वादी बरादा पर सीरियाई सेना का कब्जा, फिर भी नहीं थम रहीं तोपें

News18India

Updated: January 12, 2017, 11:50 PM IST
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नई दिल्ली। अब तक सीरिया की खूबसूरती को बारूदी आग इस कदर झुलसा चुकी है कि उसे देखकर तरक्की के रास्ते पर बढ़ते इंसानियत की रूह तक कांप उठे। जिधर भी नज़र उठाइए बस बर्बादी और वीरानी का साया ही नज़र आता है। उसी सीरिया का एक इलाका वादी बरादा, जहां अब सीरियाई फौज का कब्जा है। लेकिन न तो गरजती तोपें थमने का नाम ले रहीं और न ही बरसते बारूद में कोई कमी आयी। बस यूं समझिए इस इलाके का जर्रा-जर्रा दहशत के गुबार में डूबा हुआ है।

हर तरफ तबाही के बादल, बर्बादी का धुआं और वीरान हो चुकी इंसान की बसाई बस्तियां। जी हां, ये मंजर सीरिया की राजधानी दमिश्क के बेहद नज़दीक बसे वादी बरादा इलाके का है। पहाड़ों की गोद में बसे इस इलाके में फिलहाल इंसानों की बसाई बस्तियां अब पूरी तरह से वीरान हो चुकी हैं। कुछ अरसा पहले तक यहां इस इलाके पर सीरिया की सेना के खिलाफ मोर्चा खोल चुके बागी सैनिकों का कब्जा था। उन्हीं बागी सैनिकों की आड़ में तबाही और बर्बादी ने इस इलाके में पनाह ले ली थी।

सीरिया की सरकार के तहत आने वाली एक मीडिया एजेंसी एससीएमएम ने वादी बरादा की कुछ तस्वीरें जारी की हैं। ये बताने के लिए कि अब वादी बरादा की उस खूबसूरत वादी पर सीरियाई सरकार की फौजों का कब्जा हैं। वहां इस वक्त जो तोपें, जो मोर्टार, जो टैंक बारूद बरसा रहे हैं, उनका मकसद बस इतना है कि जैसे भी हो बगावत का एक भी जर्रा जिंदा नहीं बचना चाहिए।

दमिश्क के उत्तर-पश्चिम इलाके में बंजर पहाड़ों की गोद में बसे वादी बरादा में पिछले एक महीने से सीरियाई सेना और विद्रोही सैनिकों के बीच जंग चल रही थी। खुले पहाड़ों और मीलों दूर तक आसमान से ढके मैदानों की वजह से विद्रोही सैनिकों ने इस इलाके पर अपनी तोपों और बंदूकों का पहरा बैठा रखा था। आलम ये था कि दूर से कोई फौजी हरकत होती नजर आते ही विद्रोही सैनिकों की तोपें और बंदूकें आग उगलना शुरू कर देती थीं। दरअसल ये वादी, अपनी एक खूबी की वजह से विद्रोही फौज की जान बनी हुई थी। उसकी इसी खूबी ने सीरियाई फौजों की इसकी तरफ तेजी से रुख करने को मजबूर कर दिया। और वो वजह है इस इलाके का मीठा पानी।

दरअसल इस शहर की इसी खासियत ने इसे बारूदी मौत के इतने करीब पहुंचा दिया। ये इलाका सीरिया और खासतौर पर दमिश्क के लोगों की प्यास बुझाता आया है क्योंकि इस इलाके से बरादा और फीजे नाम की दो नदियां गुज़रती हैं और जो अपने साथ इंसान की जिंदगी यानी आबे जन्नत का सबाब लेकर चलती हैं। अगर सरकारी जोड़ घटाने को सही मानें तो इस पूरे इलाके में करीब 50 फीसदी पानी बरादा नदीं से यहां पहुंचता है। जाहिर है कि दुनिया के इस बंजर रेगिस्तानी हिस्से में पानी की क्या अहमियत हो सकती है?, ये बात दोनों तरफ के लोग अच्छी तरह समझते हैं। असद की सेना के हिस्से से इस इलाके को छीनने के बाद विद्रोही सैनिकों को लगने लगा था कि उन्होंने ये लड़ाई करीब करीब जीत ली है।

इस लड़ाई का रुख हरदम अपने हक में करने की गरज से विद्रोही सैनिकों ने इसी बात की धमकी का सहारा लिया कि अगर असद की सेना ने कदम आगे बढ़ाया तो दमिश्क को प्यासा मारने का जरिया उनके पास मौजूद है। बस इसी धमकी ने करीब एक लंबा अरसा सीरियाई सैनिकों के कदमों को थामे रखा। लेकिन जैसे ही सीरिया के अलेप्पो से विद्रोही सैनिकों के कदम उखड़े तो सीरियाई सैनिकों ने इस बेहद खास इलाके की तरफ अपनी तोपों का मुंह मोड़ दिया। नतीजा ये हुआ कि आब-ए-जन्नत कहलाने वाले इस इलाके से बागी सैनिकों के कदमों को उखाड़ फेंकने के लिए असद की सेना ने पूरे इलाके को बारूद से न जाने कितनी बार बंजर बना दिया।

आलम ये है कि इस वक्त यहां बागी सैनिक सीरियाई सेना के टैंकों की मार से बचने के लिए कदम कदम पर पनाह तलाश कर रहे हैं। मगर आसमानी रास्तों से निशाने की तरफ बढ़ती आग, उन्हें कोई मौका दिए। पूरी तरह से बर्बाद करने में लगी हुई है। हालांकि सीरिया में साल 2016 के खत्म होने तक सीज़फायर का ऐलान हो गया था। मगर रूस और तुर्की की सेनाओं की गोलाबारी से ये सीज़फायर कई बार टूटा। सीरियाई न्यूज़ एजेंसी साना की दी गई खबरों पर यकीन किया जाए तो अगले कुछ ही हफ्तों में इस पूरे इलाके को विद्रोहियों के कब्जे से पूरी तरह से आजाद करवा लिया जाएगा। बताया यही जा रहा है कि इस इलाके में आने वाला नया मौसम इस इलाके के लिए बेहद खास मौसम बन जाएगा।

First published: January 12, 2017
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