखिया नियुक्त किया गया है। इस गठबंधन में 39 देश शामिल हैं। ये सैन्य गठबंधन सऊदी अरब ने तैयार किया है। बताया जाता है कि इसका मकसद आतंकवाद से लड़ना है। इसका हेड ऑफिस सऊदी अरब के रियाद में होगा और अब राहिल शरीफ सऊदी अरब में पोस्टेड होंगे।

इस बात की जानकारी खुद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दी। ख्वाजा आसिफ के मुताबिक कुछ दिनों पहले एक समझौता किया गया था इसके तहत राहिल शरीफ को सऊदी अरब में पोस्‍ट किया जाएगा। आर्मी के जनरल हेडक्‍वार्टर और नवाज़ शरीफ की रजामंदी के बाद ये फैसला लिया गया है। 2015 में सऊदी अरब ने ऐलान किया था कि दुनिया के 34 इस्‍लामिक देश एक इस्‍लामिक मिलिट्री तैयार करेंगे। तब पाकिस्तान का नाम बिना मंजूरी के इसमें शामिल कर लिया गया था। लेकिन, मध्यपूर्वी देशों की राजनीतिक रस्साकशी में शामिल होने को लेकर पहले पाकिस्तान पसोपेश में था।

पाकिस्तान इसमें शामिल होगा या नहीं, इसे लेकर शुरुआत में चीजें साफ नहीं थीं। फिर बाद में नवाज शरीफ सरकार ने पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर अपनी रज़ामंदी दे दी। लेकिन ये तय नहीं था कि पाकिस्तान सेना के रिटायर्ड जनरल को इस सैन्य संगठन में इतना बड़े ओहदे से नवाजा जाएगा। जाहिर है कि सऊदी अरब के साथ पाकिस्तानी की बड़ी नजदीकी बनने जा रही है। जो भारत की विदेश नीति के लिए झटका माना जा रहा है। भारत ने कूटनीति से मुसलमान देशों के अंदर एक ऐसा महौल बनाया है कि आपने देखा होगा कि कुछ दिन पहले तक ये मुस्लिम देश भी भारत के साथ थे, पाकिस्तान को नंगा कर रहे थे। इसलिए पाकिस्तान दोबारा इस अलायंस के अंदर जाना चाहता है।

भारत अब तक विश्व बिरादरी से पाकिस्तान को अलग अलग-थलग करने में काफी हद तक कामयाब हुआ था। लेकिन, पाकिस्तान की सऊदी के साथ बड़ी नजदीकी भारत के लिए झटका माना जा रहा है। गौरतलब है कि अप्रैल 2016 में मोदी की सऊदी अरब यात्रा के दौरान सऊदी अरब के साथ आतंकवाद पर समझौता हुआ था। इस यात्रा के बाद ही सऊदी अरब ने पाकिस्तान के दो आतंकी संगठनों पर पाबंदियां लगाई थीं, लेकिन अब आतंकवाद समर्थक राहिल शरीफ़ को ही सैन्य अभियान का मुखिया बना दिया है। इस सैन्य गठबंधन का मकसद इसके 39 इस्लामिक देशों के बीच सुरक्षा मामलों पर सहयोग कायम करना, सैन्य प्रशिक्षण, हथियारों का लेन-देन करना है।

रियाद में इसका ज्वाइंट कमांड सेंटर बनाया गया है, जहां से इसे राहिल शरीफ ऑपरेट करेंगे। इसका मकसद नाटो जैसा है। अटैक ऑन वन कंट्री इज कंसीडर्ड अटैक ऑन ऑल अलायंस। मान लीजिए किसी एक देश पर आतंकी हमला होता है तो उस दहशतगर्द तंजीम को खत्म करने के लिए सभी देशों के रिसोर्सेज इस्तेमाल होंगे। इसमें ट्रूप्स, रिसोर्सेज दिए जाएंगे। ये तय होगा कि दहशतगर्दी के खिलाफ उलेमाओं का इस्तेमाल कैसे किया जाए।

हालांकि, कहा यही जा रहा है कि इस गठजोड़ का मकसद आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई छेड़ना है साथ ही ये संगठन सवालों के घेरे में भी है। कहने के लिए आतंकवाद के खिलाफ, लेकिन एक किस्म की ग्रुपिंग। उसमें इस्लामिक वर्ल्ड के मिडिल ईस्ट और बांग्लादेश तक के मुस्लिम देशों की अलायंस मिलिटरली बहुत स्ट्रॉन्ग होगी।

आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए पाकिस्तान को अलग-थलग करने की प्रधानमंत्री की कोशिश रंग ला रही थी, लेकिन एक बार फिर आतंक को पोसने वाले देश के रिटायर्ड जनरल को आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सेना जैसे संवेदनशील मामलों में विश्वासपात्र को ही कमान सौंपी जाती है, जाहिर है कि पाकिस्तान सऊदी अरब के बहुत नजदीक पहुंच चुका है।

First published: January 7, 2017
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