अब बंद होगा पाकिस्तान का मिसाइल धंधा, अमेरिका ने इन सात कंपनियों पर लगाया बैन!

News18India

Updated: January 2, 2017, 11:40 PM IST
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नई दिल्ली। पाकिस्तान का काली करतूत का एक और कच्चा चिट्ठा दुनिया के सामने आया है। पाकिस्तान के इस झूठ को अमेरिका ने बेनकाब किया है। इसने पाकिस्तान की ऐसी चोरी पकड़ी है जो पूरी दुनिया के लिए एक बड़े खतरे की आहट है। पाकिस्तान की ये काली करतूत है मिसाइल तकनीक की चोरी और उसके ग़लत इस्तेमाल की। पाकिस्तान की वजह से दुनिया के लिए पैदा हुए इन खतरों के बारे में भारत हमेशा से आगाह करता रहा है। लेकिन अब अमेरिका को पाकिस्तान की करतूतों के ऐसे सबूत मिलें जिससे उसके होश उड़ गए हैं। इन सबूतों से साबित होता है कि पाकिस्तान के हथियार पूरी दुनिया के लिए संकट बन चुके हैं।

पाकिस्तान में मिसाइल कार्यक्रम की आड़ में एक खतरनाक खेल खेला जा रहा है। इस बारे में सबूत मिलने के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। अमेरिका ने पाकिस्तान की कई कंपनियों पर पाबंदी लगाने का ऐलान कर दिया है। पाकिस्तान की जिन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया है वो पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी कंपनियां हैं। लेकिन यहां मिसाइल कार्यक्रम के साथ साथ कई और काले खेल भी खेले जा रहे थे। ऐसे खेल जिससे भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

दरअसल पाकिस्तान ने 14 दिसंबर को क्रूज मिसाइल बाबर का परीक्षण किया था। 700 किलोमीटर तक मार कर सकने वाली इस मिसाइल को परमाणु हथियारों से लैस किया जा सकता है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि इसमें रडार से बचने वाली अत्य़ाधुनिक तकनीक भी थी। पाकिस्तान ने दावा किया कि ये उसकी घरेलू तकनीक से बनाई गई है। लेकिन सच ये है कि इसे यूक्रेन की तकनीक से तैयार किया गया था। जिसे पाकिस्तान ने यूक्रेन से 2001 में हासिल किया था। जानकार को ये शक भी है कि इस मिसाइल को अमेरिका की टॉमहॉक मिसाइल की तकनीक चुराकर तैयार किया गया है जो अफगानिस्तान में अमेरिका कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान में गिरी थी।

अमेरिका ने पाकिस्तान की जिन कंपनियों पर पाबंदी लगाई है उनमें एयर वेपन कॉम्प्लेक्स औऱ नेसकॉम नाम की कंपनियां भी है जिन्होंने बाबर मिसाइल बनाई थी। साफ है अमेरिका को इस बात के पुख्ता सबूत मिल गए हैं कि पाकिस्तान मिसाइल तकनीक की चोरी में जुटा हुआ है क्योंकि पाकिस्तान एक तरफ तो मिसाइल तकनीक चुराकर मिसाइलें तैयार कर रहा है। दूसरी ओर वो इन्हें चोरी से उत्तरी कोरिया जैसे देशों तक पहुंचा रहा है। जिससे सबूत पहले ही मिल चुके हैं। पाकिस्तान की इस करतूत के सामने आने के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान की कंपनियों पर पाबंदी लगा दी।

अमेरिका ने पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी सात कंपनियों पर पाबंदी लगाई है। इन कंपनियों को अमेरिका ने ऐसी लिस्ट में डाल दिया है जिसके बाद उन्हें अमेरिका की किसी कंपनी से किसी तरह का सामान मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है। इसका सीधा असर ये होगा कि पाकिस्तान का मिसाइल का काला धंधा बंद हो जाएगा। अमेरिका ने पाकिस्तान की जिन सात कंपनियों पर पाबंदी लगाई है उनपर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप है। यानी ये कंपनियां अमेरिका के लिए ख़तरा है।

पाकिस्तान की जिन 7 कंपनियों पर पाबंदी लगाई गई है उनमें शामिल हैं अहद इंटरनेशनल (लाहौर), एयर वीपन कॉमप्लेक्स (पंजाब), इंजीनियरिंग सल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड (इस्लामाबाद), मैरीटाइम टेक्नोलॉजी कॉमप्लेक्स (कराची), नेसकॉम (इस्लामाबाद), न्यू ऑटो इंजीनियरिंग (रावलपिंडी) और यूनिवर्सल इंजीनियरिंग (रावलपिंडी) है। अमेरिका ने इन कंपनियों को निर्यात प्रशासन विनियम यानी ईएआर की लिस्ट में डाला है। यानी अब इन कंपनियों को अगर अमेरिका की कोई कंपनी किसी भी तरह का सामान निर्यात करती है तो उसे लाइसेंस लेना पड़ेगा। हालांकि पाबंदी में इस बात का जिक्र नहीं है कि पाकिस्तान किस तरह इन कंपनियों का गलत इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन इससे इतना जरूर साफ हो जाता है कि पाकिस्तान दुनिया की आंखो में धूल झोंककर अपने मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है।

भारत हमेशा से ये आगाह करता रहा है कि पाकिस्तान बिजली के नाम पर परमाणु बम का ज़खीरा तैयार कर रहा है। दुनिया की आंखों में धूल झोंककर वो अपना मिसाइल कार्यक्रम आगे बढ़ा रहा है। अब अमेरिका की पाबंदी ने भारत के पक्ष को और मजबूत कर दिया है। अमेरिका को पाकिस्तान की इन कंपनियों के खिलाफ जो सबूत मिले हैं उसने अमेरिका के भी होश उड़ गए हैं। इसलिए इन सात कंपनियों और इनसे जुड़ी दूसरी कंपनियों पर इस बात की भी नजर रखी जा रही है कि कहीं वो मिलते जुलते नाम का फायदा न उठा सकें। इन कंपनियों पर पाबंदी इसलिए भी इतनी कड़ाई से लागू की गई है क्योंकि पाकिस्तान के हथियारों का आतंकियों के पास पहुंचने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जिसमें परमाणु हथियार तक शामिल हैं।

इस पाबंदी के ऐलान के बाद पाकिस्तान के भी होश उड़ गए हैं क्योंकि इसका सीधा मतलब उसके मिसाइल के धंधे का बंद होना है। इसलिए पाकिस्तान सरकार विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफ़ीस ज़करिया ने एक बयान जारी कर कहा है कि पाकिस्तान सरकार कंपनियों पर पाबंदी के मामले पर विचार कर रही है। साथ ही वो उन तथ्यों की जांच भी कर रही है जिसकी वजह से ये पाबंदी लगाई गई है। इस पाबंदी से पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम को बड़ा झटका लग चुका है। अब वो सिर्फ चीन के भरोसे है। लेकिन अमेरिका की मदद से उसके जितने प्रोजेक्ट चल रहे थे वो सब अब बीच में ही फंस चुके हैं। अब अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप होने जा रहे हैं। ऐसे में उसे आने वाले वक्त में भी राहत मिलने की उम्मीद कम ही है।

First published: January 2, 2017
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